Himachal Rain Alert: हिमाचल प्रदेश में मानसून की विनाशकारी शुरुआत ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, बादल फटने की घटनाओं और भूस्खलन (लैंडस्लाइड) ने राज्य में तबाही मचा दी है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण अब तक 14 लोगों की जान जा चुकी है और करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है।
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जान-माल का भारी नुकसान
स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून से अब तक मौसम से जुड़ी आपदाओं में 12 लोगों की मौत हुई है, जबकि खराब मौसम के कारण हुई सड़क दुर्घटनाओं में दो अन्य लोगों ने अपनी जान गंवाई है। राज्य में बारिश का आंकड़ा सामान्य से कहीं अधिक है, जिसने बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है।
आर्थिक नुकसान का आकलन करें तो पिछले तीन दिनों में ही प्रदेश को लगभग 16 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। भूस्खलन के कारण प्रदेश में 49 सड़कें बंद पड़ी हैं और तीन मुख्य बिजली ट्रांसफार्मर ठप हो गए हैं, जिससे कई क्षेत्रों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है।
किन्नौर में तबाही का मंजर
शुक्रवार तड़के किन्नौर जिले के चोलिंग में हुई भारी बारिश के बाद बाढ़ और मलबे ने शिमला-रिकांगपिओ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-5) को बंद कर दिया। करीब 30 मीटर के दायरे में मलबा जमा होने से घंटों आवाजाही ठप रही। गनीमत रही कि मलबे की चपेट में आई दो कारें वहीं रुक गईं और बड़ा हादसा टल गया। रिब्बा में भी बाढ़ के कारण संपर्क मार्ग बंद हो गया है, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
रिकॉर्ड तोड़ बारिश और मौसम का पूर्वानुमान
हिमाचल में इस बार मानसून का मिजाज काफी आक्रामक रहा है। पिछले तीन दिनों में राज्य में 30.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 106 प्रतिशत अधिक है। वहीं, किन्नौर में तो यह आंकड़ा सामान्य से 423 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया है। दूसरी ओर, जून महीने में प्रदेश में 1901 के बाद से 44वीं सबसे कम बारिश दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई की शुरुआत होते ही स्थिति पूरी तरह विपरीत हो गई है।
मौसम विभाग केंद्र, शिमला के अनुसार, अगले कुछ दिनों में मानसून की सक्रियता और अधिक बढ़ने वाली है। 5 जुलाई से बारिश का जोर और तेज होने की संभावना है। विभाग ने 12 जुलाई तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के लिए ‘ऑरेंज’ और ‘येलो’ अलर्ट जारी किया है।
प्रशासन और राहत कार्य
वर्तमान में कई जिलों में टीमें मलबा हटाने और सड़कों को खोलने के कार्य में जुटी हुई हैं, ताकि आवश्यक सेवाओं को बहाल किया जा सके। भारी बारिश के दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव दर्ज किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सावधानी बरतें, विशेषकर भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में यात्रा न करें।
मानसून की यह पहली मार हिमाचल के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। आने वाला समय प्रशासन और निवासियों दोनों के लिए अत्यंत सतर्क रहने का है। क्या आप हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा करने के लिए जारी सरकारी दिशा-निर्देशों के बारे में जानना चाहते हैं?
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