India-UK CETA: भारत और ब्रिटेन (UK) के आर्थिक संबंधों में आज एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। दोनों देशों के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) आज से आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। इसे पिछले कुछ वर्षों में भारत द्वारा हस्ताक्षरित सबसे बड़े और महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) में से एक माना जा रहा है। केंद्र सरकार के मुताबिक, इस ऐतिहासिक कदम से देश के किसानों, श्रमिकों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs), निर्यातकों और सेवा क्षेत्र को अभूतपूर्व लाभ मिलेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में लागू होने वाला यह छठा मुक्त व्यापार समझौता है। इससे पहले भारत मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) और ओमान के साथ सफलतापूर्वक ऐसे समझौते लागू कर चुका है।
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महज टैक्स कटौती नहीं, रोजगार और निवेश का नया ढांचा
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, भारत-यूके सीईटीए केवल सीमा शुल्क या टैरिफ घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापार, निवेश, सेवाओं और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ाने वाला एक व्यापक विनियामक ढांचा है। यह भारतीय व्यापारिक इतिहास का एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं काफी कम हो जाएंगी, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता (Competitiveness) बढ़ेगी। साथ ही, यह समझौता महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स, किसानों और युवा पेशेवरों के लिए प्रगति के नए द्वार खोलेगा।
99 फीसदी भारतीय सामानों को ब्रिटिश बाजार में मुफ्त एंट्री
इस ऐतिहासिक करार के तहत भारत से ब्रिटेन निर्यात होने वाले लगभग 99 प्रतिशत उत्पादों को ब्रिटिश बाजार में शून्य शुल्क (Duty-Free Entry) के साथ पहुंच मिलेगी। इसके बदले में, ब्रिटेन से भारत आने वाले कई प्रमुख उत्पादों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती की जाएगी, जिससे घरेलू बाजारों में उनकी कीमतें काफी घट जाएंगी।
इसके अतिरिक्त, पहली बार ब्रिटिश कंपनियों को भारत सरकार की लगभग 40 हजार उच्च-मूल्य वाली सरकारी निविदाओं (High-value tenders) में सीधे भाग लेने की अनुमति दी गई है। इससे परिवहन, बुनियादी ढांचा (Infrastructure) और हरित ऊर्जा (Green Energy) जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कार्य की गुणवत्ता और विदेशी निवेश में भारी सुधार देखने को मिलेगा। कुल 30 अध्यायों वाले इस व्यापक समझौते में डिजिटल व्यापार, बौद्धिक संपदा (IP), श्रम, पर्यावरण और एमएसएमई से जुड़े नियमों को बेहद सरल बनाया गया है।
स्कॉच व्हिस्की और ब्रिटिश कारों के दाम धड़ाम
इस समझौते का सबसे बड़ा और सीधा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर और प्रीमियम लिक्वर (शराब) बाजार पर देखने को मिलेगा:
प्रीमियम कारें और ट्रक: यह देश के इतिहास में पहला मौका है जब भारत ने पूरी तरह से निर्मित (CBU) ब्रिटिश कारों और ट्रकों पर इतनी बड़ी सीमा शुल्क रियायत दी है। पूरी तरह से बनी ब्रिटिश कारों पर आयात शुल्क को 110 फीसदी से चरणबद्ध तरीके से घटाकर मात्र 10 फीसदी पर लाया जाएगा। पेट्रोल और डीजल कारों को यह रियायत शुरुआत से मिलेगी। वहीं, भारतीय ईवी बाजार को सुरक्षा देने के लिए इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों को छठे वर्ष से यह छूट दी जाएगी। ट्रकों पर भी शुल्क 44% से घटकर पांचवें वर्ष तक 8.8% रह जाएगा।
स्कॉच व्हिस्की: प्रीमियम शराब और स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाला मौजूदा 150 फीसदी का भारी-भरकम आयात शुल्क पहले चरण में घटकर 75 फीसदी हो जाएगा, और अगले 10 वर्षों में इसे क्रमिक रूप से घटाकर महज 40 फीसदी कर दिया जाएगा। इससे विदेशी स्कॉच के शौकीनों को बड़ी राहत मिलेगी।
आईटी सेक्टर को बड़ी राहत और संवेदनशील उत्पाद दायरे से बाहर
आईटी कंपनियों के लिए एक राहत भरी खबर यह है कि समझौते के साथ लागू हुए ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ के कारण अब भारत से ब्रिटेन जाने वाले कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं (Employers) को शुरुआती 5 वर्षों तक ब्रिटेन में सोशल सिक्योरिटी (सामाजिक सुरक्षा) योगदान नहीं देना होगा।
सुरक्षात्मक कदम: दोनों देशों ने अपने घरेलू हितों की रक्षा के लिए कुछ संवेदनशील उत्पादों को इस समझौते से पूरी तरह बाहर रखा है। भारत ने सेब, अखरोट, व्हे, कुछ विशेष बीजों, सोने की ईंटों (Gold Bullion) और स्मार्टफोन पर किसी भी प्रकार की शुल्क छूट नहीं दी है। ठीक इसी तरह, ब्रिटेन ने भी अपने बाजार की सुरक्षा के लिए भारत से जाने वाले चावल, चीनी और कुछ श्रेणियों के मांस उत्पादों को इस छूट के दायरे से बाहर रखा है।










