Immigration Laws: हरियाणा में बदला कानून, धोखाधड़ी करने वाले ट्रैवल एजेंटों को अब सीधे 10 साल की जेल!

हरियाणा सरकार ने विदेश भेजने, वीज़ा दिलाने और ट्रैवल कंसल्टेंसी के नाम पर हो रही धोखाधड़ी को रोकने के लिए नया संशोधित ट्रैवल एजेंट कानून लागू कर दिया है।

Immigration Laws

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 6, 2026

Immigration Laws: हरियाणा सरकार ने विदेश भेजने, वीजा दिलाने और ट्रैवल कंसल्टेंसी के नाम पर हो रही धोखाधड़ी को रोकने के लिए संशोधित ट्रैवल एजेंट कानून लागू कर दिया है। पहले यह कानून सीमित गतिविधियों तक केंद्रित था, लेकिन अब इसमें लगभग हर तरह की वीजा सेवाएं, विदेश यात्रा से जुड़ी सलाह और प्रचार नेटवर्क को शामिल कर लिया गया है।

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नए प्रावधान और सख्त सजा

संशोधित कानून में सजा के प्रावधान भी कठोर कर दिए गए हैं। अब आरोपियों को दस साल तक की सजा और अर्जित संपत्ति जब्त करने का प्रावधान है। बिना पंजीकरण काम करना, फर्जी दस्तावेज लगाना, झूठे विज्ञापन देना या गलत सलाह देना सीधे बड़े दंड के दायरे में आएगा।

किन सेवाओं पर निगरानी

पहले स्टडी वीजा, टूरिस्ट वीजा, मेडिकल वीजा, धार्मिक यात्राएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल आयोजन या विवाह आधारित विदेश भेजने के मामलों में कई एजेंट कानूनी निगरानी से बाहर रहते थे। अब एजेंट, कंसल्टेंट और बिचौलिये कानून के तहत जवाबदेह होंगे। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब विदेश भेजने से जुड़े सेमिनार, विज्ञापन, वीजा सलाह, इंटरनेट प्रचार, डिजिटल मार्केटिंग और कंसल्टेंसी सेवाएं देने वालों पर भी कार्रवाई होगी।

दस्तावेज़ों की जांच

पुराने कानून में दस्तावेज़ जांच सीमित थी, जबकि नए संशोधन में शैक्षणिक प्रमाणपत्र, अंग्रेजी भाषा टेस्ट सर्टिफिकेट, पासपोर्ट, टिकट, वीजा और डिजिटल रिकॉर्ड तक को कानूनी रूप से शामिल किया गया है। इससे वीजा प्रोसेसिंग पर अधिक सख्त कार्रवाई संभव होगी।

लाइसेंस और पंजीकरण

पहले लाइसेंस रद्द करने के आधार सीमित थे, लेकिन अब कानून की किसी भी धारा के उल्लंघन पर एजेंट का पंजीकरण सीधे रद्द किया जा सकेगा। विदेश में नौकरी दिलाने या भर्ती से जुड़ी सेवाओं को ट्रैवल एजेंट की परिभाषा से बाहर रखा गया है। ऐसे एजेंटों का पंजीकरण प्रोटेक्टर जनरल ऑफ एमिग्रेंट्स (PGE) के पास होना अनिवार्य होगा।

केंद्रीय कानून को प्राथमिकता

यदि राज्य कानून और किसी केंद्रीय कानून में टकराव होता है तो केंद्रीय कानून को प्राथमिकता दी जाएगी।

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