Karnataka Politics: कर्नाटक कांग्रेस में सियासी हलचल, DK शिवकुमार का बयान चर्चा में

कर्नाटक मंत्रिमंडल विस्तार से पहले मची सियासी हलचल और विधायकों के इस्तीफे के बीच सीएम डी. के. शिवकुमार ने स्पष्ट किया है कि सभी विधायकों को एक साथ कैबिनेट में शामिल करना संभव नहीं है

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 3, 2026

Karnataka Politics: कर्नाटक की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलें और कयासबाजी अब थम चुकी हैं, लेकिन मंत्रियों की नई सूची सामने आने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर भी सुनाई देने लगे हैं। जिन विधायकों ने सिद्धारमैया सरकार के इस मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री पद मिलने की मजबूत उम्मीद लगा रखी थी, उन्हें निराशा हाथ लगी है। इस राजनीतिक उठापटक और विरोध के बीच, राज्य के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार का एक बड़ा और अहम बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने सभी विधायकों को एक साथ संतुष्ट करने में असमर्थता जताई है।

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डी. के. शिवकुमार का बयान: “सभी को एकसाथ नहीं किया जा सकता शामिल”

मंत्रिमंडल विस्तार से ठीक पहले मची सियासी हलचल और विधायकों की नाराजगी पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए डी. के. शिवकुमार ने दोटूक अंदाज में कहा कि यह संभव ही नहीं है कि पार्टी के सभी विधायकों को एक साथ मंत्रिमंडल में जगह दी जा सके।

उन्होंने विधायकों का हौसला बढ़ाते हुए अपना खुद का उदाहरण दिया और याद दिलाया कि अतीत में जब सिद्धारमैया का मंत्रिमंडल गठन हुआ था, तब उन्हें भी तुरंत मंत्री पद नहीं मिला था। डीके ने सवालिया अंदाज में कहा, “क्या तब मुझे मंत्री पद मिला था? लेकिन क्या मैं बाद में मंत्री नहीं बना?” उन्होंने नाराज विधायकों को पूरा भरोसा दिलाया कि जिन नेताओं को इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई है, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि भविष्य में आने वाले अवसरों पर उन्हें भी जरूर मौका दिया जाएगा।

विधायकों के इस्तीफे और पार्टी के भीतर नाराजगी

मुख्यमंत्री के लाख समझाने और भरोसे के बावजूद, कैबिनेट में जगह न मिलने से नाराज कुछ कांग्रेस विधायकों ने सीधा बगावती रुख अख्तियार कर लिया है। मंत्रिमंडल विस्तार से ठीक पहले कांग्रेस के दो विधायकों द्वारा अपने पद से इस्तीफा दिए जाने से सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इंडी विधानसभा क्षेत्र से विधायक पाटिल ने सीधे विधान सौध पहुंचकर विधानसभा के उपाध्यक्ष रुद्रप्पा लामानी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। जैसे ही उनके इस्तीफे की खबर बाहर आई, उनके समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर भारी विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए उनके नेता के साथ अन्याय किए जाने का खुला आरोप लगाया। इसके अलावा, कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल ने भी अपना इस्तीफा दे दिया है। इतना ही नहीं, राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव को इस बार मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने पर उनकी पत्नी ने भी सार्वजनिक रूप से हैरानी जताई है और पार्टी के फैसले पर कड़े सवाल खड़े किए हैं, जिससे हाईकमान की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

दो महीने बाद मंत्रिमंडल विस्तार और 20 नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण

मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के कार्यभार संभालने के ठीक दो महीने बाद, सोमवार (3 अगस्त) को बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा रहा है। इस नए विस्तार के तहत कुल 20 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। एक तरफ जहां पार्टी सरकार को मजबूत करने और प्रशासनिक कामकाज को गति देने के लिए इस विस्तार को जरूरी मान रही है, वहीं दूसरी तरफ टिकट और मंत्री पद से वंचित रहे नेताओं और उनके समर्थकों का यह विरोध कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ी आंतरिक चुनौती बन गया है। अब देखना यह होगा कि पार्टी नेतृत्व इस असंतोष को शांत करने में कितना सफल होता है।

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