Punjab News: पंजाब में गन्ने की खेती और उसके उत्पादन में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। एक ओर राज्य में गन्ने की पैदावार कम हो रही है, वहीं दूसरी तरफ हाल के दिनों में चीनी की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गन्ने के उत्पादन में कमी का असर आने वाले समय में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है।
गन्ने की घटती पैदावार ने केंद्र और पंजाब सरकार की फसल विविधीकरण योजना को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। सरकार किसानों को पारंपरिक फसलों से अलग अन्य विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, लेकिन गन्ने की खेती में लगातार आ रही कमी के कारण अपेक्षित परिणाम हासिल करना चुनौती बनता जा रहा है।
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छह साल में उत्पादन में 7.74 फीसदी गिरावट
गन्ना विकास निदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में पिछले छह वर्षों के दौरान गन्ने के उत्पादन में औसतन 7.74 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2020-21 में राज्य में करीब 74.9 लाख टन गन्ने का उत्पादन हुआ था। इसके अगले वर्ष यानी 2021-22 में उत्पादन घटकर 71.3 लाख टन रह गया। हालांकि, इसके बाद 2022-23 और 2023-24 के दौरान उत्पादन में कुछ सुधार देखने को मिला और यह करीब 75.1 लाख टन दर्ज किया गया। लेकिन यह बढ़त ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी। वर्ष 2024-25 में गन्ने का उत्पादन दोबारा घटकर 72.8 लाख टन रह गया।
2025-26 में सबसे निचले स्तर पर पहुंचा उत्पादन
गन्ने के उत्पादन में गिरावट का सिलसिला वर्ष 2025-26 में भी जारी रहा। इस दौरान राज्य में महज 69.1 लाख टन गन्ने का उत्पादन दर्ज किया गया, जो हाल के वर्षों में सबसे कम बताया जा रहा है। लगातार घटते उत्पादन ने राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है। यदि गन्ने की खेती का रकबा और उत्पादन इसी तरह कम होता रहा, तो इसका सीधा असर चीनी मिलों की जरूरतों और बाजार में चीनी की उपलब्धता पर पड़ सकता है।
घट रहा है गन्ने की खेती का क्षेत्र
पंजाब में सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि गन्ने की खेती के क्षेत्रफल में भी कमी आने की बात सामने आई है। किसानों के बीच फसल पैटर्न में बदलाव और खेती से जुड़े विभिन्न कारणों के चलते गन्ने का रकबा प्रभावित हुआ है।
सरकार की ओर से फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, गन्ने की खेती में कमी यह संकेत दे रही है कि कृषि क्षेत्र में संतुलन बनाए रखना अब एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
चीनी की कीमतों पर पड़ सकता है असर
गन्ने के उत्पादन में लगातार कमी का प्रभाव चीनी उद्योग पर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है। कच्चे माल की उपलब्धता कम होने पर चीनी मिलों के उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर आगे चलकर बाजार में चीनी की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
पिछले कुछ समय से चीनी के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ऐसे में अगर पंजाब में गन्ने का उत्पादन और कम होता है तो आने वाले दिनों में कीमतों को लेकर दबाव बढ़ने की आशंका है।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
पंजाब सरकार के सामने अब एक साथ कई चुनौतियां हैं। एक तरफ किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करना है, वहीं दूसरी तरफ गन्ने जैसे महत्वपूर्ण नकदी फसल के उत्पादन को भी बनाए रखना जरूरी है। अगर गन्ने की खेती का रकबा और उत्पादन लगातार घटता रहा, तो इसका असर किसानों, चीनी मिलों और उपभोक्ताओं—तीनों पर पड़ सकता है। ऐसे में उत्पादन बढ़ाने और किसानों को गन्ने की खेती के लिए प्रोत्साहित करने की प्रभावी रणनीति आने वाले समय में अहम साबित होगी। कुल मिलाकर, पंजाब में छह वर्षों में गन्ने के उत्पादन में आई गिरावट कृषि क्षेत्र के साथ-साथ चीनी बाजार के लिए भी चिंता का संकेत है। 69.1 लाख टन तक पहुंचा उत्पादन सरकार और संबंधित विभागों के सामने स्थिति सुधारने की चुनौती को और गंभीर बनाता है।
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