Kangana Ranaut: ‘गटर छाप’ बयान पर कंगना घिरीं, सौरव दास ने दिया तगड़ा जवाब

बीजेपी सांसद कंगना रनौत की 'गटर छाप' टिप्पणी को लेकर विवाद बढ़ गया है। इस मामले पर सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने प्रतिक्रिया देते हुए अपना पक्ष रखा।

Kangana Ranaut

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 28, 2026

Kangana Ranaut: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत द्वारा आधुनिक पीढ़ी यानी ‘Gen-Z’ पर की गई एक टिप्पणी को लेकर राजनीतिक गलियारों में भारी विवाद खड़ा हो गया है। कंगना रनौत द्वारा जेन-जी को कथित तौर पर “जेनरेशन गटर” कहे जाने के बाद देश में बहस छिड़ गई है। इस बयान के सामने आने के बाद विभिन्न हलकों से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इसी क्रम में, कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने इस पूरे विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कंगना रनौत और उनके बयानों पर जमकर निशाना साधा है।

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“कंगना को उनकी अपनी पार्टी के लोग ही सीरियसली नहीं लेते”

सौरव दास ने मीडिया से बातचीत के दौरान कंगना रनौत के बयानों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अभिनेत्री-सांसद को उनकी अपनी पार्टी के लोग ही ज्यादा नहीं पूछते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब उनकी पार्टी के लोग ही उन्हें ज्यादा सीरियसली नहीं लेते हैं, तो फिर आम लोग या अन्य दल उन्हें क्यों गंभीरता से लें?

सौरव दास ने आगे कहा, “मुझे नहीं लगता कि कोई भी उनकी बातों को कोई तवज्जो देता है या उनकी बात सुनता है। अब वह राजनेता बन चुकी हैं, इसलिए इस पर मैं बहुत ज्यादा कुछ नहीं बोलूंगा, लेकिन नेताओं को कम से कम अपनी शब्दावली (भाषा) संभाल कर रखनी चाहिए।” उन्होंने नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में बैठे लोगों को अपने पद की गरिमा और मर्यादा को हमेशा बनाकर रखना चाहिए, ताकि समाज में गलत संदेश न जाए।

“जेन-जी ने देश के लिए बहुत कुछ किया है”

कंगना रनौत की टिप्पणी की आलोचना करते हुए सौरव दास ने देश की युवा पीढ़ी (Gen-Z) की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी ने देश के लोकतंत्र में फिर से नया भरोसा और विश्वास जगाने का काम किया है।

उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “आपसे कई गुना ज्यादा जेन-जी के युवाओं ने इस देश के लिए योगदान दिया है और आज भी दे रहे हैं। देश के लोकतंत्र को मजबूत करने का काम इस युवा पीढ़ी ने किया है, किसी अन्य ने नहीं। राजनेताओं को इस बात को हमेशा याद रखना चाहिए कि युवा देश का भविष्य और रीढ़ हैं।”

प्रदर्शनकारियों की मांगें और एफआईआर वापसी पर बयान

इस बयानबाजी के अलावा, सौरव दास ने सरकार के साथ चल रहे गतिरोध और अपनी प्रमुख मांगों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वे लोग लंबे समय से जमीन पर संघर्ष कर रहे हैं और उनकी जो जायज मांगें थीं, वे हर हाल में पूरी होनी चाहिए।

मुख्य मांग: हमारी सबसे प्रमुख मांग यह थी कि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी एफआईआर (FIR) तुरंत वापस ली जाएं। इसके साथ ही सरकार की ओर से यह गारंटी भी मिलनी चाहिए कि भविष्य में इस तरह की कार्रवाई दोबारा नहीं की जाएगी। इस बात की लिखित गारंटी आज तक आ जानी चाहिए थी।

गिरफ्तारियों पर रुख: हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों की बिना शर्त रिहाई होनी चाहिए। सौरव दास ने स्पष्ट किया कि यदि सुप्रीम कोर्ट यह कहती है कि जिन लोगों पर पहले से कोई अन्य आपराधिक मामले या एफआईआर दर्ज है, उन्हें न छोड़ा जाए, तो यह बात उन्हें बिल्कुल मंजूर नहीं है। हमारी मांग बिल्कुल स्पष्ट है और समझौते के अनुसार ही कार्रवाई होनी चाहिए।

सरकारी नोटिफिकेशन और बैठकों का दौर

सौरव दास ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि बीती रात लगभग दस बजे से लेकर एक बजे तक सरकार के उच्च प्रतिनिधियों के साथ एक लंबी उच्चस्तरीय बैठक हुई है। इस बैठक में मुख्य रूप से इसी बात पर चर्चा हो रही थी कि प्रदर्शनकारियों को कैसे और कब रिहा किया जाएगा तथा सरकार इस संबंध में क्या आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करेगी।

उन्होंने बताया कि असम और बिहार राज्यों की सरकारों ने इस संबंध में अपने नोटिफिकेशन पहले ही जारी कर दिए हैं। वर्तमान में उन नोटिफिकेशन्स की भाषा (Language) और उसमें इस्तेमाल शब्दों को लेकर विचार-विमर्श चल रहा था। हमने सरकार के सामने यह बात रखी है कि इस पूरे आंदोलन में शामिल किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ भविष्य में कोई कानूनी कार्रवाई या एफआईआर नहीं होनी चाहिए। आज मंगलवार का दिन है और हम सरकार के आधिकारिक आदेश और नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे हैं। सरकार को अपने वादों पर अब जल्द से जल्द अमल करना चाहिए।

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