India-Saudi Relations: वरिष्ठ राजनयिक विपुल बने सऊदी अरब में भारत के नए राजदूत, विदेश मंत्रालय ने किया बड़ा कूटनीतिक बदलाव

मिडिल ईस्ट में भारत की बड़ी कूटनीति: विदेश मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लेते हुए वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी विपुल को सऊदी अरब में भारत का नया राजदूत नियुक्त किया है। वैश्विक भू-राजनीति में मचे घमासान के बीच दिल्ली और रियाद के रिश्तों को नए मुकाम पर ले जाने के लिए आखिर क्यों की गई यह हाई-प्रोफाइल नियुक्ति? जानने के लिए पढ़ें।

India-Saudi Relations:

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 3, 2026

India-Saudi Relations:  भारत सरकार ने खाड़ी क्षेत्र के अपने सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक साझेदार सऊदी अरब के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। बिहार के मूल निवासी और बेहद अनुभवी राजनयिक विपुल को सऊदी अरब साम्राज्य (Kingdom of Saudi Arabia) में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, वह वर्तमान में रियाद में भारत के राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे डॉ. सुहैल एजाज खान का स्थान लेंगे। मध्य प्रदेश के रहने वाले डॉ. सुहैल खान वर्ष 2023 से सऊदी अरब में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और अपना निर्धारित कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद वे जल्द ही स्वदेश वापस लौटेंगे।

जानिए कौन हैं वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी विपुल और कैसा रहा उनका सफर

सऊदी अरब जैसे रसूखदार देश में भारत के प्रतिनिधित्व की कमान संभालने जा रहे विपुल 1998 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) के बेहद सम्मानित अधिकारी हैं। उनके पास अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक मामलों का एक लंबा और शानदार अनुभव है। इस नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को संभालने से ठीक पहले, वे 17 अगस्त 2023 से कतर में भारत के राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। अपने लंबे राजनयिक करियर के दौरान उन्होंने दुनिया के कई प्रमुख शहरों जैसे काहिरा, कोलंबो, जिनेवा और दुबई में स्थित भारतीय दूतावासों तथा उच्चायोगों में विभिन्न शीर्ष और संवेदनशील पदों पर रहते हुए देश के हितों की पैरवी की है।

आईआईटी दिल्ली और आईएसबी हैदराबाद से शिक्षा, ऐसा है प्रभावशाली करियर ग्राफ

राजनयिक विपुल का शैक्षणिक और पेशेवर रिकॉर्ड न केवल अनुकरणीय बल्कि देश के युवाओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायी भी रहा है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), दिल्ली से साल 1994 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक (B.Tech) की डिग्री हासिल की थी। तकनीकी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट और प्रशासनिक प्रबंधन की बारीकियों को समझने के लिए हैदराबाद के मशहूर इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) से एमबीए (MBA) की उच्च उपाधि प्राप्त की। कूटनीतिक गलियारों में उनकी पहचान एक शांत, गंभीर और रणनीतिक फैसले लेने वाले अधिकारी के रूप में होती है।

विदेश मंत्रालय के खाड़ी डेस्क पर लंबा अनुभव, निभाई हैं कई अहम जिम्मेदारियां

अपने सेवाकाल के दौरान विपुल ने नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय (MEA) के मुख्यालय में कई अत्यंत महत्वपूर्ण पदों का कार्यभार संभाला है। साल 2014 से 2017 के बीच उन्होंने विदेश मंत्रालय में निदेशक और संयुक्त सचिव के रूप में कार्य किया। इसके बाद, साल 2017 से 2020 तक वे दुबई में भारत के महावाणिज्यदूत (Consul General of India) रहे, जहां उन्होंने प्रवासी भारतीयों की समस्याओं को सुलझाने में बड़ी भूमिका निभाई। इसके बाद साल 2020 से 2023 तक उन्होंने विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (खाड़ी क्षेत्र) का बेहद संवेदनशील जिम्मा संभाला। कूटनीति के अलावा उनका अनुभव अंतरराष्ट्रीय राजनीति, व्यापारिक संधियों, वैश्विक विकास, निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दों पर बेहद मजबूत माना जाता है।

ऐतिहासिक मोड़ पर भारत-सऊदी संबंध, नए राजदूत के सामने होंगी ये बड़ी चुनौतियां

विपुल की यह रणनीतिक नियुक्ति एक ऐसे समय में हुई है जब भारत और सऊदी अरब के आपसी संबंध इतिहास के सबसे मजबूत और रणनीतिक मोड़ पर खड़े हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, आतंकवाद-रोधी अभियानों और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी का दायरा काफी व्यापक हुआ है। सऊदी अरब भारत का एक विश्वसनीय ऊर्जा साझेदार है, जो देश की कच्चे तेल और गैस की जरूरतों को पूरा करने में रीढ़ की हड्डी की तरह है। साल 2010 में घोषित रियाद घोषणापत्र और बाद में गठित ‘स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप काउंसिल’ ने इन संबंधों को एक नया संस्थागत आधार दिया है। अब नए राजदूत विपुल के कंधों पर इन बहुआयामी और रणनीतिक संबंधों को व्यापार और निवेश के मोर्चे पर और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने की एक बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

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