Karnataka CM Oath: कर्नाटक की राजनीति में एक लंबे और उतार-चढ़ाव भरे दौर के बाद, कांग्रेस के दिग्गज नेता डीके शिवकुमार राज्य के 25वें मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सिद्दरमैया के साथ सत्ता की लंबी खींचतान और राजनीतिक कशमकश के बाद आखिरकार शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनने का सपना सच होने जा रहा है। वे आगामी 3 जून को दोपहर 3:30 बजे लोक भवन के ग्लास हाउस में शपथ ग्रहण करेंगे।
शुभ मुहूर्त और राहुल-प्रियंका की उपस्थिति
शपथ ग्रहण की तारीख का निर्धारण डीके शिवकुमार के निजी ज्योतिषी बेलूर द्वारकानाथ की सलाह पर किया गया है। ज्योतिष में गहरी आस्था रखने वाले शिवकुमार को शाम 4:05 बजे का समय शुभ बताया गया है, जो इस शपथ ग्रहण के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। इस समय को चुनने के पीछे एक राजनीतिक कारण भी है—ताकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और एआईसीसी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा इस ऐतिहासिक अवसर पर उपस्थित रह सकें। ज्ञात हो कि नेतृत्व परिवर्तन की इस जटिल प्रक्रिया को सुलझाने में प्रियंका गांधी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
महंगाई और आमजन की सुविधा के लिए सादगी का फैसला
आमतौर पर कर्नाटक में शपथ ग्रहण समारोह विधान सौध की भव्य सीढ़ियों पर आयोजित किए जाते हैं, जिसमें हज़ारों लोगों की भीड़ जुटती है। लेकिन इस बार कांग्रेस ने इस भव्यता से परहेज किया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जीसी चंद्रशेखर ने बताया कि ईंधन की बढ़ती कीमतों और महंगाई की मार झेल रही जनता के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए समारोह को बेहद सादा रखने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि शिवकुमार स्वयं चाहते थे कि कार्यक्रम ऐसा हो जो जनसेवा के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाए। चूंकि शपथ ग्रहण कार्यदिवस (वर्किंग डे) पर है, इसलिए पार्टी ने यह भी सुनिश्चित किया है कि बड़े पैमाने पर भीड़ न जुटाकर आम जनता को ट्रैफिक जाम जैसी किसी भी असुविधा से बचाया जाए।
सर्वसम्मति से नेतृत्व और कैबिनेट की चुनौती
शनिवार को विधान सौध में हुई कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक में शिवकुमार को सर्वसम्मति से नेता चुना गया। यह घटना 17 वर्षों के लंबे अंतराल में कर्नाटक कांग्रेस के नेतृत्व में आया सबसे बड़ा बदलाव है, क्योंकि इससे पहले यह पद सिद्दरमैया के पास था। बैठक में स्वयं सिद्दरमैया ने शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे जी. परमेश्वर ने समर्थन दिया और पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इसकी औपचारिक घोषणा की।
अब सभी की निगाहें नई कैबिनेट के गठन पर टिकी हैं। पार्टी के सामने जाति, समुदाय और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती है। चर्चाएं यह भी हैं कि ‘अहिंदा’ (सामाजिक गठबंधन) फॉर्मूले के तहत उपमुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार कतार में हैं। इसके अलावा, निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दरमैया के बेटे यतींद्र को लेकर भी अटकलें तेज हैं, हालांकि खबरें हैं कि सिद्दरमैया स्वयं उन्हें कैबिनेट में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं। पार्टी का ध्यान अब जल्द से जल्द कैबिनेट गठन कर सरकार को सुचारू रूप से चलाने पर है।










