Haryana News: हरियाणा में बदलेगी जेल की रसोई की तस्वीर, अंबाला से शुरू होगी खास पहल

हरियाणा जेल विभाग अब कैदियों द्वारा तैयार खाना आम जनता तक पहुंचाएगा। जेल की कैंटीन और कैफे सेंटर के जरिए इसे “जेल की रोटी” नाम से पैकेट में उपलब्ध कराने की तैयारी है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 29, 2026

Haryana News: हरियाणा जेल विभाग ने आम जनता के लिए एक बेहद दिलचस्प और अनूठी पहल की शुरुआत की है। इस योजना के तहत अब जेल के कैदियों द्वारा अपने हाथों से पकाया गया शुद्ध और सात्विक भोजन आम नागरिकों को भी उपलब्ध कराया जाएगा। कैदियों के बनाए इस विशेष खाने के पैकेट का नाम “जेल की रोटी” रखा गया है। आने वाले कुछ ही दिनों में लोग जेल की कैंटीन और कैफे सेंटरों के माध्यम से इस भोजन का स्वाद ले सकेंगे।

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अंबाला सेंट्रल जेल से होगी पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत

इस महत्वाकांक्षी योजना के पहले चरण की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अंबाला सेंट्रल जेल से की जा रही है। यहां के स्थानीय नागरिक जेल परिसर के बाहर बनाई गई खास कैंटीन में जाकर इस “जेल की रोटी” का आनंद उठा सकेंगे। जेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, कैंटीन की सफलता के बाद इस खाने की होम डिलीवरी की सुविधा भी शुरू की जाएगी। इसके लिए ई-कॉमर्स दिग्गज फ्लिपकार्ट के साथ एक आधिकारिक समझौता (MoU) भी साइन किया जाएगा। अंबाला में इस योजना के सफल होने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से हरियाणा राज्य की अन्य सभी जेलों की कैंटीनों में भी लागू किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ मॉडल से प्रेरणा लेकर तैयार हुई योजना

आम बोलचाल में एक पुरानी धारणा यह भी मानी जाती है कि जो व्यक्ति जेल की रोटी खा लेता है, वह कभी जेल नहीं जाता। जेल विभाग ने इसी पारंपरिक विश्वास को सकारात्मक दिशा देते हुए यह प्रस्ताव तैयार किया है। इस अनोखी पहल के लिए छत्तीसगढ़ राज्य से प्रेरणा ली गई है, जहां रायपुर सेंट्रल जेल में आम जनता के लिए इस तरह की योजना पहले से ही सफलतापूक संचालित हो रही है। लोग तयशुदा प्रक्रिया का पालन कर जेल कैंटीन से भोजन प्राप्त कर सकते हैं। मांग बढ़ने पर पैकेटों की संख्या में भी विस्तार किया जाएगा। इस खाने में दाल, ताजी सब्जी, रोटी, चावल और दही को शामिल किया जाएगा, जिसके दाम बेहद किफायती रखे जाएंगे।

मात्र 10 प्रतिशत लागत मूल्य पर मिलेगा शुद्ध भोजन

अधिकारियों का कहना है कि जेल के अंदर कैदियों के लिए पूरी तरह शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाला भोजन तैयार किया जाता है। अब यही भोजन आम जनता को भी बिना किसी व्यावसायिक मुनाफे के उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए लोगों को भोजन की कुल लागत का केवल 10 प्रतिशत ही भुगतान करना होगा। वर्तमान जेल मैनुअल के अनुसार हर कैदी को डाइट में 200 ग्राम आटा, 50 ग्राम चावल, दो प्रकार की सब्जियां, दाल और दही परोसा जाता है। जेल प्रशासन हर दिन खुले बाजार से उत्तम क्वालिटी के मसाले, अनाज और सब्जियां खरीदता है, जिससे भोजन पूरी तरह मिलावट-मुक्त होता है।

कैदियों को आत्मनिर्भर और कुशल बनाना है मुख्य उद्देश्य

इस पूरी योजना का प्राथमिक उद्देश्य कोई व्यावसायिक लाभ कमाना नहीं है, बल्कि इसके पीछे सामाजिक और सुधारात्मक सोच छिपी है। इसके जरिए कैदियों को रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रखना, उन्हें कुकिंग और मैनेजमेंट की कला सिखाना तथा मानसिक रूप से मजबूत बनाना मुख्य लक्ष्य है। खाना बिक्री से मिलने वाली राशि का उपयोग कैदियों के कल्याण, स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम और उनके पुनर्वास के कार्यों में किया जाएगा, ताकि सजा पूरी होने के बाद कैदी समाज में गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।

हरियाणा के जेल महानिदेशक ए.एस. चावला ने बताया कि जनता की ओर से जेल में बनने वाले उत्पादों और ब्रेड की काफी मांग रही है। इसी जनभावना को देखते हुए विभाग ने यह कदम उठाया है, जिसकी शुरुआत जल्द ही अंबाला से होने जा रही है।

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