Haryana News: हरियाणा के गांव में लव मैरिज को लेकर विवाद, सरपंच बोले- सिर्फ संस्कृति की बात

हरियाणा के जन स्वास्थ्य मंत्री रणबीर गंगवा के ससुराल गांव आर्यनगर में लव मैरिज पर रोक और सामाजिक बहिष्कार की खबरें पूरी तरह भ्रामक निकली हैं। गांव के सरपंच ने स्पष्ट किया है कि पंचायत ने ऐसा कोई फरमान जारी नहीं किया है

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

सितम्बर 23, 2026

Haryana News: हरियाणा में पंचायतों के फैसले अक्सर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन जाते हैं। हाल ही में राज्य के जन स्वास्थ्य मंत्री रणबीर गंगवा के ससुराल, गांव आर्यनगर से एक खबर तेजी से फैली कि वहां की पंचायत ने ‘लव मैरिज’ (प्रेम विवाह) पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। अफवाहों में यह दावा किया गया कि यदि कोई भी युवा इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसका और उसके परिवार का गांव से पूर्ण रूप से सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। इस खबर के वायरल होने के बाद, गांव के सरपंच और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सामने आकर इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए पूरी स्थिति को स्पष्ट किया है।

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लव मैरिज पर रोक और बहिष्कार की खबरें भ्रामक

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हरियाणा के गांव में लव मैरिज को लेकर विवाद

आर्यनगर गांव के सरपंच रतन टाक और स्थानीय बीजेपी नेता हनुमान ने मीडिया और जनता के बीच फैल रही इन अफवाहों पर विराम लगा दिया है। सरपंच रतन टाक ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि पंचायत की ओर से ऐसा कोई भी तानाशाही फरमान या आदेश जारी नहीं किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्यनगर एक शांतिपूर्ण गांव है जहां सभी 36 बिरादरियों के लोग आपसी भाईचारे और पूर्ण सद्भावना के साथ एक साथ रहते हैं। गांव में किसी भी व्यक्ति या परिवार के सामाजिक बहिष्कार की कोई बात नहीं कही गई है।

रविवार की पंचायत का मुख्य एजेंडा क्या था?

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हरियाणा के गांव में लव मैरिज को लेकर विवाद

सरपंच ने पूरी घटना की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए बताया कि रविवार को गांव में जो पंचायत बुलाई गई थी, उसका उद्देश्य प्रेम विवाह का विरोध करना नहीं था। दरअसल, यह बैठक हाल ही में गांव के ही एक युवक और युवती द्वारा आपस में शादी कर लेने के बाद बुलाई गई थी। हरियाणा की ग्रामीण संस्कृति और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, एक ही गांव के लड़के और लड़की को ‘भाईचारे’ के नाते भाई-बहन के समान माना जाता है। एक ही गांव की सीमा के भीतर शादी करना यहां के सामाजिक ताने-बाने और पुरानी परंपराओं के विरुद्ध माना जाता है।

अभिभावकों की सहमति और संस्कृति बचाने की अपील

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हरियाणा के गांव में लव मैरिज को लेकर विवाद

सरपंच रतन टाक ने बताया कि पंचायत में नवविवाहित जोड़े के माता-पिता भी उपस्थित थे। उन सभी की सहमति और पंचायत के सामूहिक विचार-विमर्श के बाद केवल यह प्रस्ताव रखा गया था कि गांव की ऐतिहासिक मर्यादा और संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए एक ही गांव के लड़का-लड़की को आपस में शादी नहीं करनी चाहिए। यह पंचायत किसी को सजा देने के लिए नहीं, बल्कि गांव के सामाजिक मूल्यों को सहेजने के लिए एक मंच के रूप में कार्य कर रही थी।

दंडात्मक कार्रवाई नहीं, चलेगा जागरूकता अभियान

इस मामले का सबसे अहम और सकारात्मक पहलू यह है कि पंचायत ने किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई या ‘हुक्का-पानी बंद’ करने जैसी प्रथाओं को पूरी तरह नकार दिया है। पंचायत प्रतिनिधियों ने यह तय किया है कि भविष्य में इस पुरानी परंपरा को बनाए रखने के लिए डराने या बहिष्कार करने के बजाय ‘जागरूकता’ का रास्ता अपनाया जाएगा। युवाओं और परिवारों के बीच एक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ी गांव की संस्कृति, एक ही गांव में शादी न करने के सामाजिक कारणों और आपसी भाईचारे के महत्व को समझ सके।

सरपंच के इस स्पष्टीकरण के बाद उन सभी विवादों पर पूर्ण रूप से विराम लग गया है, जो इस घटना को एक दमनकारी कदम के रूप में पेश कर रहे थे। पंचायत का यह कदम स्पष्ट करता है कि वे आधुनिक समय में भी अपनी संस्कृति को बिना किसी बल प्रयोग के, आपसी सहमति और समझदारी से बचाना चाहते हैं।

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