Iran Protest 2026 : ईरान में पिछले दो सप्ताह से चल रहा असंतोष अब एक व्यापक राष्ट्रव्यापी विद्रोह में बदल गया है। गुरुवार को यह प्रदर्शन उस समय बेहद उग्र हो गए जब निर्वासित ईरानी क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने जनता से सड़कों पर उतरने की अपील की। इस आह्वान के बाद राजधानी तेहरान सहित देश के कई प्रमुख शहरों में हजारों की संख्या में लोग सरकारी दमन के खिलाफ सड़कों पर आ गए। यह पिछले चौदह दिनों में आयोजित रैलियों में अब तक का सबसे विशाल जनसमूह था। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सीधे तौर पर सर्वोच्च नेता खामेनेई के खिलाफ था, जहां लोग सत्ता परिवर्तन और “खामेनेई मुर्दाबाद” के नारे लगा रहे थे। कई स्थानों पर सड़कों पर आगजनी और सुरक्षा बलों के साथ हिंसक झड़पें भी दर्ज की गई हैं।
डिजिटल ब्लैकआउट और NOTAM जारी: क्या ईरान युद्ध की तैयारी में है?
बढ़ते विरोध को कुचलने के लिए ईरानी प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। गुरुवार की आधी रात के बाद सुरक्षा बलों को बड़े पैमाने पर तैनात किया गया और पूरे देश में इंटरनेट कनेक्टिविटी काट दी गई। वैश्विक इंटरनेट मॉनिटरिंग ग्रुप ‘नेटब्लॉक्स’ ने पुष्टि की है कि ईरान वर्तमान में देशव्यापी ‘इंटरनेट ब्लैकआउट’ का सामना कर रहा है, जिससे प्रदर्शनकारियों के लिए आपस में संपर्क करना असंभव हो गया है। इसके अलावा, ईरान ने कई हवाई क्षेत्रों में ‘नोटिस टू एयरमेन’ (NOTAM) जारी कर अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया है। एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं, जो संकेत देती हैं कि ईरानी शासन न केवल आंतरिक विद्रोह बल्कि बाहरी सैन्य हस्तक्षेप की भी आशंका जता रहा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सीधी चेतावनी
ईरान की इस नाजुक स्थिति पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने इस्लामी शासन को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने अपने ही नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग किया या उनकी हत्या की, तो अमेरिका मूकदर्शक नहीं बना रहेगा। एक रेडियो साक्षात्कार में ट्रंप ने स्पष्ट कहा, “मैंने ईरान को बता दिया है कि अगर उन्होंने लोगों को मारना शुरू किया, तो हम उन पर बहुत जोरदार सैन्य हमला करेंगे।” ट्रंप की इस धमकी ने वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ईरानी शासन को सैन्य कार्रवाई का अल्टीमेटम है।
मानवाधिकारों का हनन: अब तक 45 लोगों की मौत, मासूम भी शामिल
ईरान से आ रही खबरें विचलित करने वाली हैं। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ईरानी सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चला रहे हैं। नॉर्वे स्थित एनजीओ ‘ईरान ह्यूमन राइट्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार का प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 45 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि मारे गए लोगों में 8 नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं। रिपोर्ट बताती है कि बुधवार का दिन इस संघर्ष का सबसे ‘खूनी दिन’ था, जिसमें अकेले एक दिन में 13 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई।
भविष्य की अनिश्चितता: क्या पतन की ओर है वर्तमान ईरानी शासन?
इंटरनेट बंद होने और टेलीफोन लाइनें कट जाने के कारण ईरान से सूचनाएं बाहर आना मुश्किल हो गया है, लेकिन जो वीडियो और रिपोर्ट्स लीक हो रही हैं, वे एक बड़े राजनीतिक बदलाव का इशारा करती हैं। एक तरफ जहां जनता का आक्रोश चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका की सैन्य धमकी ने ईरानी सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया है। एयरस्पेस का बंद होना और मिसाइल डिफेंस सिस्टम का सक्रिय होना इस बात का प्रमाण है कि ईरान के भीतर स्थिति अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव ईरानी शासन को झुकने पर मजबूर करेगा या यह संघर्ष एक बड़े युद्ध का रूप ले लेगा।










