JPSC Exam Controversy: JPSC परीक्षा गड़बड़ी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, झारखंड सरकार समेत 6 को नोटिस

JPSC परीक्षा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। कथित गड़बड़ियों की जांच को लेकर दाखिल याचिका पर कोर्ट ने केंद्र, झारखंड सरकार समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। लेकिन सवाल सिर्फ नोटिस का नहीं है—क्या इस जांच से परीक्षा प्रक्रिया की पूरी तस्वीर बदलेगी और अभ्यर्थियों को मिलेगा बड़ा फैसला?

JPSC Exam Controversy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 24, 2026

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JPSC Exam Controversy:  झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 को लेकर उठे विवाद ने अब देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। परीक्षा में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने झारखंड सरकार, JPSC समेत सभी छह प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। इस घटनाक्रम के बाद परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है।

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की सुनवाई

मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आगे की सुनवाई के लिए जल्द तारीख तय करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब झारखंड सरकार और संबंधित आयोगों को इस मामले में अपना पक्ष रखना होगा। याचिका में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और कथित गड़बड़ियों की गहराई से जांच की मांग की गई है।

छात्रों के लगातार प्रदर्शन का अदालत में हुआ जिक्र

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने अदालत के सामने छात्रों के विरोध प्रदर्शन का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि झारखंड में छात्र लगातार सड़कों पर उतरकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना था कि विवाद केवल JPSC तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC की परीक्षाओं को लेकर भी अभ्यर्थियों में असंतोष बना हुआ है।

CBI जांच या विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग

याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग रखी गई। इसके लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी CBI से जांच कराने का सुझाव दिया गया। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित करने की मांग भी की गई। याचिकाकर्ता का पक्ष था कि परीक्षा से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष तरीके से जांच होने पर वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश से जांच पर क्या कहा

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति बनाने की मांग पर अलग रुख व्यक्त किया। अदालत ने संकेत दिया कि यह मामला केवल प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं माना जा सकता। यदि परीक्षा में वास्तव में किसी तरह की आपराधिक गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जांच सामान्य प्रशासनिक समिति के बजाय पेशेवर जांच एजेंसी से कराना अधिक उचित होगा।

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फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान जांच के तकनीकी पहलुओं की आवश्यकता पर भी जोर दिया। अदालत के अनुसार, यदि परीक्षा प्रक्रिया में आपराधिक अनियमितता के आरोप हैं, तो फॉरेंसिक जांच के साथ डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण भी जरूरी हो सकता है। परीक्षा से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, तकनीकी जानकारी और अन्य संभावित साक्ष्यों की पड़ताल के लिए विशेषज्ञता रखने वाली जांच एजेंसी की जरूरत पड़ सकती है।

झारखंड सरकार ने कोर्ट का नोटिस स्वीकार किया

सुनवाई के दौरान झारखंड सरकार की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट का नोटिस स्वीकार कर लिया। अदालत ने मामले में शामिल अन्य सभी प्रतिवादियों को भी नोटिस तुरंत तामील कराने के निर्देश दिए हैं। अब संबंधित पक्षों को याचिका में लगाए गए आरोपों और जांच की मांग पर अपना जवाब अदालत के सामने रखना होगा।

JPSC विवाद पर आगे की सुनवाई का इंतजार

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए जल्द तारीख तय करने के निर्देश दिए हैं। इससे JPSC परीक्षा-2025 से जुड़े अभ्यर्थियों और छात्रों की नजर अब शीर्ष अदालत की अगली कार्रवाई पर टिक गई है। फिलहाल अदालत ने कथित अनियमितताओं के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। आगे की सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद मामले की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

छात्रों की नजर अब सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई पर

JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर झारखंड में लंबे समय से छात्रों की नाराजगी सामने आती रही है। ऐसे में JPSC प्रारंभिक परीक्षा-2025 से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचना अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि शीर्ष अदालत आगे जांच के संबंध में क्या निर्देश देती है और कथित गड़बड़ियों की जांच किस एजेंसी या प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ती है।

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