Bengal Politics: महुआ मोइत्रा को रात में क्यों खाली करना पड़ा कमरा? SC पहुंचा मामला

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने नदिया जिला प्रशासन पर आधी रात को उनके निर्वाचन क्षेत्र के आधिकारिक आवास से बेदखल करने का आरोप लगाया है। महुआ ने सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल कर जल्द सुनवाई और स्वतंत्र जांच की मांग की। उनका दावा है कि कार्रवाई हाई कोर्ट के सुरक्षात्मक आदेश के बावजूद हुई।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 24, 2026

Bengal Politics: तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल के नदिया जिला प्रशासन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि हाई कोर्ट के सुरक्षात्मक आदेश के बावजूद उन्हें आधी रात को नदिया के सर्किट हाउस स्थित उनके आधिकारिक निर्वाचन क्षेत्र के आवास से जबरन बाहर कर दिया गया।

महुआ मोइत्रा की ओर से दायर याचिका में इस पूरे मामले की त्वरित सुनवाई और स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने उठाया गया, जहां मोइत्रा की ओर से संवैधानिक और संघीय ढांचे से जुड़े सवाल भी उठाए गए।

आधी रात महुआ मोइत्रा को आवास खाली कराने का आरोप

महुआ मोइत्रा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि स्थानीय प्रशासन ने हाई कोर्ट के पहले से जारी सुरक्षात्मक आदेश के बावजूद उन्हें उनके निर्वाचन क्षेत्र के आधिकारिक आवास से रात करीब 11 बजे बाहर कर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कार्रवाई में स्थानीय अधिकारियों के साथ अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट और जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका भी रही। मोइत्रा का कहना है कि जिस समय उन्हें आवास खाली करने के लिए कहा गया, उस वक्त अदालत का सुरक्षात्मक आदेश प्रभावी था।

महुआ मोइत्रा ने अनुच्छेद 32 के तहत लगाई गुहार

सुप्रीम कोर्ट में महुआ मोइत्रा के वकील ने अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका का उल्लेख करते हुए मामले की जल्द सुनवाई की मांग की। वकील ने अदालत को बताया कि एक महिला सांसद को स्थानीय प्रशासन द्वारा देर रात उनके निर्वाचन क्षेत्र के आवास से बेदखल किए जाने का आरोप है। वकील ने कहा कि मामले में केवल व्यक्तिगत अधिकारों का सवाल नहीं है, बल्कि इसमें संघवाद और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे भी शामिल हैं। इसी वजह से पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच की जरूरत बताई गई।

CJI सूर्यकांत ने कहा- ‘हम देखेंगे’

मामले का उल्लेख मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने किया गया। महुआ मोइत्रा की ओर से जल्द सुनवाई और मामले को शीघ्र सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हम देखेंगे।”अब निगाहें इस बात पर हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर आगे क्या रुख अपनाता है और मामले की सुनवाई कब होती है।

क्या है महुआ मोइत्रा के सर्किट हाउस का पूरा विवाद?

यह विवाद इसी महीने की शुरुआत में सामने आया था। महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया था कि नदिया के सर्किट हाउस में ठहरने के दौरान स्थानीय प्रशासन ने उन्हें देर रात अपना कमरा खाली करने के लिए कहा।मोइत्रा के मुताबिक, वह शाम करीब 6:30 बजे सर्किट हाउस पहुंची थीं। उन्हें वही कमरा आवंटित किया गया था, जिसमें वह आमतौर पर ठहरती थीं। शुरुआत में किसी तरह की परेशानी सामने नहीं आई और वह अपने कमरे में ठहरी हुई थीं।

खाना परोसने के बाद अचानक आया कमरा खाली करने का फोन

महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया था कि रात करीब 9:20 बजे उन्हें कमरे में खाना परोसा गया। इसके करीब आधे घंटे बाद, रात 9:47 बजे उन्हें फोन आया और कमरा खाली करने के लिए कहा गया। मोइत्रा के मुताबिक, इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और उन्हें देर रात आवास खाली करना पड़ा। अब उन्होंने इसी कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

महुआ मोइत्रा बनाम नदिया प्रशासन मामला अब सुप्रीम कोर्ट में

महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि प्रशासन की कार्रवाई अदालत के सुरक्षात्मक आदेश के बावजूद हुई। ऐसे में अब यह मामला केवल आवास खाली कराने के विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें न्यायिक आदेशों के पालन और संवैधानिक अधिकारों का सवाल भी जुड़ गया है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले में कोई विस्तृत आदेश सामने नहीं आया है। मुख्य न्यायाधीश की ओर से “हम देखेंगे” कहे जाने के बाद अब याचिका की आगे की सुनवाई और संभावित निर्देशों पर नजर बनी हुई है।