UP Politics: आरक्षण मुद्दे पर करण भूषण की एंट्री, बोले- गलत राह पर न जाए आंदोलन

आरक्षण सुधार को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच बीजेपी सांसद करण भूषण सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर मुद्दा है और पार्टी के बड़े नेताओं को बैठकर बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए। करण भूषण ने सतीश महाना के राष्ट्रगान विवाद पर भी प्रतिक्रिया देते हुए इसे गलती बताया।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 24, 2026

UP Politics: उत्तर प्रदेश की कैसरगंज लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद करण भूषण सिंह ने आरक्षण सुधार को लेकर चल रही सियासी बहस पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का मुद्दा बेहद गंभीर है और इस पर राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं को बैठकर बातचीत करनी चाहिए, ताकि विवाद का समाधान निकाला जा सके।

करण भूषण सिंह ने कहा कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन उनका व्यक्तिगत मत है कि पार्टी के बड़े नेताओं को इस विषय पर गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग इस मुद्दे को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर सकते हैं।

आरक्षण सुधार आंदोलन को लेकर बीजेपी सांसद ने जताई चिंता

करण भूषण सिंह ने कहा कि आरक्षण सुधार का मौजूदा मुद्दा काफी गंभीर है। उनके मुताबिक, इस तरह के संवेदनशील विषयों पर जल्दबाजी में बयान देने के बजाय संवाद के जरिए रास्ता निकालना ज्यादा उचित होगा।उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता इस मुद्दे पर बैठें, सभी पक्षों को सुनें और ऐसा समाधान निकालें जिससे विवाद आगे न बढ़े। सांसद ने यह भी संकेत दिया कि कुछ लोग आरक्षण सुधार की बहस को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर सकते हैं।

आरक्षण सुधार की मांग पर देशभर में तेज हुई सियासत

देश में इन दिनों आरक्षण सुधार की मांग को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। सवर्ण वर्ग से जुड़े कुछ लोग मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन और विरोध की खबरें सामने आई हैं।इस मुद्दे ने राजनीतिक दलों को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए मजबूर किया है। आरक्षण को लेकर एक तरफ सुधार की मांग उठ रही है, तो दूसरी तरफ कई राजनीतिक दल इसे सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं।

अखिलेश यादव ने आरक्षण सुधार को बताया साजिश

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरक्षण सुधार की मांग पर बीजेपी को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण में सुधार के नाम पर इसे खत्म करने की साजिश की जा रही है। अखिलेश ने इसे PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के खिलाफ साजिश बताया।सपा अध्यक्ष ने कहा कि आरक्षण पहले भी था और आगे भी रहेगा। उनके इस बयान के बाद आरक्षण सुधार का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में और ज्यादा चर्चा का विषय बन गया है।

ब्रजेश पाठक ने आंदोलनकारियों से की मुलाकात

आरक्षण सुधार को लेकर जारी बहस के बीच उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने आंदोलनकारियों से मुलाकात की। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे युवाओं की मांगों को सुना और भरोसा दिलाया कि उनकी बात बीजेपी नेतृत्व तक पहुंचाई जाएगी।ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकार युवाओं के साथ है। उनकी मुलाकात को आरक्षण सुधार को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सरकार की ओर से संवाद की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

सतीश महाना के राष्ट्रगान विवाद पर करण भूषण का बयान

करण भूषण सिंह ने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के राष्ट्रगान से जुड़े विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने घटना का वीडियो देखा है और उनके मुताबिक यह एक गलती थी। करण भूषण ने कहा कि इस घटना से सिर्फ दूसरों को ही नहीं, बल्कि खुद महाना को भी बाद में चिंता हुई होगी।उन्होंने कहा कि संभव है उस समय उनके दिमाग में कई बातें चल रही हों या उन्हें किसी अन्य कार्यक्रम में जाना हो। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रगान के दौरान इस तरह उठकर चले जाना गलती जरूर है।

करण भूषण ने सतीश महाना के मामले में दी सफाई

बीजेपी सांसद ने कहा कि बड़े नेताओं की व्यस्तता और जिम्मेदारियों के बीच कई चीजें एक साथ चलती रहती हैं। उन्होंने संभावना जताई कि शायद किसी कार्यक्रम या अन्य काम को लेकर वह सोच में रहे हों और इसी वजह से यह घटना हुई हो।हालांकि करण भूषण सिंह ने यह भी कहा कि राष्ट्रगान के दौरान हुई घटना को गलती के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाद में सतीश महाना की ओर से भी इस मामले पर बयान सामने आया है।

आरक्षण सुधार पर आगे बढ़ेगी सियासी बहस

आरक्षण सुधार के मुद्दे पर करण भूषण सिंह का बयान ऐसे समय आया है, जब इस विषय को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं। सांसद ने सीधे तौर पर किसी पक्ष का समर्थन या विरोध करने के बजाय बातचीत और समाधान का रास्ता अपनाने की बात कही है।अब देखना होगा कि आरक्षण सुधार की मांग, आंदोलनकारियों की आवाज और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के बीच आगे क्या रास्ता निकलता है। फिलहाल इस मुद्दे पर सियासत लगातार गर्म होती जा रही है और बड़े नेताओं की भूमिका पर सबकी नजरें टिकी हैं।