K Annamalai: तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने मंगलवार को पार्टी आलाकमान के साथ हुई मुलाकातों के बाद पांच पन्नों का इस्तीफा सौंपकर हलचल मचा दी है। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष से लंबी चर्चा की। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की और उन्हें एक किताब भेंट की। इस्तीफे और इन बैठकों के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि अन्नामलाई ने बीजेपी से पूरी तरह किनारा कर लिया है।
नई पार्टी का खाका
सूत्रों और उनके करीबियों के अनुसार, अन्नामलाई अब एक नए राजनीतिक अध्याय की ओर बढ़ रहे हैं। वह अगले सात से आठ महीनों के भीतर अपनी खुद की एक नई राजनीतिक पार्टी लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं। उनकी नई पार्टी का वैचारिक दृष्टिकोण ‘धर्मनिरपेक्ष’ (Secular) और ‘तमिल प्रथम’ (Tamil First) की नीति पर आधारित होगा। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य तमिलनाडु की पारंपरिक द्रविड़ पार्टियों और बीजेपी के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र विकल्प के रूप में उभरना है। अन्नामलाई की परिकल्पना एक ऐसी पार्टी की है जो तमिल अस्मिता को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़कर चले और मुद्दों पर आधारित राजनीति करे।
मतभेदों का कारण
बीजेपी के साथ अन्नामलाई के मतभेद अचानक नहीं, बल्कि पिछले कुछ महीनों से जारी थे। जानकारों का कहना है कि हालिया चुनावों में प्रत्याशियों के चयन और रणनीतिक निर्णयों को लेकर वह पार्टी नेतृत्व से नाखुश थे। अन्नामलाई का स्पष्ट तर्क रहा है कि बीजेपी को तमिलनाडु में अपनी जड़ों को मजबूत करने के लिए गठबंधन की बैसाखियों के बजाय एक स्वतंत्र संगठनात्मक आधार तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने हमेशा से राज्य में पार्टी के अकेले दम पर चुनाव लड़ने की वकालत की है, जो शायद पार्टी की राष्ट्रीय रणनीति से मेल नहीं खा पा रही थी।
नीतियों पर मुखर विरोध और भविष्य की राह
अन्नामलाई के बीजेपी से अलगाव की नींव तब और गहरी हुई, जब उन्होंने केंद्र सरकार के कई निर्णयों का खुलकर विरोध किया। हाल ही में सीबीएसई (CBSE) द्वारा कक्षा 9 के छात्रों के लिए ‘तीन भाषा अनिवार्य’ नीति लागू करने के फैसले पर अन्नामलाई ने तीखी आलोचना की थी। उन्होंने इसे तमिलनाडु के अभिभावकों और छात्रों के लिए चिंताजनक बताया था। राज्य के हितों के प्रति उनका यह रुख पार्टी के राष्ट्रीय रुख से अलग रहा, जो उनके इस्तीफे का एक बड़ा कारण बना।
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या अन्नामलाई का यह नया ‘तमिल विकल्प’ राज्य की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव ला पाएगा या यह केवल एक और क्षेत्रीय पार्टी बनकर रह जाएगी। यह कदम तमिलनाडु की राजनीति में बीजेपी की भविष्य की भूमिका को भी काफी प्रभावित करेगा।
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