Health Tips: नशा करते ही दिमाग में शुरू होता है यह बदलाव, जानिए शरीर पर इसका असर

नशा शरीर में पहुंचते ही सबसे पहले क्या करता है? इसका असर केवल दिमाग तक सीमित नहीं रहता। शुरुआत में मिलने वाला आराम धीरे-धीरे लत में बदल सकता है। टॉलरेंस, विदड्रॉल और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। जानिए नशा शरीर के अलग-अलग अंगों को कैसे प्रभावित करता है।

नशा करते ही दिमाग में शुरू होता है यह बदलाव

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अक्टूबर 28, 2026

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Health Tips: बदलती जीवनशैली, काम का दबाव, तनाव और मानसिक परेशानियों के बीच कुछ लोग राहत पाने के लिए नशीले पदार्थों का सेवन शुरू कर देते हैं। शुरुआत में शराब, सिगरेट या दूसरे नशीले पदार्थ कुछ समय के लिए आराम या खुशी का एहसास करा सकते हैं। लेकिन यह राहत अस्थायी होती है। बार-बार सेवन करने पर नशा शरीर और दिमाग की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है। समय के साथ इसका असर स्वास्थ्य, व्यवहार, कामकाज और पारिवारिक रिश्तों पर भी दिखाई देने लगता है।

शरीर में पहुंचकर नशा सबसे पहले क्या करता है?

नशे का शरीर में पहला असर इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सा पदार्थ लिया गया है और उसकी मात्रा कितनी है। सेवन के बाद पदार्थ शरीर में अवशोषित होकर रक्त के जरिए अलग-अलग अंगों तक पहुंच सकता है। कई नशीले पदार्थ मस्तिष्क पर असर डालते हैं और वहां मौजूद न्यूरोट्रांसमीटर या रिसेप्टर्स की गतिविधि को बदल देते हैं। इसी वजह से व्यक्ति को उत्साह, आराम, सुस्ती या अपनी मानसिक स्थिति में बदलाव महसूस हो सकता है। हालांकि, हर पदार्थ का असर एक जैसा नहीं होता।

दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम पर पड़ता है असर

मस्तिष्क में एक रिवॉर्ड सिस्टम होता है, जो खुशी, प्रेरणा और किसी गतिविधि को दोबारा करने की इच्छा से जुड़ा है। कुछ नशीले पदार्थ डोपामिन जैसे रासायनिक संदेशवाहकों की गतिविधि को प्रभावित करते हैं। इससे व्यक्ति को तेज आनंद या संतुष्टि महसूस हो सकती है। जब दिमाग इस अनुभव को किसी पदार्थ के सेवन से जोड़ने लगता है, तो उसे दोबारा लेने की इच्छा बढ़ सकती है। बार-बार ऐसा होने पर नशे की आदत विकसित होने और निर्भरता का जोखिम बढ़ जाता है।

बार-बार सेवन से बढ़ सकती है टॉलरेंस

लगातार नशा करने पर दिमाग और शरीर उस पदार्थ के प्रभाव के अनुसार खुद को ढालने लगते हैं। इस प्रक्रिया को टॉलरेंस कहा जाता है। इसका मतलब है कि समय के साथ पहले जैसा असर महसूस करने के लिए कुछ लोगों को अधिक मात्रा या ज्यादा बार सेवन करने की जरूरत महसूस हो सकती है। हालांकि, यह बदलाव हर व्यक्ति और हर पदार्थ में एक जैसा नहीं होता। मात्रा बढ़ाना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे विषाक्तता और ओवरडोज का जोखिम बढ़ जाता है।

नशा छोड़ने पर दिख सकते हैं विदड्रॉल लक्षण

नशा छोड़ने पर दिख सकते हैं विदड्रॉल लक्षण
नशा छोड़ने पर दिख सकते हैं विदड्रॉल लक्षण

कुछ नशीले पदार्थों का नियमित सेवन करने के बाद अचानक बंद करने पर शरीर में विदड्रॉल यानी छोड़ने से जुड़े लक्षण पैदा हो सकते हैं। इनमें बेचैनी, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, पसीना आना और कंपकंपी शामिल हो सकते हैं। लक्षण पदार्थ और निर्भरता की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग होते हैं। शराब या कुछ दवाओं पर निर्भर व्यक्ति के लिए अचानक सेवन बंद करना खतरनाक भी हो सकता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह लेकर सुरक्षित तरीके से उपचार करना जरूरी है।

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लिवर, फेफड़ों और दिल पर भी पड़ सकता है असर

नशे का नुकसान केवल मस्तिष्क तक सीमित नहीं रहता। अलग-अलग पदार्थ शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकते हैं। लंबे समय तक अधिक शराब पीने से लिवर में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। धूम्रपान और तंबाकू फेफड़ों, हृदय और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कुछ नशीले पदार्थ सांस लेने की प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं, जिससे ओवरडोज होने पर जान जाने का खतरा रहता है। इसके अलावा, नशा नींद, याददाश्त, एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।

व्यवहार और रिश्तों में भी दिख सकते हैं बदलाव

लगातार नशे की आदत का असर व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है। पढ़ाई या काम में मन न लगना, जिम्मेदारियों की अनदेखी करना, परिवार से दूरी बढ़ना और आर्थिक परेशानियां पैदा होना इसके संभावित परिणाम हैं। कुछ लोगों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में लक्षण और नुकसान अलग-अलग होते हैं। समय रहते बदलाव पहचानना और उचित सहायता लेना समस्या को गंभीर होने से रोकने में मदद कर सकता है।

नशे की लत को पहचानना क्यों जरूरी है?

अगर किसी व्यक्ति को बार-बार नशा करने की तीव्र इच्छा हो, वह सेवन कम करने में असफल रहे या नुकसान के बावजूद नशा जारी रखे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नशे के कारण परिवार, काम, पढ़ाई या स्वास्थ्य प्रभावित होना भी मदद लेने का संकेत है। नशे की निर्भरता केवल इच्छाशक्ति की कमी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या हो सकती है जिसके लिए उपचार की जरूरत पड़ती है।

सही समय पर मदद से संभव है नशे से बाहर निकलना

सही समय पर मदद से संभव है नशे से बाहर निकलना
सही समय पर मदद से संभव है नशे से बाहर निकलना

नशे से छुटकारा पाने के लिए डॉक्टर, मनोचिकित्सक या नशा मुक्ति विशेषज्ञ से सलाह ली जा सकती है। उपचार में काउंसलिंग, व्यवहार संबंधी थेरेपी और जरूरत के अनुसार दवाएं शामिल हो सकती हैं। परिवार और दोस्तों का सहयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। शराब या कुछ अन्य पदार्थों पर निर्भरता होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह अचानक सेवन बंद न करें, क्योंकि विदड्रॉल के लक्षण गंभीर हो सकते हैं। सही मार्गदर्शन और उपचार से नशे पर काबू पाना और स्वस्थ जीवन की ओर लौटना संभव है।