BJP Chhattisgarh Incharge : भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रभारी तथा सह प्रभारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के गठन के बाद यह महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव सामने आया है। पार्टी ने कुल 36 प्रदेशों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रभारी या सह प्रभारी स्तर पर नई जिम्मेदारियां तय की हैं। इन नियुक्तियों को आगामी चुनावों और संगठन को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी
बीजेपी के इस संगठनात्मक फेरबदल में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ बीजेपी का प्रभारी बनाया गया है। वहीं सिद्धार्थ शंभू को छत्तीसगढ़ का सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। नई जिम्मेदारियों के साथ पार्टी ने राज्य में संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए नए नेतृत्व संयोजन पर भरोसा जताया है। छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार है और ऐसे में प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

स्मृति ईरानी के पास दो राज्यों की जिम्मेदारी
स्मृति ईरानी को सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि हरियाणा की भी जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह वह एक साथ दो राज्यों के संगठनात्मक कामकाज में भूमिका निभाएंगी। बीजेपी की नई केंद्रीय टीम में शामिल किए जाने के बाद उन्हें राज्यों की जिम्मेदारी मिलना पार्टी संगठन में उनकी भूमिका के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि इन नियुक्तियों के राजनीतिक प्रभाव का आकलन आने वाले समय में संगठनात्मक गतिविधियों और चुनावी परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा।
मॉडलिंग और टीवी से राजनीति तक का सफर
राजनीति में आने से पहले स्मृति ईरानी मॉडल और टेलीविजन अभिनेत्री के रूप में पहचान बना चुकी थीं। लोकप्रिय टीवी धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से उन्हें व्यापक लोकप्रियता मिली। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और बीजेपी से जुड़ गईं। साल 2003 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इसके अगले साल पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव में दिल्ली की चांदनी चौक सीट से उम्मीदवार बनाया।

2004 में कपिल सिब्बल के खिलाफ चुनाव लड़ा
स्मृति ईरानी ने 2004 के लोकसभा चुनाव में चांदनी चौक से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के खिलाफ चुनाव लड़ा। हालांकि इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाना जारी रखा और धीरे-धीरे बीजेपी की राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह मजबूत की।
2010 में राष्ट्रीय सचिव बनीं
साल 2010 में स्मृति ईरानी को बीजेपी का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। इसके साथ ही उन्हें पार्टी की महिला इकाई की अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी मिली। संगठन में लगातार बढ़ती भूमिका के बाद साल 2011 में वह गुजरात से राज्यसभा सदस्य चुनी गईं। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के कई मुद्दों को मजबूती से उठाया।
2014 में राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी से मैदान में उतरीं
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने स्मृति ईरानी को उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से उम्मीदवार बनाया। यहां उनका मुकाबला कांग्रेस नेता राहुल गांधी से हुआ। चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन अमेठी से उनकी सक्रिय राजनीतिक मौजूदगी ने राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें प्रमुख बीजेपी नेताओं में स्थापित किया। इसी वर्ष नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया गया।

मोदी सरकार में संभालीं कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
स्मृति ईरानी ने केंद्र सरकार में अलग-अलग महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। 2017 में उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने एक बार फिर अमेठी से चुनाव लड़ा। इस बार उन्होंने राहुल गांधी को हराकर लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्हें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।
2024 में अमेठी से मिली हार
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी ने अमेठी से तीसरी बार चुनाव लड़ा। हालांकि इस बार उन्हें जीत नहीं मिली। इसके बावजूद बीजेपी संगठन में उनकी सक्रियता बनी रही। अब नितिन नवीन की नई टीम में उन्हें छत्तीसगढ़ और हरियाणा की जिम्मेदारी मिलने से संगठन में उनकी भूमिका फिर चर्चा में है।
नई जिम्मेदारियों से संगठन पर रहेगा फोकस
बीजेपी के ताजा संगठनात्मक फेरबदल में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए प्रभारी तथा सह प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। स्मृति ईरानी को दो राज्यों की जिम्मेदारी मिलने के साथ ही छत्तीसगढ़ में सिद्धार्थ शंभू को सह प्रभारी बनाया गया है। आने वाले समय में इन नेताओं की भूमिका प्रदेश स्तर पर पार्टी संगठन, कार्यकर्ताओं के समन्वय और राजनीतिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण रहेगी।
Read More : Haryana News: हरियाणा के गांव में लव मैरिज को लेकर विवाद, सरपंच बोले- सिर्फ संस्कृति की बात










