One Nation One Election : वन नेशन वन इलेक्शन यानी देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की बहस के बीच केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने बार-बार होने वाले चुनावों को विकास कार्यों में बाधा बताते हुए कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश में एक साथ चुनाव की व्यवस्था जरूरी है। हरिद्वार में संत समाज से बातचीत के दौरान उन्होंने इस व्यवस्था के समर्थन में आगे आने की अपील भी की।
2029 में साथ चुनाव कराने की जताई संभावना
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन के लिए 2034 तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, 2029 में ही लोकसभा के साथ 22 राज्यों की विधानसभा के चुनाव कराए जा सकते हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, 2029 में एक साथ चुनाव कराने का अंतिम निर्णय संवैधानिक और राजनीतिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
हरिद्वार में संतों के बीच वन नेशन वन इलेक्शन पर चर्चा
हरिद्वार में संत समाज के समागम के दौरान वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर संकल्प और चर्चा हुई। इसके बाद इस मुद्दे को लेकर नई राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया है कि केंद्र सरकार 2034 के बजाय 2029 में ही लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की दिशा में विचार कर रही है।
22 राज्यों में एक साथ चुनाव कराने की चर्चा
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2029 में लोकसभा के साथ 22 राज्यों में विधानसभा चुनाव कराए जाने की संभावना बताई जा रही है। इनमें फिलहाल 16 राज्यों में NDA की सरकार है, जबकि छह राज्यों में INDIA गठबंधन से जुड़ी सरकारें सत्ता में हैं। हालांकि, इस तरह चुनावों को एक साथ कराने के लिए कई राज्यों के मौजूदा विधानसभा कार्यकाल में बदलाव करना पड़ेगा।
सात राज्यों में 2027 से पहले चुनाव कराने की चुनौती
बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश, गोवा, गुजरात, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों की मौजूदा विधानसभाओं का कार्यकाल सामान्य स्थिति में 2032 तक चल सकता है। यदि 2029 में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव कराए जाते हैं, तो इन राज्यों में निर्धारित समय से करीब तीन वर्ष पहले चुनाव कराने की जरूरत पड़ेगी।
आठ राज्यों में चार साल पहले चुनाव की जरूरत
कर्नाटक, तेलंगाना, मेघालय, नागालैंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और त्रिपुरा में 2028 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। सामान्य पांच वर्षीय कार्यकाल के अनुसार इन राज्यों की सरकारें 2033 तक बनी रह सकती हैं। ऐसे में 2029 में लोकसभा के साथ चुनाव कराने के लिए इन राज्यों में लगभग चार साल पहले विधानसभा चुनाव कराने की स्थिति बनेगी।
आजादी के बाद पहले भी साथ हुए थे चुनाव
भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था बिल्कुल नई नहीं है। आजादी के बाद शुरुआती वर्षों में देश में दोनों चुनाव एक ही समय पर आयोजित किए जाते थे। 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा तथा अधिकांश राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ हुए थे। बाद में विभिन्न राज्यों में राजनीतिक अस्थिरता, सरकारों के समय से पहले गिरने और अन्य परिस्थितियों के कारण चुनावों का चक्र अलग-अलग हो गया।
JPC की बैठक में भी जारी है मंथन
वन नेशन वन इलेक्शन से जुड़े विधेयकों पर विचार के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC की बैठक भी इस मुद्दे पर जारी है। बैठक में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी, पी. चिदंबरम और सुरजेवाला सहित विपक्ष के कई नेता शामिल हुए। NCP के शरद पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले भी बैठक में पहुंचीं। समिति में प्रस्ताव के विभिन्न संवैधानिक और व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की जा रही है।
इच्छाशक्ति से संभव हैं बड़े बदलाव: JPC अध्यक्ष
JPC अध्यक्ष पीपी चौधरी ने बैठक से पहले कहा कि यदि इच्छाशक्ति मौजूद हो तो बड़े बदलाव संभव हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल चुनावों की संख्या कम करना नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना भी है। वन नेशन वन इलेक्शन को लागू करने के लिए संविधान, राज्यों के कार्यकाल और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर सहमति बनाना जरूरी होगा।
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