Uttarakhand News: उत्तराखंड में मई 2027 में होगा बड़ा आयोजन, सीमावर्ती पर्यटन को कैसे मिलेगा बढ़ावा?

उत्तराखंड में मई 2027 में हिमालय की सबसे चुनौतीपूर्ण दौड़ों में शामिल होने वाला आयोजन प्रस्तावित है। माना पास से शुरू होकर 100 मील की अल्ट्रा रन बद्रीनाथ और जोशीमठ से होते हुए औली पहुंचेगी। क्या यह प्रतियोगिता सीमावर्ती पर्यटन, स्थानीय रोजगार और उत्तराखंड की अंतरराष्ट्रीय पहचान को नई ऊंचाई दे पाएगी?

उत्तराखंड में मई 2027 में होगा बड़ा आयोजन

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अक्टूबर 28, 2026

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Uttarakhand News: उत्तराखंड में एडवेंचर टूरिज्म को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार एक बड़ी खेल प्रतियोगिता आयोजित करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की है कि 100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन का आयोजन मई 2027 के पहले सप्ताह में किया जाएगा। यह दौड़ माना पास से शुरू होकर बद्रीनाथ और जोशीमठ होते हुए औली में समाप्त होगी। इस आयोजन का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देना, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करना और टिकाऊ आजीविका को प्रोत्साहित करना है।

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माना पास से औली तक चुनौतीपूर्ण होगा रूट

प्रस्तावित अल्ट्रा रन का शुरुआती स्थल माना पास होगा, जो समुद्र तल से लगभग 5,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से प्रतिभागी बद्रीनाथ और जोशीमठ के रास्ते औली तक पहुंचेंगे। ऊंचाई, कठिन पहाड़ी रास्तों, कम ऑक्सीजन और प्रतिकूल मौसम के कारण यह प्रतियोगिता धावकों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। आयोजन से उत्तराखंड के हिमालयी भूभाग और प्राकृतिक सुंदरता को देश-विदेश के खिलाड़ियों के सामने प्रदर्शित करने की उम्मीद है।

आदि कैलाश परिक्रमा रन में शामिल हुए मुख्यमंत्री

आदि कैलाश परिक्रमा रन में शामिल हुए मुख्यमंत्री
आदि कैलाश परिक्रमा रन में शामिल हुए मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिथौरागढ़ जिले के सीमावर्ती क्षेत्र गुंजी में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने 42 किलोमीटर और 70 किलोमीटर की दौड़ के विजेताओं को सम्मानित किया तथा विभिन्न राज्यों से आए धावकों का उत्साह बढ़ाया। धामी ने कहा कि ऊंचे हिमालय में ऐसी प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए साहस, अनुशासन और मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत होती है।

सीमावर्ती पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

मुख्यमंत्री के मुताबिक, आदि कैलाश परिक्रमा रन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन क्षमता को सामने लाने का माध्यम भी है। वर्ष 2025 में आयोजित इसके पहले संस्करण में 700 से अधिक धावकों ने हिस्सा लिया था। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि आदि कैलाश क्षेत्र के लिए जारी इनर लाइन परमिट की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जो वहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं की बढ़ती रुचि का संकेत है।

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स्थानीय युवाओं और कारोबारियों को मिल सकते हैं अवसर

सरकार को उम्मीद है कि अल्ट्रा रन और अन्य एडवेंचर गतिविधियों से सीमावर्ती गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होमस्टे संचालकों, स्थानीय गाइडों, होटल व्यवसायियों, परिवहन सेवाओं और खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों को आमदनी के नए अवसर मिल सकते हैं। इससे स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के रास्ते खुलने और पलायन की समस्या से निपटने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से विकास को बढ़ावा

धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमावर्ती गांवों को देश के अंतिम गांवों के बजाय पहले गांवों के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, पर्यटन और आजीविका के अवसरों को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि पर्यटन से होने वाली आय का लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचे।

एडवेंचर टूरिज्म का दायरा बढ़ा रही सरकार

उत्तराखंड सरकार ट्रेकिंग, पर्वतारोहण, रिवर राफ्टिंग, कयाकिंग, पैराग्लाइडिंग, माउंटेन साइकिलिंग और एंगलिंग जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रही है। इस साल नीति वैली में भी अल्ट्रा रन आयोजित की गई। औली, मुनस्यारी, ऋषिकेश और टिहरी जैसे स्थानों पर एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ाने की योजनाएं हैं। माना जा रहा है कि नई प्रतियोगिता से उत्तराखंड को वैश्विक एडवेंचर टूरिज्म मानचित्र पर मजबूत पहचान मिल सकती है।

रंग समुदाय ने पारंपरिक तरीके से किया स्वागत

रंग समुदाय ने पारंपरिक तरीके से किया स्वागत
रंग समुदाय ने पारंपरिक तरीके से किया स्वागत

गुंजी पहुंचने पर रंग समुदाय के लोगों ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक परिधान में स्वागत किया। इस दौरान धामी ने आयोजन में सहयोग के लिए भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना की। कार्यक्रम में राज्य मंत्री अशोक सिंह नबियाल, पर्यटन सचिव धीरज सिंह गर्ब्याल, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी, सुरक्षा बलों के अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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