Haryana News: लोकायुक्त रिपोर्ट से हरियाणा प्रशासन पर सवाल, हजारों शिकायतों के निपटारे में देरी

हरियाणा लोकायुक्त की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और शिकायतों के निवारण की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट ने प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर चिंता जताई है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 29, 2026

Haryana News: हरियाणा में प्रशासनिक लापरवाही, भ्रष्टाचार और जनशिकायतों के समाधान की व्यवस्था पर हरियाणा लोकायुक्त की वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट ने एक आईना दिखाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक राज्य में लोकायुक्त के समक्ष कुल 1,289 शिकायतें लंबित पड़ी हुई हैं। इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने और समय पर न्याय सुनिश्चित करने की व्यवस्था को और अधिक मजबूत तथा प्रभावी बनाने की सख्त आवश्यकता है।

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विकास एवं पंचायत, पुलिस और राजस्व विभाग सबसे आगे

लोकायुक्त के समक्ष लंबित कुल मामलों में सबसे बड़ा हिस्सा उन विभागों का है, जिनका आम जनता के दैनिक जीवन से सीधा वास्ता रहता है।

विकास एवं पंचायत विभाग: इस विभाग से जुड़ी सबसे अधिक 450 शिकायतें लंबित हैं।

पुलिस विभाग: नागरिकों को न्याय दिलाने की पहली कड़ी माने जाने वाले पुलिस विभाग की 250 शिकायतें लंबित पाई गई हैं।

राजस्व विभाग: भूमि रिकॉर्ड और दस्तावेजों से जुड़े इस विभाग की 189 शिकायतें लंबित हैं।

अन्य विभाग: इसके अलावा शिक्षा विभाग की 100 और शहरी स्थानीय निकाय विभाग की 66 शिकायतें भी पेंडिंग लिस्ट में शामिल हैं।

पुलिस और राजस्व विभागों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

लोकायुक्त रिपोर्ट में पुलिस विभाग के खिलाफ दर्ज शिकायतों की प्रकृति बेहद चिंताजनक है। इनमें मुख्य रूप से एफआईआर दर्ज न करने, जांच में पक्षपात बरतने, खुलेआम रिश्वत मांगने और रसूखदार लोगों के इशारों पर निर्दोषों को झूठे मामलों में फंसाने जैसे संगीन आरोप शामिल हैं।

दूसरी ओर, राजस्व विभाग में जमीन-जायदाद के रिकॉर्ड में हेराफेरी, बिचौलियों व अनधिकृत व्यक्तियों का दखल, रिश्वतखोरी, और मामलों के निपटारे में अत्यधिक देरी जैसी समस्याएं आम नागरिकों के लिए मानसिक व आर्थिक परेशानी का सबब बनी हुई हैं। समय पर न्याय न मिलने से जनता का प्रशासनिक तंत्र से भरोसा डगमगा रहा है।

170 मामलों में एक्शन टेकन रिपोर्ट का अब तक इंतजार

रिपोर्ट का सबसे गंभीर पहलू यह है कि वर्ष 2017 से 2025 के बीच सरकार को भेजी गई लोकायुक्त की सिफारिशों में से 170 मामलों पर अब तक ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (ATR) प्रस्तुत नहीं की गई है। नियमों के मुताबिक सक्षम प्राधिकारी को तय समयसीमा में कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपनी होती है, लेकिन रिपोर्ट का समय पर न आना संवैधानिक संस्थाओं की सिफारिशों के प्रति प्रशासनिक सुस्ती और गंभीरता के अभाव को उजागर करता है।

शिकायतों का दबाव और गुरुग्राम में कैंप कोर्ट की मांग

समीक्षा अवधि (1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026) के दौरान 539 नई शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें भिवानी जिला 73 नई शिकायतों के साथ सबसे आगे रहा। हालांकि, इस दौरान लोकायुक्त के प्रयासों से सरकारी गबन से जुड़े मामलों में 28,17,065 रुपये की रिकवरी भी कराई गई।

इसके अलावा, दक्षिण हरियाणा के सात जिलों (फरीदाबाद, गुरुग्राम, रेवाड़ी, पलवल, नूंह, महेंद्रगढ़ और झज्जर) की 312 शिकायतें लंबित हैं। इन क्षेत्रों के लोगों को सुनवाई के लिए चंडीगढ़ तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। इसे देखते हुए लोकायुक्त ने गुरुग्राम में क्षेत्रीय कैंप कोर्ट या कार्यालय स्थापित करने की सिफारिश की है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

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