Hartalika Teej: व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, वरना हो सकती है परेशानी

हरतालिका तीज व्रत 2026 इस साल 14 सितंबर, सोमवार को रखा जाएगा। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की कामना से पूजा करती हैं। जानिए हरतालिका तीज की तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक मान्यता और किन महिलाओं को निर्जला व्रत से बचना चाहिए।

Hartalika Teej

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 29, 2026

Hartalika Teej: हिंदू धर्म में हरतालिका तीज व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित लड़कियां भी मनचाहे जीवनसाथी की कामना से इस पर्व पर पूजा-अर्चना करती हैं। इस साल हरतालिका तीज व्रत 14 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा।

हरतालिका तीज 2026 की तिथि क्या है?

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजकर 8 मिनट से शुरू होगी और 14 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर हरतालिका तीज व्रत 2026 14 सितंबर को ही मनाया जाएगा।इस दिन महिलाएं सुबह स्नान आदि के बाद व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखने की परंपरा का पालन भी करती हैं।

हरतालिका तीज 2026 शुभ मुहूर्त

हरतालिका तीज व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 5 मिनट से लेकर 7 बजकर 6 मिनट तक बताया गया है। इस दौरान पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है।इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 32 मिनट से 5 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। पूजा के समय को लेकर स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर संभव है, इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग का समय देखना भी उचित रहेगा।

हरतालिका तीज व्रत की धार्मिक मान्यता क्या है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या की थी। लंबे समय तक कठोर तप करने के बाद भगवान शिव ने उन्हें पति के रूप में स्वीकार किया।मान्यता है कि इसी प्रसंग से हरतालिका तीज व्रत की परंपरा जुड़ी हुई है। महिलाएं इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा कर वैवाहिक सुख, पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।

हरतालिका तीज व्रत किन महिलाओं को रखने से बचना चाहिए?

हरतालिका तीज में कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। हालांकि, हर किसी के लिए लंबे समय तक बिना भोजन और पानी के रहना उचित नहीं माना जाता। विशेष रूप से गर्भवती, बीमार और बुजुर्ग महिलाओं को अपनी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए व्रत के स्वरूप का निर्णय करना चाहिए।धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। यदि किसी महिला को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो कठोर निर्जला व्रत रखने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।

गर्भवती महिलाओं को हरतालिका तीज में सावधानी बरतने की सलाह

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर को पर्याप्त पोषण और पानी की जरूरत होती है। ऐसे में लंबे समय तक निर्जला रहने से परेशानी हो सकती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को कठोर व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा-पाठ और भगवान शिव-माता पार्वती का स्मरण बिना शरीर को कष्ट दिए भी किया जा सकता है।

अस्वस्थ महिलाओं के लिए हरतालिका तीज व्रत में सावधानी जरूरी

जो महिलाएं किसी बीमारी से जूझ रही हैं, शारीरिक रूप से कमजोर हैं या नियमित रूप से जरूरी दवाइयां लेती हैं, उन्हें निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।ऐसी स्थिति में पूजा-अर्चना करते हुए फलाहार या अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आहार लेना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है। व्रत का उद्देश्य आस्था है, इसलिए स्वास्थ्य को जोखिम में डालना जरूरी नहीं है।

वृद्ध महिलाओं को निर्जला व्रत से बचने की सलाह

बढ़ती उम्र में शरीर की पानी और ऊर्जा की जरूरत तथा सहनशक्ति अलग हो सकती है। लंबे समय तक बिना पानी के रहना बुजुर्ग महिलाओं के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।इसलिए वृद्ध महिलाओं को अपनी सेहत को प्राथमिकता देते हुए कठोर निर्जला उपवास से बचना चाहिए। वे अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान कर सकती हैं।

कुंवारी कन्याएं हरतालिका तीज पर क्या करें?

अविवाहित लड़कियों के हरतालिका तीज व्रत को लेकर अलग-अलग धार्मिक और क्षेत्रीय मान्यताएं मिलती हैं। कुछ परंपराओं में कुंवारी कन्याओं द्वारा मनचाहे वर की कामना से तीज व्रत रखने की मान्यता है, जबकि कुछ मतों में उनके लिए इस व्रत का विधान नहीं माना जाता।इसलिए इस विषय में अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यता का पालन करना बेहतर माना जाता है। अविवाहित लड़कियां इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर सकती हैं।

हरतालिका तीज पर पूजा के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी

हरतालिका तीज व्रत आस्था और श्रद्धा से जुड़ा पर्व है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव को सच्चे मन से जल अर्पित करने और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करने का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर केवल परंपरा निभाने के लिए शरीर को कष्ट देना जरूरी नहीं है।खासकर गर्भवती, बीमार, बुजुर्ग या नियमित दवा लेने वाली महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार व्रत रखना चाहिए। आखिरकार पूजा और भक्ति का उद्देश्य ईश्वर के प्रति श्रद्धा है, और श्रद्धा स्वस्थ रहते हुए भी पूरी की जा सकती है।