Uttarakhand Voter List: यूपी-उत्तराखंड की वोटर लिस्ट में नाम तो नहीं? 5 जिलों में आयोग की बड़ी जांच शुरू

उत्तराखंड में एसआईआर के दौरान मतदाता सूचियों के सत्यापन की प्रक्रिया तेज हो गई है। पांच जिलों में यूपी और उत्तराखंड की वोटर लिस्ट में समान प्रविष्टियों की जांच की जा रही है। बीएलओ के जरिए मतदाताओं का सत्यापन होगा और दो जगह नाम मिलने पर एक जगह की प्रविष्टि हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

यूपी-उत्तराखंड की वोटर लिस्ट में नाम तो नहीं?

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

सितम्बर 24, 2026

Uttarakhand Voter List: उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के अंतिम चरण में निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी क्रम में राज्य के पांच जिलों में डेमोग्राफिक सिमिलर एंट्री (DSE) और फोटोग्राफिक सिमिलर एंट्री (PSE) के आधार पर मतदाताओं का मिलान शुरू किया गया है।

यह अभियान मुख्य रूप से यह पता लगाने के लिए चलाया जा रहा है कि कहीं किसी मतदाता का नाम उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश, दोनों राज्यों की मतदाता सूचियों में तो दर्ज नहीं है। चुनाव आयोग की मतदाता सेवाओं में मतदाता सूची की जांच, नाम में सुधार और नाम हटाने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

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इन पांच जिलों में शुरू हुई प्रक्रिया

पहली बार उत्तराखंड में इस तरह का सत्यापन पांच जिलों में किया जा रहा है। इनमें देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर शामिल हैं। इनमें से कई जिले उत्तर प्रदेश की सीमा से जुड़े हुए हैं। रोजगार, कारोबार या अन्य कारणों से बड़ी संख्या में लोग दोनों राज्यों के बीच आते-जाते रहते हैं। एसआईआर के दौरान ऐसे मामलों की जानकारी सामने आने के बाद आयोग ने दोनों राज्यों की मतदाता सूचियों में समान प्रविष्टियों की जांच शुरू की है।

बीएलओ घर जाकर करेंगे मतदाताओं का सत्यापन

बीएलओ घर जाकर करेंगे मतदाताओं का सत्यापन
बीएलओ घर जाकर करेंगे मतदाताओं का सत्यापन

इस पूरी प्रक्रिया को बीएलओ एप के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा। संबंधित बूथ के बीएलओ एप पर उन मतदाताओं की जानकारी दिखाई देगी, जिनकी प्रविष्टियां उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में भी मिलती हैं।

इसके बाद बीएलओ संबंधित मतदाता के घर पहुंचकर उससे जानकारी का सत्यापन करेंगे। मतदाता को बताया जाएगा कि उसका नाम दो जगह दर्ज है और उसे किसी एक स्थान की मतदाता सूची में ही अपना नाम रखना होगा।

यदि मतदाता उत्तराखंड की सूची में अपना नाम बनाए रखना चाहता है, तो बीएलओ आवश्यक सत्यापन प्रक्रिया पूरी करेगा। वहीं अगर वह उत्तराखंड की मतदाता सूची में नाम नहीं रखना चाहता, तो नाम हटाने के लिए निर्धारित फॉर्म-7 की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

यूपी की वोटर लिस्ट से भी हटेगा नाम

अगर कोई मतदाता उत्तराखंड की मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखता है, तो उसकी यूपी वाली प्रविष्टि हटाने के लिए संबंधित प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके तहत उत्तराखंड के निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारी यानी ईआरओ की ओर से उत्तर प्रदेश के संबंधित ईआरओ को पत्र भेजा जाएगा।इसके बाद जांच और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने पर संबंधित व्यक्ति का नाम यूपी की मतदाता सूची से हटाया जाएगा। इस तरह एक मतदाता का नाम केवल एक ही स्थान की मतदाता सूची में रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

एक से ज्यादा जगह नाम रखना कानूनन मान्य नहीं

कानून के मुताबिक एक व्यक्ति का नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में नहीं होना चाहिए। निर्वाचन आयोग की मतदाता सेवाओं में नाम हटाने और मतदाता सूची से जुड़ी अन्य प्रक्रियाओं के लिए निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध हैं।

जानबूझकर एक से अधिक जगह मतदाता के रूप में पंजीकरण बनाए रखना कानून के तहत दंडनीय हो सकता है। ऐसे मामलों में जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान बताया गया है। इसलिए उत्तराखंड और यूपी की सीमा से जुड़े जिलों में शुरू किया गया यह सत्यापन अभियान मतदाता सूचियों को अधिक सटीक बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

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