Uttarakhand News: गंगा स्वच्छता के लिए हरिद्वार में जुटेंगे नौ हजार साधक, जानिए कब शुरू होगा अभियान

अर्धकुंभ से पहले हरिद्वार में धार्मिक आस्था और स्वच्छता का बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। पांच हजार साधक दंडवत यात्रा निकालेंगे, जबकि नौ हजार साधकों के गंगा सफाई में शामिल होने की योजना है। 17 घंटे चलने वाली इस यात्रा की खास तैयारी और उद्देश्य जानिए।

गंगा स्वच्छता के लिए हरिद्वार में जुटेंगे नौ हजार साधक

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अक्टूबर 28, 2026

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Uttarakhand News: उत्तराखंड के हरिद्वार में अर्धकुंभ की तैयारियों के बीच गंगा की स्वच्छता, सनातन संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने के लिए विशेष अभियान आयोजित किया जाएगा। इस अभियान के तहत पांच हजार साधक दंडवत यात्रा निकालेंगे, जबकि 31 अक्टूबर को गंगा में महास्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। आयोजकों के मुताबिक, इस सफाई अभियान में करीब नौ हजार साधकों और स्वयंसेवकों के शामिल होने की योजना है। इसका उद्देश्य धार्मिक आयोजन के साथ स्वच्छता और सेवा के महत्व को भी जन-जन तक पहुंचाना है।

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30 अक्टूबर को कनखल से शुरू होगी दंडवत यात्रा

महामंडलेश्वर स्वामी शंकर करौली महाराज के नेतृत्व में दंडवत यात्रा 30 अक्टूबर को हरिद्वार के कनखल क्षेत्र से शुरू होगी। स्वामी शंकर करौली महाराज श्री अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक और मिश्री मठ के परमाध्यक्ष हैं। आयोजकों के अनुसार, यात्रा नया अखाड़ा उदासीन, कनखल से प्रारंभ की जाएगी। इसके जरिए श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा, स्वच्छता और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जागरूक करने का प्रयास होगा। यह आयोजन आगामी अर्धकुंभ को दिव्य और भव्य बनाने की तैयारियों से भी जुड़ा है।

यात्रा से पहले भगवान दक्षेश्वर महादेव का होगा रुद्राभिषेक

यात्रा से पहले भगवान दक्षेश्वर महादेव का होगा रुद्राभिषेक
यात्रा से पहले भगवान दक्षेश्वर महादेव का होगा रुद्राभिषेक

दंडवत यात्रा शुरू होने से पहले भगवान दक्षेश्वर महादेव का विधि-विधान के साथ रुद्राभिषेक किया जाएगा। धार्मिक अनुष्ठान के बाद साधक यात्रा में शामिल होकर अपने संकल्प और आस्था का प्रदर्शन करेंगे। आयोजकों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य आध्यात्मिक परंपराओं को मजबूत करने के साथ समाज में सेवा और समर्पण की भावना बढ़ाना है। यात्रा के दौरान धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों को प्रमुखता दी जाएगी। आयोजन से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक भी भागीदारी करेंगे।

करीब 17 घंटे तक चलेगी यात्रा, पांच किलोमीटर का मार्ग

मिश्री मठ के प्रबंधक डॉ. उमेश सचान के मुताबिक, दंडवत यात्रा 30 अक्टूबर की सुबह शुरू होकर 31 अक्टूबर की सुबह तक चलेगी। इसकी कुल अवधि करीब 17 घंटे बताई गई है और यात्रा का मार्ग लगभग पांच किलोमीटर लंबा होगा। इतनी लंबी अवधि तक चलने वाले आयोजन के लिए व्यवस्थाएं पहले से की जा रही हैं। करीब चार हजार स्वयंसेवक यात्रा के संचालन, श्रद्धालुओं की सहायता और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं में सहयोग करेंगे। आयोजकों के अनुसार, यात्रा को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए विभिन्न स्तरों पर तैयारी की जा रही है।

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31 अक्टूबर को गंगा में चलेगा महास्वच्छता अभियान

31 अक्टूबर को गंगा में चलेगा महास्वच्छता अभियान
31 अक्टूबर को गंगा में चलेगा महास्वच्छता अभियान

दंडवत यात्रा के बाद 31 अक्टूबर को गंगा सेवा अभियान के अंतर्गत विशेष महास्वच्छता अभियान आयोजित किया जाएगा। इसमें करीब नौ हजार साधकों और स्वयंसेवकों के भाग लेने की योजना है। अभियान के माध्यम से गंगा को स्वच्छ रखने, नदी के संरक्षण और धार्मिक स्थलों पर साफ-सफाई बनाए रखने का संदेश दिया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि गंगा की निर्मलता बनाए रखने के लिए जनभागीदारी बेहद जरूरी है। इस पहल में श्रद्धालुओं से भी अपील की जाएगी कि वे गंगा में कचरा न डालें और स्वच्छता के नियमों का पालन करें।

शाम को गंगा आरती के जरिए दिया जाएगा संरक्षण का संदेश

महास्वच्छता अभियान के बाद शाम को गंगा आरती आयोजित की जाएगी। इस दौरान गंगा के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व को रेखांकित किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि गंगा की स्वच्छता केवल सरकारी व्यवस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। साधकों और स्वयंसेवकों की भागीदारी के जरिए स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने का प्रयास किया जाएगा।

युवाओं को सनातन परंपराओं से जोड़ने की पहल

युवाओं को सनातन परंपराओं से जोड़ने की पहल
युवाओं को सनातन परंपराओं से जोड़ने की पहल

महामंडलेश्वर स्वामी शंकर करौली महाराज के नेतृत्व में आयोजित इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य युवा पीढ़ी को सनातन परंपराओं, भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ना भी है। आयोजकों के अनुसार, अर्धकुंभ संत परंपरा, आध्यात्मिक एकता और भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है। इसे भव्य स्वरूप देने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी आवश्यक है। दंडवत यात्रा और स्वच्छता अभियान के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ सेवा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश प्रसारित किया जाएगा।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए रहेंगी विशेष व्यवस्थाएं

आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चार एंबुलेंस भी साथ रहेंगी। आपात स्थिति में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और यात्रा के दौरान जरूरी सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था की गई है। आयोजकों के मुताबिक, यातायात को सुचारू बनाए रखने और यात्रा को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए स्वयंसेवक भी तैनात रहेंगे। अब 30 और 31 अक्टूबर को होने वाले इस आयोजन पर नजर रहेगी, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ गंगा स्वच्छता और सामाजिक सहभागिता प्रमुख विषय होंगे।

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