Haryana News: हरियाणा में पर्यावरण संरक्षण और वनीकरण के क्षेत्र से एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। राज्य के यमुनानगर जिले ने हरियाली के मामले में पूरे प्रदेश को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। हाल ही में जारी किए गए आधुनिक डिजिटल गणना के आंकड़ों के अनुसार, यमुनानगर जिले में 60 लाख से अधिक पेड़ दर्ज किए गए हैं, जो हरियाणा के किसी भी अन्य जिले की तुलना में सबसे ज्यादा हैं।
इस ऐतिहासिक डिजिटल रिकॉर्ड के सामने आने के बाद यमुनानगर को आधिकारिक तौर पर हरियाणा का सबसे हरा-भरा (Greenest District) क्षेत्र माना जा रहा है। अगर पूरे प्रदेश के कुल पेड़ों की संख्या के अनुपात में देखा जाए, तो अकेले यमुनानगर जिले का योगदान 14.86 प्रतिशत है। इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की मौजूदगी ने जिले की हवा और पर्यावरण को तो सुधारा ही है, साथ ही राज्य के सामने विकास और पर्यावरण के संतुलन का एक बेहतरीन मॉडल भी पेश किया है।
Haryana News: हरियाणा का सबसे हरा-भरा जिला बना यमुनानगर, पेड़ों की संख्या ने बनाया इतिहास
कलेसर नेशनल पार्क और एग्रो फॉरेस्ट्री (कृषि वानिकी) मॉडल की रही अहम भूमिका
यमुनानगर को ग्रीनरी के इस शिखर पर पहुंचाने में प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों ही कारकों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। विशेषज्ञों और प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस शानदार उपलब्धि के पीछे दो मुख्य स्तंभ रहे हैं, जिले में स्थित यह विशाल राष्ट्रीय उद्यान प्राकृतिक रूप से जैव विविधता और घने जंगलों को सहेजने का मुख्य केंद्र रहा है, जिससे जिले को एक बड़ा ग्रीन कवर मिलता है।
यमुनानगर के हजारों प्रगतिशील किसानों ने पारंपरिक खेती के साथ-साथ अपनी जमीनों पर व्यावसायिक स्तर पर वृक्षारोपण को अपनाया। यह एग्रो फॉरेस्ट्री मॉडल ही इस रिकॉर्ड तोड़ सफलता की असली रीढ़ साबित हुआ है। जिले के किसानों ने अपनी उपजाऊ भूमि पर फसलों के साथ-साथ पॉपुलर (Poplar) और सफेदा (Eucalyptus) जैसे तेजी से बढ़ने वाले पेड़ों का बड़े पैमाने पर रोपण किया। इस अनूठे प्रयास से न केवल पर्यावरण का संरक्षण हुआ, बल्कि स्थानीय किसानों की आय में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सरकार और किसानों का संयुक्त प्रयास
यमुनानगर की इस गौरवमयी उपलब्धि पर हरियाणा के पूर्व पर्यावरण मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सरकार और जनता के सांझे प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि जब वे पर्यावरण मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे थे, तब उनका विशेष ध्यान जिले में कृषि वानिकी (Agro Forestry) को बढ़ावा देने पर था।
पूर्व पर्यावरण मंत्री द्वारा रेखांकित किए गए मुख्य बिंदु
सरकार द्वारा जमीनी स्तर पर विशेष अभियान चलाकर किसानों को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित किया गया था और उन्हें इसके दीर्घकालिक आर्थिक लाभों के बारे में विस्तार से समझाया गया था।
प्रशासन का उद्देश्य केवल जंगलों का क्षेत्रफल बढ़ाना नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से ग्रामीण परिवारों और किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना भी था। पॉपुलर और सफेदा की लकड़ी ने प्लाइवुड उद्योग को कच्चा माल दिया, जिससे किसानों को फसलों से अलग बंपर मुनाफा हुआ।
कंवरपाल गुर्जर ने स्पष्ट किया कि आज जो परिणाम दिख रहा है, वह किसानों के अथक परिश्रम और नीतियों के सही क्रियान्वयन का नतीजा है। यमुनानगर का यह एग्रो फॉरेस्ट्री मॉडल आज न केवल पूरे हरियाणा के लिए गर्व की बात है, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है कि कैसे पर्यावरण को बचाते हुए किसानों की जेब को भी मजबूत किया जा सकता है।
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