Haryana News: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में प्रधानमंत्री पोषण योजना यानी मिड-डे-मील को लेकर विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था को और अधिक सख्त किया गया है। शिक्षा निदेशालय ने हाजिरी में किसी भी तरह की गड़बड़ी, गलत जानकारी या फर्जी आंकड़े दर्ज किए जाने की संभावना को खत्म करने के लिए नया निगरानी तंत्र लागू किया है।
नई व्यवस्था के तहत कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों की रोजाना उपस्थिति अब सिर्फ एक रजिस्टर तक सीमित नहीं रहेगी। बच्चों की हाजिरी का रिकॉर्ड हाजिरी रजिस्टर, पीएम पोषण एप और एमआईएस पोर्टल, तीनों जगह दर्ज किया जाएगा।
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एक ही दिन की हाजिरी, तीन जगह रिकॉर्ड
शिक्षा विभाग की नई व्यवस्था के अनुसार स्कूल में विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति सबसे पहले कक्षा अध्यापक द्वारा दर्ज की जाएगी। शिक्षक को यह सुनिश्चित करना होगा कि कक्षा में मौजूद विद्यार्थियों की संख्या सही तरीके से रिकॉर्ड की जाए। इसके बाद उपस्थित बच्चों की कुल संख्या मिड-डे-मील इंचार्ज को दी जाएगी। संबंधित शिक्षक के हस्ताक्षर के बाद मिड-डे-मील इंचार्ज हाजिरी रजिस्टर में कुल विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करेगा। इसके बाद स्कूल मुखिया के हस्ताक्षर से रिकॉर्ड को प्रमाणित किया जाएगा।
यही प्रमाणित आंकड़ा आगे पीएम पोषण एप पर अपडेट किया जाएगा। इसके साथ ही एमआईएस पोर्टल पर प्रत्येक विद्यार्थी की व्यक्तिगत उपस्थिति भी दर्ज करना अनिवार्य होगा।
डिजिटल रिकॉर्ड से बढ़ेगी पारदर्शिता
नई व्यवस्था के बाद किसी एक दिन की उपस्थिति का रिकॉर्ड स्कूल के पास कागजी और डिजिटल, दोनों माध्यमों में उपलब्ध रहेगा। इससे विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या और मिड-डे-मील के तहत भोजन पाने वाले बच्चों की संख्या का मिलान करना आसान होगा। तीनों माध्यमों में दर्ज आंकड़ों को आपस में मिलाकर देखा जाएगा। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जितने विद्यार्थी वास्तव में स्कूल में उपस्थित हैं, रिकॉर्ड में भी उतनी ही संख्या दर्ज हो।
आंकड़ों में अंतर मिला तो तय होगी जिम्मेदारी
शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि हाजिरी रजिस्टर, पीएम पोषण एप और एमआईएस पोर्टल में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या एक जैसी होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर आंकड़ों में अंतर पाया जाता है, तो इसे सामान्य गलती मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित स्कूल की कार्यप्रणाली की जांच की जा सकती है। स्कूल मुखिया की जिम्मेदारी होगी कि कक्षा अध्यापक द्वारा उपलब्ध कराई गई उपस्थिति, रजिस्टर में दर्ज संख्या और दोनों डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद आंकड़ों में किसी तरह का अंतर न हो।
स्कूल मुखिया की बढ़ेगी जवाबदेही
नई प्रक्रिया में स्कूल मुखिया की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है। रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज होने के बाद उनके हस्ताक्षर से रिकॉर्ड को प्रमाणित किया जाएगा। इसका मतलब है कि स्कूल स्तर पर तैयार होने वाले हाजिरी रिकॉर्ड की निगरानी और सत्यापन की जिम्मेदारी भी तय होगी। इस व्यवस्था से शिक्षकों और मिड-डे-मील से जुड़े कर्मचारियों को भी सही आंकड़े दर्ज करने के लिए अधिक सतर्क रहना होगा।
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फर्जीवाड़े पर शिकंजा कसने की कोशिश
शिक्षा विभाग का यह कदम पीएम पोषण योजना के तहत होने वाली निगरानी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तीन अलग-अलग रिकॉर्ड में एक ही उपस्थिति दर्ज होने से गलत संख्या दिखाने या फर्जी हाजिरी के मामलों की पहचान करना आसान हो सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म को केवल आंकड़े दर्ज करने के बजाय निगरानी और जवाबदेही के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे मिड-डे-मील योजना में पारदर्शिता बढ़ाने और सरकारी संसाधनों के सही उपयोग को सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।










