Kailash Mansarovar Yatra 2026: सनातन धर्म की सबसे पवित्र और दुर्गम यात्राओं में से एक ‘कैलास मानसरोवर यात्रा 2026’ का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ हो चुका है। देश के कोने-कोने से आए शिवभक्तों के चेहरे पर भोलेनाथ के दर्शन की उत्सुकता साफ देखी जा सकती है। दिल्ली से शनिवार को इस साल की यात्रा के पहले जत्थे को बेहद गरिमामय और उत्साहपूर्ण माहौल के बीच रवाना किया गया। इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत के साथ ही पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा।
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विदेश राज्यमंत्री पबित्र मार्गरिटा ने की कार्यक्रम की अध्यक्षता
इस पावन यात्रा के पहले जत्थे को विदा करने के लिए राजधानी दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू भवन में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री पबित्र मार्गरिटा ने की। उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच हरी झंडी दिखाकर तीर्थयात्रियों के पहले दल को गंतव्य की ओर रवाना किया।
शिवभक्तों को संबोधित करते हुए विदेश राज्यमंत्री ने सभी तीर्थयात्रियों को अपनी शुभकामनाएं दीं और उनके सफल एवं सुरक्षित सफर की कामना की। उन्होंने यात्रियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक सफर नहीं है, बल्कि यह असीम श्रद्धा और आत्मिक शांति का मार्ग है। सरकार यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उद्घाटित नए केंद्रों में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
विदेश राज्यमंत्री पबित्र मार्गरिटा ने तीर्थयात्रियों को एक बड़ी खुशखबरी देते हुए बताया कि इस बार की यात्रा पिछले वर्षों की तुलना में अधिक सुगम और आरामदायक होने वाली है। उन्होंने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हाल ही में वर्चुअली उद्घाटित किए गए ‘नए अनुकूलन केंद्रों’ (Acclimatization Centers) में सभी तीर्थयात्रियों के ठहरने और विश्राम करने की विशेष व्यवस्था की गई है।
चूंकि कैलास मानसरोवर यात्रा अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों से होकर गुजरती है, जहां ऑक्सीजन की कमी और भीषण ठंड का सामना करना पड़ता है, इसलिए ये नए अनुकूलन केंद्र यात्रियों के स्वास्थ्य को पहाड़ी माहौल के अनुरूप ढालने में बेहद मददगार साबित होंगे। इन केंद्रों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और बुनियादी जरूरत की सभी चीजें मौजूद रहेंगी, ताकि यात्रियों को ऊंचाई पर होने वाली बीमारियों (Altitude Sickness) से बचाया जा सके।
राज्य सरकारों और विभिन्न मंत्रालयों के संयुक्त प्रयासों की सराहना
एक सुगम यात्रा के पीछे महीनों की प्रशासनिक तैयारी होती है। विदेश राज्यमंत्री ने इस बात को रेखांकित करते हुए उन सभी सरकारी मंत्रालयों, केंद्रीय विभागों और राज्य सरकारों की कड़ी मेहनत की सराहना की, जो दिन-रात इस यात्रा को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। उन्होंने विशेष रूप से उत्तराखंड, सिक्किम और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों के लगातार प्रयासों की तारीफ की। ये राज्य भौगोलिक और प्रशासनिक स्तर पर तीर्थयात्रियों को अपने क्षेत्रों से सुरक्षित गुजारने और उन्हें हर संभव बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए लगातार बुनियादी ढांचे में सुधार कर रहे हैं।
तिब्बत में तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे भारतीय राजदूत
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और चीन के नियंत्रण वाले तिब्बत क्षेत्र में सुविधाओं को पुख्ता करने के लिए राजनयिक स्तर पर भी बड़े कदम उठाए गए हैं। इसी सिलसिले में, चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने गुरुवार को ल्हासा (तिब्बत) का एक महत्वपूर्ण दौरा किया।
राजदूत दोराईस्वामी के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य स्थानीय चीनी अधिकारियों और प्रशासन के साथ मिलकर संयुक्त रूप से उन सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा करना था, जो भारतीय तीर्थयात्रियों के स्वागत, सुरक्षा, ठहरने और चिकित्सा के लिए की गई हैं। भारत सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि विदेशी धरती पर भी भारतीय नागरिकों को किसी भी तरह की प्रशासनिक या व्यावहारिक दिक्कतों का सामना न करना पड़े। रणनीतिक और कूटनीतिक रूप से यह समीक्षा बेहद अहम मानी जा रही है ताकि पूरी यात्रा निर्बाध रूप से संपन्न हो सके।










