Hijab Prime Minister Debate: असम CM हिमंता बिस्वा सरमा का ओवैसी को करारा जवाब, ‘हिजाब वाली PM’ के बयान पर छिड़ी नई बहस

क्या वाकई भारत में संभव है हिजाब वाली प्रधानमंत्री? असदुद्दीन ओवैसी के इस विवादास्पद बयान ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। लेकिन जब यह सवाल असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के सामने आया, तो उन्होंने जो तर्क दिया उसने पूरी बहस का रुख ही मोड़ दिया। क्या है वह संवैधानिक पेच जिसे ओवैसी नजरअंदाज कर रहे हैं? जानने के लिए पढ़ें।

Hijab Prime Minister Debate

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 11, 2026

Hijab Prime Minister Debate: AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ओवैसी ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और भविष्य में वह दिन जरूर आएगा जब हिजाब पहनने वाली कोई महिला भारत की प्रधानमंत्री बनेगी। उनके इस बयान को समानता, धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देखा जा रहा है।

संविधान की बराबरी पर ओवैसी का जोर

ओवैसी ने यह बयान महाराष्ट्र के सोलापुर में 15 जनवरी को होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले एक जनसभा को संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान किसी एक धर्म या समुदाय तक सत्ता के शीर्ष पदों को सीमित नहीं करता। ओवैसी ने पाकिस्तान के संविधान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां शीर्ष संवैधानिक पद एक ही समुदाय तक सीमित हैं, जबकि भारत में हर नागरिक को आगे बढ़ने का समान अवसर प्राप्त है।

 “वो वक्त जरूर आएगा” – ओवैसी का दावा

अपने भाषण में ओवैसी ने कहा कि संभव है वह खुद उस दिन को देखने के लिए जीवित न रहें, लेकिन भविष्य में ऐसा समय जरूर आएगा जब हिजाब पहनने वाली महिला भारत की प्रधानमंत्री पद की शपथ लेगी। उन्होंने इस बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि लोकतंत्र में किसी की पहचान, पहनावा या धर्म उसके अधिकारों में बाधा नहीं बन सकता।

असम के मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति प्रधानमंत्री बन सकता है और इस पर कोई कानूनी रोक नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत एक हिंदू-बहुल देश है और अब तक देश के सभी प्रधानमंत्री हिंदू समुदाय से ही रहे हैं। उनके इस बयान को राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ में देखा जा रहा है।

बीजेपी की तीखी प्रतिक्रिया, बयान बताया गैर-जिम्मेदाराना

ओवैसी के बयान पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई। बीजेपी सांसद अनिल बोंदे ने इसे “गैर-जिम्मेदाराना” करार देते हुए कहा कि ओवैसी आधा सच पेश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम महिलाएं हिजाब पहनने के लिए मजबूर नहीं होना चाहतीं और इसके उदाहरण के तौर पर ईरान में हिजाब के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों का हवाला दिया।

जनसांख्यिकी और हिंदू एकता पर बीजेपी का जोर

अनिल बोंदे ने आगे कहा कि कोई भी गुलामी पसंद नहीं करता और भारत में जनसांख्यिकीय असंतुलन उभर रहा है, इसलिए हिंदू एकता जरूरी है। उनके इस बयान ने बहस को और तेज कर दिया, क्योंकि इसमें धार्मिक पहचान और जनसंख्या जैसे संवेदनशील मुद्दों को जोड़ा गया।

प्रधानमंत्री चयन पर भाजपा सांसद भोला सिंह का बयान

इस मुद्दे पर भाजपा सांसद भोला सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत में प्रधानमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला देश की जनता करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई नियम नहीं है जो महिलाओं को प्रधानमंत्री बनने से रोकता हो। भोला सिंह के अनुसार प्रधानमंत्री का चयन राजनीतिक दलों के आंतरिक नेतृत्व और जनता के जनादेश से तय होता है।

सियासी हलकों में तेज हुई बहस

ओवैसी के बयान के बाद भाजपा नेताओं, मंत्रियों और आम लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। यह मुद्दा अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि समानता, संविधान, धर्म और राजनीति जैसे विषयों पर व्यापक बहस का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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