RSS Office Attack: झारखंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) कार्यालय पर हुए हालिया हमले की उच्च स्तरीय जांच में सुरक्षा एजेंसियों के हाथ एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाली कामयाबी लगी है। गिरफ्तार किए गए संदिग्धों से सघन पूछताछ के दौरान पड़ोसी देश पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के खतरनाक मंसूबों, ‘ऑपरेशन यूपी’ (Operation UP) और ‘ऑपरेशन पंजाब’ का सनसनीखेज भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस हिरासत में लिए गए मुख्य आरोपी अमन अंसारी ने उगला है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दुबई शहर से स्वदेश लौटने के ठीक बाद उसे खुफिया हैंडलर्स द्वारा पंजाब भेजा गया था, जहां उसे संगठन के किसी अज्ञात ‘बॉस’ से गुप्त मुलाकात करनी थी। पंजाब में कुछ दिन बिताने के बाद वह वापस रांची लौट आया, जहां से उसे और उसके साथी सैफ को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ कूच करने का नया फरमान मिला।
लखनऊ स्लीपर सेल से होने वाली थी सीक्रेट मीटिंग
सुरक्षा बलों और आतंकवाद निरोधक दस्तों की शुरुआती तफ्तीश के मुताबिक, दोनों संदिग्ध आतंकी ट्रेन मार्ग से कानपुर होते हुए लखनऊ पहुंचने की फिराक में थे। हालांकि, झारखंड की मुस्तैद रांची पुलिस ने खुफिया इनपुट के आधार पर जाल बिछाकर दोनों को कोडरमा रेलवे स्टेशन पर ही दबोच लिया। राष्ट्रीय जांच एजेंसियों का पुख्ता अनुमान है कि यदि ये दोनों संदिग्ध किसी तरह लखनऊ पहुंचने में कामयाब हो जाते, तो वहां पहले से सक्रिय आईएसआई (ISI) नेटवर्क के किसी अंडरग्राउंड स्लीपर सेल सदस्य के साथ इनकी एक सीक्रेट मीटिंग तय थी। इस अति-महत्वपूर्ण बैठक का मकसद भारत विरोधी किसी बड़ी हिंसक वारदात को अंजाम देना था। जांचकर्ता अब इस गंभीर एंगल से भी कड़ियों को जोड़ रहे हैं कि कहीं लखनऊ में स्लीपर सेल से मिलने के बाद इन आतंकियों का अगला टारगेट धार्मिक नगरी अयोध्या तो नहीं था।
क्यूआर कोड स्कैनर से भेजा गया था एडवांस टोकन अमाउंट
सुरक्षा और जांच एजेंसियों से जुड़े विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और उसके आसपास के जिलों में सक्रिय इस संभावित आतंकी मॉड्यूल और संदिग्ध स्लीपर सेल को ध्वस्त करने के लिए कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है। इस टेरर नेटवर्क को फाइनेंस करने और बैकएंड सपोर्ट देने वाले चेहरों की सरगर्मी से तलाश जारी है। पूछताछ में यह आर्थिक पहलू भी उजागर हुआ है कि झारखंड स्थित आरएसएस (RSS) भवन को निशाना बनाने और वहां हमला करने के लिए सीमा पार के आकाओं के साथ कुल डेढ़ लाख रुपये की खूनी डील तय की गई थी।
इस कॉन्ट्रैक्ट मनी को तीनों आरोपियों में बराबर बांटा जाना था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि शुरुआती खर्चे के लिए 10 हजार रुपये की अग्रिम राशि डिजिटल माध्यम से एक क्यूआर (QR) कोड स्कैनर का उपयोग करके ट्रांसफर की गई थी। एजेंसियां अब उस बैंक खाते और डिजिटल वॉलेट को फ्रीज कर पैसे के मुख्य स्रोत का पता लगा रही हैं।
पाकिस्तानी हैंडलर ‘राणा साहब’ के दो वॉयस ऑडियो क्लिप बरामद
इस अंतरराष्ट्रीय टेरर मॉड्यूल की रीढ़ तोड़ने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने मुख्य संदिग्ध अमन अंसारी और उसके पाकिस्तानी आका, जिसे ‘राणा साहब’ के कोडनेम से पुकारा जा रहा है, के बीच हुई बातचीत के दो बेहद महत्वपूर्ण वॉयस ऑडियो क्लिप्स बरामद किए हैं। इन लीक हुए ऑडियो सबूतों में पाकिस्तानी हैंडलर द्वारा इन गुर्गों को भारत में किसी बहुत बड़ी तबाही या ‘बड़ा टास्क’ सौंपे जाने का स्पष्ट वॉयस रिकॉर्ड मौजूद है। देश की केंद्रीय जांच एजेंसियां इन दोनों वॉयस सैंपल्स की अत्याधुनिक फोरेंसिक लैब में गहन वैज्ञानिक जांच करवा रही हैं, ताकि इस देश विरोधी पाकिस्तानी साजिश और देश के भीतर फैले उनके पूरे टेरर नेटवर्क का मुकम्मल पर्दाफाश कर इसे जड़ से उखाड़ा जा सके।










