Haryana News: हरियाणा का सबसे हराभरा जिला बना यमुनानगर, 60 लाख से ज्यादा पेड़ों के साथ रचा नया कीर्तिमान

Haryana News: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हरियाणा से एक सुखद और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। वन विभाग द्वारा कराई गई नवीनतम डिजिटल वृक्ष गणना में यमुनानगर जिले ने राज्य में सबसे अधिक पेड़ों वाला जिला बनने का गौरव हासिल किया है। आंकड़ों के अनुसार, जिले में जंगलों के बाहर कुल 60.94 लाख पेड़ दर्ज किए गए हैं, जो हरियाणा के सभी जिलों में सर्वाधिक हैं। यह उपलब्धि जिले की हरित सोच और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों की जागरूकता को दर्शाती है। Haryana News: मंदिरों को मिली बम से उड़ाने की धमकी, जांच में जुटी दिल्ली और

हरियाणा का सबसे हराभरा जिला बना यमुनानगर

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जून 4, 2026

Haryana News: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हरियाणा से एक सुखद और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। वन विभाग द्वारा कराई गई नवीनतम डिजिटल वृक्ष गणना में यमुनानगर जिले ने राज्य में सबसे अधिक पेड़ों वाला जिला बनने का गौरव हासिल किया है। आंकड़ों के अनुसार, जिले में जंगलों के बाहर कुल 60.94 लाख पेड़ दर्ज किए गए हैं, जो हरियाणा के सभी जिलों में सर्वाधिक हैं। यह उपलब्धि जिले की हरित सोच और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों की जागरूकता को दर्शाती है।

Haryana News: मंदिरों को मिली बम से उड़ाने की धमकी, जांच में जुटी दिल्ली और हरियाणा पुलिस

हरियाणा की हरियाली का केंद्र बना यमुनानगर

डिजिटल सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारी के अनुसार पूरे हरियाणा में लगभग 4.01 करोड़ पेड़ मौजूद हैं। इनमें से करीब 14.86 प्रतिशत पेड़ केवल यमुनानगर जिले में पाए गए हैं। इसका अर्थ यह है कि प्रदेश में मौजूद हर सातवां पेड़ यमुनानगर की धरती पर खड़ा है। इतना ही नहीं, वन क्षेत्र के लिहाज से भी यह जिला राज्य में दूसरे स्थान पर है और केवल पंचकूला इससे आगे है।

किसानों की भागीदारी ने बढ़ाई हरित संपदा

यमुनानगर की इस सफलता के पीछे स्थानीय किसानों का महत्वपूर्ण योगदान है। किसानों ने पारंपरिक कृषि के साथ-साथ व्यावसायिक वृक्षारोपण को भी अपनाया है। विशेष रूप से पॉपुलर और सफेदा जैसे पेड़ों की खेती ने जिले में हरित क्षेत्र का तेजी से विस्तार किया है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिली है।

प्राकृतिक धरोहरों से समृद्ध है जिला

यमुनानगर केवल वृक्षों की संख्या के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्राकृतिक संपदा के लिए भी जाना जाता है। यहां स्थित कलेसर नेशनल पार्क और वन्यजीव अभयारण्य जैव विविधता के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ये क्षेत्र अनेक वन्य जीवों और दुर्लभ वनस्पतियों का सुरक्षित आवास प्रदान करते हैं। यही कारण है कि यमुनानगर को हरियाणा के सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय क्षेत्रों में गिना जाता है।

बढ़ती हरियाली के सामने उभरती चुनौतियां

बढ़ती हरियाली के सामने उभरती चुनौतियां
बढ़ती हरियाली के सामने उभरती चुनौतियां

हालांकि जिले की यह उपलब्धि सराहनीय है, लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञों ने कुछ गंभीर चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। कृषि वानिकी के तहत बड़े पैमाने पर लगाए जा रहे कुछ पेड़ अत्यधिक मात्रा में भूजल का उपयोग करते हैं, जिससे जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। यह भविष्य में जल संकट का कारण बन सकता है।

अवैध गतिविधियां बढ़ा रही हैं चिंता

यमुना नदी के किनारे अवैध खनन और जंगलों से लकड़ी की तस्करी जैसी गतिविधियां प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित कर रही हैं। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास भी खतरे में पड़ जाते हैं।

प्रदूषण भी बना बड़ी समस्या

जिले में संचालित प्लाईवुड उद्योगों और स्टोन क्रशर इकाइयों से निकलने वाला धुआं तथा औद्योगिक अपशिष्ट वायु और मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं। यदि समय रहते इन समस्याओं पर नियंत्रण नहीं किया गया तो हरियाली के बावजूद पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना कठिन हो सकता है।

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संरक्षण के साथ विकास की जरूरत

यमुनानगर ने हरियाली के क्षेत्र में जो मिसाल कायम की है, उसे बनाए रखने के लिए सतत विकास, जल संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल नीतियों को अपनाना आवश्यक होगा। तभी यह जिला आने वाले वर्षों में भी हरियाणा की हरित पहचान बना रहेगा।