Holika Pujan Samigiri List 2026: होलिका पूजन में न हो कोई कमी, जानें पूजा की संपूर्ण सामग्री लिस्ट

रंगों वाली होली से ठीक एक दिन पहले मनाया जाने वाला होलिका पूजन बुराई पर अच्छाई की जीत का महापर्व है। फाल्गुन पूर्णिमा के पावन अवसर पर विधि-विधान से किया गया पूजन न केवल घर की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है, बल्कि सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

Holika Pujan Samigiri List 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 1, 2026

Holika Pujan Samigiri List 2026: रंगों के त्योहार होली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला होलिका दहन भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। होली का उत्सव दो दिनों तक चलता है—पहले दिन होलिका दहन और दूसरे दिन रंगों की होली खेली जाती है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन सुबह महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होलिका पूजन करती हैं और शाम को विधिपूर्वक होलिका दहन किया जाता है।

पूजा के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जरूरी है कि सभी सामग्री पहले से ही एकत्र कर ली जाए। बाजारों में यह सामान आसानी से उपलब्ध रहता है, इसलिए समय रहते सूची तैयार कर लें।

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होलिका पूजन के लिए आवश्यक सामग्री

Holika Pujan Samigiri List 2026
होलिका पूजन में न हो कोई कमी

होलिका पूजन में निम्नलिखित वस्तुओं की आवश्यकता होती है—

रोली और अक्षत (चावल)

हल्दी

गुलाल और अबीर

सरसों के दाने

मौली या कलावा

गोबर के उपलों से बनी माला (गुलरिया)

कच्चा सूत

साबुत मूंग या गेहूं की बालियां

नारियल

पान, सुपारी और लौंग

धूप और दीप

गुड़

बताशे या मिठाई

लाल रंग का कपड़ा

गंगाजल

पांच प्रकार के अनाज (यदि संभव हो)

जल से भरा लोटा

पूजा की थाली

पूजन के समय होलिका के चारों ओर कच्चा सूत लपेटा जाता है और सात बार परिक्रमा की जाती है। इस दौरान परिवार के सदस्य सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

होलिका पूजन का महत्व

होलिका दहन को अधर्म, अहंकार और नकारात्मक शक्तियों के अंत का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा जीवन की बाधाओं को दूर करने वाली मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन अग्नि में नई फसल की बालियां अर्पित करने से घर में अन्न और धन की कभी कमी नहीं होती।

यह पर्व सामूहिक रूप से मनाया जाता है, जिससे समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और एकता की भावना बढ़ती है। होलिका की अग्नि को अत्यंत पवित्र माना जाता है। कई स्थानों पर लोग अग्नि की राख घर लाकर उसका तिलक लगाते हैं, जिसे शुभ और रोगों से रक्षा करने वाला माना जाता है।

पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाएं पर्व

होलिका पूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई और सामाजिक समरसता का प्रतीक भी है। सही विधि और श्रद्धा के साथ की गई पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का संकेत देती है। फाल्गुन पूर्णिमा पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होलिका पूजन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाएं।

क्यों मनाया जाता है होलिका दहन?

होलिका दहन की कथा प्राचीन पौराणिक प्रसंग से जुड़ी है, जिसमें हिरण्यकश्यप, उसके पुत्र प्रह्लाद और बहन होलिका का उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार, भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद को उनके पिता ने कई बार मारने का प्रयास किया। अंततः होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई। किंतु भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका स्वयं भस्म हो गई।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।