Himachal Rain: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के निरमंड उपमंडल में लगातार हो रही तेज बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह असर पड़ा है। पांकवा गांव में भारी वर्षा के कारण हुए भूस्खलन से कई स्थानों पर नुकसान की खबरें सामने आई हैं। इस प्राकृतिक आपदा में सरकारी स्कूल, सेब के बागान, गोशालाएं और एक मकान प्रभावित हुआ है। घटना के बाद ग्रामीणों में चिंता का माहौल है और लोग प्रशासन से तत्काल राहत एवं सहायता की मांग कर रहे हैं।
Himachal Pradesh Landslide: हिमाचल में बारिश का कहर, चट्टान गिरने
भूस्खलन की चपेट में आया प्राथमिक विद्यालय
बताते चलें कि, ग्राम पंचायत बाड़ी के अंतर्गत आने वाले पांकवा गाव में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय को भूस्खलन से गंभीर हानि हुई है। साल 1993 में निर्मित यह भवन मलबे की चपेट में आने से काफी प्रभावित हुआ है।
विद्यालय के अंदर बच्चों के शैक्षणिक रिकॉर्ड, जरूरी दस्तावेज, किताबें और अन्य सामग्री रखी हुई है। ऐसे में इन दस्तावेजों को सुरक्षित निकालना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
सेब के बागानों को लाखों रुपये का नुकसान
आपको बता दें कि, भारी बारिश और पहाड़ी से आए मलबे ने क्षेत्र के बागवानों को भी बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। जानकारी के अनुसार, करीब 500 से अधिक सेब के पौधे मलबे में दबकर नष्ट हो गए हैं। इन बागानों के खराब होने से लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। सेब की खेती इस क्षेत्र के लोगों की आय का प्रमुख स्रोत है, इसलिए इस नुकसान का असर सीधे किसानों और बागवानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।
गोशालाएं और मकान भी हुए प्रभावित
भूस्खलन का असर खेतों और स्कूल तक सीमित नहीं रहा। कई गोशालाएं भी मलबे की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके अलावा स्थानीय निवासी सेस राम का मकान भी खतरे की जद में आ गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने परिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो।
ग्रामीणों ने की तत्काल कार्रवाई की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्र का जल्द सर्वेक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि नुकसान का सही आकलन कर प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त विद्यालय भवन के शीघ्र पुनर्निर्माण, बच्चों की पढ़ाई के लिए अस्थायी वैकल्पिक व्यवस्था और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की भी मांग उठाई है।
बारिश के चलते बना हुआ है खतरा
लगातार हो रही बारिश के कारण इलाके में भूस्खलन का खतरा अभी भी बना हुआ है। पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी ढीली होने से नए स्थानों पर भी मलबा गिरने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से संवेदनशील इलाकों में जाने से बचने की अपील कर रहा है। मौसम सामान्य होने तक राहत एवं बचाव दल स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
प्रभावित लोगों को राहत का इंतजार
प्राकृतिक आपदा के कारण प्रभावित परिवारों और किसानों को अब सरकारी सहायता का इंतजार है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर राहत और पुनर्वास की व्यवस्था होने से नुकसान की भरपाई करने में मदद मिलेगी। फिलहाल प्रशासन स्थिति का जायजा लेने और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई कर रहा है, जबकि ग्रामीण जल्द से जल्द राहत पैकेज और पुनर्निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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