India Bangladesh Relations: बॉर्डर तनाव के बीच भारत-बांग्लादेश की बड़ी पहल, सुरक्षा पर बनी सहमति

अवैध प्रवासियों और घुसपैठ को लेकर चल रहे कूटनीतिक तनाव के बीच भारत और बांग्लादेश ने सीमा सुरक्षा को लेकर एक बड़ा फैसला किया है।

India Bangladesh Relations

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 12, 2026

India Bangladesh Relations: भारत और बांग्लादेश के बीच बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों और अवैध घुसपैठ को लेकर चल रहे कूटनीतिक तनाव के बीच एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। दोनों देशों ने अपनी साझा सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, बेहतर इंटेलिजेंस शेयरिंग (खुफिया जानकारी साझा करने) और तालमेल के साथ संयुक्त गश्त (Coordinated Patrols) बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक के बाद शुक्रवार (12 जून 2026) को जारी एक संयुक्त बयान में इस रणनीतिक फैसले की जानकारी दी गई है।

यह सहमति ऐसे समय में बनी है जब बांग्लादेश ने भारतीय अधिकारियों पर बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के प्रवासियों को सीमा पार धकेलने का आरोप लगाया है। साल 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से दोनों पड़ोसियों के बीच संबंधों को पटरी पर लाने और अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की भारत की कोशिशों में लगातार कूटनीतिक पेच फंस रहे हैं।

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बीएसएफ और बीजीबी के बीच 4 दिवसीय मैराथन बैठक

नई दिल्ली में भारत के सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के शीर्ष अधिकारियों के बीच चार दिनों तक चली मैराथन बैठक के बाद यह अहम फैसला लिया गया। दोनों पक्षों ने इस द्विपक्षीय वार्ता को बेहद सौहार्दपूर्ण, सकारात्मक और भविष्योन्मुखी बताया।

संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों सुरक्षा बल भारत-बांग्लादेश सीमा पर ‘अवैध, अनजाने में और जबरन होने वाली क्रॉसिंग’ को पूरी तरह से रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए दोनों देश रीयल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करेंगे ताकि किसी भी अप्रिय घटना या घुसपैठ को मौके पर ही नाकाम किया जा सके। उल्लेखनीय है कि भारत और बांग्लादेश के बीच 4,000 किलोमीटर (2,500 मील) से ज्यादा लंबी सीमा है, जो दुनिया की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में से एक है। पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और मेघालय जैसे सीमावर्ती राज्यों के लिए घुसपैठ की समस्या बेहद संवेदनशील रही है।

नागरिकता की पुष्टि और प्रवासियों की वापसी पर कूटनीतिक तकरार

भारत में केंद्र सरकार ने बिना दस्तावेज वाले अवैध प्रवासियों की समस्या से निपटने को अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में रखा है। पिछले कुछ समय से बंगाली बोलने वाले संदिग्ध प्रवासियों को वापस भेजने की प्रक्रिया पर बांग्लादेश ने आपत्ति जताई है। बांग्लादेशी प्रशासन का दावा है कि उन्होंने इस जबरन वापसी की प्रक्रिया को रोकने के लिए नई दिल्ली को एक दर्जन से अधिक आधिकारिक पत्र भेजे हैं।

इस बीच, भारत ने मई 2026 में ढाका प्रशासन को 2,860 से अधिक ऐसे संदिग्ध लोगों की सूची सौंपकर उनकी नागरिकता की पुष्टि (Verification) करने को कहा था, जिनके पास कोई आधिकारिक भारतीय दस्तावेज नहीं हैं। दूसरी तरफ, बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबेद इस्लाम ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि बिना सही कानूनी प्रक्रिया के लोगों को जबरन सीमा पार भेजना स्वीकार्य नहीं है और इससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंच सकता है।

मानव तस्करी और सीमा पर मौतों को रोकने का संकल्प

इस चार दिवसीय उच्च स्तरीय बैठक में केवल घुसपैठ ही नहीं, बल्कि सीमा प्रबंधन से जुड़े कई अन्य गंभीर मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। संयुक्त बयान के मुताबिक, दोनों देशों ने निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर कड़ा रुख अपनाने का फैसला किया है, सीमा पार सक्रिय मानव तस्करी (Human Trafficking) के नेटवर्क को ध्वस्त करने और नशीले पदार्थों व हथियारों की तस्करी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। सीमा पर होने वाली हिंसक झड़पों और मौतों को रोकने के लिए गैर-घातक हथियारों (Non-Lethal Weapons) की नीति को कड़ाई से लागू किया जाएगा।

सीमावर्ती बुनियादी ढांचे के विकास और दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बलों के बीच जमीनी स्तर पर तालमेल बढ़ाने के लिए इस विशेष कार्ययोजना को मजबूती से धरातल पर उतारा जाएगा।

दोनों पक्षों ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर शांति, स्थिरता और अमन-चैन बनाए रखने के अपने साझा संकल्प को दोहराया है। सीमा सुरक्षा से जुड़े इन वरिष्ठ अधिकारियों की अगली रणनीतिक बैठक अब नवंबर 2026 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित की जाएगी।

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