Iran vs USA: ईरानी विदेश मंत्री का अमेरिका पर बड़ा तंज, कहा- जंग के बाद अब रूसी तेल के लिए मांग रहे ‘भीख’

ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के मात्र दो हफ्ते के भीतर ही अमेरिका को घुटनों पर आने को मजबूर होना पड़ा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने दावा किया है कि तेल संकट से घबराकर ट्रंप प्रशासन अब भारत और दुनिया से रूसी तेल खरीदने की 'भीख' मांग रहा है।

Iran vs USA

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 14, 2026

Iran vs USA: ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अरगची ने संयुक्त राज्य अमेरिका की विदेश नीति पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे “दोहरा मापदंड” करार दिया है। अरगची का दावा है कि जो अमेरिका कुछ महीने पहले तक भारत जैसे देशों पर रूस से कच्चा तेल न खरीदने के लिए भारी दबाव बना रहा था और प्रतिबंधों की धमकियां दे रहा था, वही अमेरिका आज ईरान के साथ जारी दो हफ्तों के संघर्ष के बाद अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर हो गया है। ईरानी विदेश मंत्री के अनुसार, व्हाइट हाउस अब भारत सहित दुनिया भर के देशों से यह गुहार लगा रहा है कि वे रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखें ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनी रहे और तेल की कीमतें आसमान न छुएं।

यूरोपीय देशों की ‘दयनीय’ स्थिति पर अरगची का कटाक्ष

अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए अरगची ने न केवल अमेरिका बल्कि यूरोपीय देशों की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यूरोप ने ईरान के खिलाफ अमेरिका के ‘अवैध युद्ध’ का समर्थन सिर्फ इसलिए किया क्योंकि उन्हें लगा था कि इसके बदले वाशिंगटन रूस के खिलाफ जारी संघर्ष में उनकी मदद करेगा। अरगची ने इस स्थिति को ‘दयनीय’ बताते हुए लिखा कि यूरोप अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है, क्योंकि अमेरिका अपनी ऊर्जा जरूरतों और रणनीतिक विफलता के कारण अब रूस के सामने झुकने को तैयार है। ईरान का मानना है कि पश्चिमी गठबंधन की यह नीति मध्य पूर्व में उनकी हार और बढ़ती हताशा का प्रतीक है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य: भारत के लिए सुरक्षित मार्ग की गारंटी

मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध और तनाव के बावजूद, ईरान ने भारत के प्रति अपनी मित्रता और कूटनीतिक उदारता का परिचय दिया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह भारत के ऊर्जा सुरक्षा हितों को प्रभावित नहीं होने देगा। इसी कड़ी में, ईरान ने भारत के झंडे वाले दो महत्वपूर्ण लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) कैरियर्स को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवनरेखा माना जाता है, और युद्ध के बीच भारत के जहाजों को रास्ता देना दोनों देशों के प्रगाढ़ संबंधों को दर्शाता है।

सऊदी अरब से भारत आने वाले तेल टैंकरों को भी सुरक्षा

ईरान ने न केवल भारतीय जहाजों बल्कि अन्य देशों से भारत की ओर आने वाले क्रूड ऑयल टैंकरों को भी सुरक्षा का भरोसा दिया है। ताजा जानकारी के अनुसार, सऊदी अरब से कच्चे तेल से भरा एक विशाल टैंकर सुरक्षित रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर भारत की ओर बढ़ रहा है। ईरान के इस कदम से भारत को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि युद्ध की स्थिति में इस मार्ग के बंद होने का सीधा असर भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर पड़ सकता था।

भारत-ईरान दोस्ती: “साझा भाग्य और साझा दर्द”

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने इस कूटनीतिक सहयोग पर भावुक और रणनीतिक बयान दिया है। उन्होंने भारत को ईरान का एक ‘अविभाज्य मित्र’ बताते हुए कहा कि दोनों देशों का भाग्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। राजदूत फताली के अनुसार, “भारत के लोगों का दर्द हमारा दर्द है और हमारा दर्द भारत के लोगों का है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान भारत जाने वाले सभी व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा क्योंकि भारत ने कठिन समय में ईरान का साथ दिया है। साझा हितों और ऐतिहासिक संबंधों की दुहाई देते हुए उन्होंने आपसी सहयोग को और अधिक मजबूती प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई।