Haryana News: हरियाणा के सरकारी विद्यालयों में पिछले दो दशकों यानी करीब 20 से 21 वर्षों से अपनी निष्ठावान सेवाएं दे रहे लगभग 12 हजार अतिथि अध्यापकों (गेस्ट टीचर्स) के पक्के होने की उम्मीदों को एक नया बल मिला है। लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे इन शिक्षकों के लिए हालिया प्रशासनिक और न्यायिक घटनाक्रम एक बड़ी राहत लेकर आए हैं। राज्य सरकार द्वारा पहले ही महाविद्यालयों (कॉलेजों) में कार्यरत लगभग 5 हजार गेस्ट लेक्चरर्स को नियमित किया जा चुका है, जिसके बाद से स्कूली गेस्ट टीचर्स की नियमितीकरण की मांग और अधिक मुखर हो गई थी।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सख्त निर्देश और अदालती आदेश
इस पूरे मामले को सबसे बड़ा मोड़ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के हालिया महत्वपूर्ण फैसलों से मिला है। अदालत की एकल पीठ ने गत 25 मई 2026 को अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि इन अतिथि अध्यापकों को आगामी दो महीनों के भीतर नियमित किया जाए। इसके उपरांत, आगामी कानूनी प्रक्रिया के तहत 6 अगस्त 2026 को डबल बेंच द्वारा की गई सुनवाई के दौरान भी दो महीने के भीतर नियमितीकरण की संपूर्ण प्रक्रिया को पूरा करने के निर्देशों पर अपनी मुहर लगा दी गई। इन कड़े अदालती आदेशों के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल काफी तेज हो गई है।
अतिथि अध्यापक संगठनों की एकजुटता और संघर्ष समिति का गठन
अदालती फैसलों और आदेशों को जमीन पर जल्द से जल्द लागू करवाने के लिए हरियाणा भर के आधा दर्जन से अधिक अतिथि अध्यापक संगठन पूरी तरह से एकजुट हो चुके हैं। इन सभी संगठनों ने मिलकर ‘हरियाणा गेस्ट टीचर्स संघर्ष समिति’ का औपचारिक गठन किया है। इस संघर्ष समिति में मैना यादव, कुलदीप झरोली, डॉ. अजय लोहान, कृष्ण धारसूल, राजेंद्र शास्त्री, पारस शर्मा और नरेंद्र संधू जैसे प्रमुख शिक्षक नेता शामिल हैं, जो पूरी मजबूती से इस लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव से मुलाकात और ज्ञापन
संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए डॉ. अजय लोहान ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर से चंडीगढ़ में मुलाकात की और उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने यह बात जोर देकर कही कि वे वर्ष 2014 में राज्य सरकार द्वारा बनाई गई नीति (तारीख 16-06-2014 और 18-06-2014) की तमाम निर्धारित शर्तों को पूरी तरह से पूरा करते हैं, इसके बावजूद वे वर्षों से पक्के होने का इंतजार कर रहे हैं। कई शिक्षक तो ऐसे हैं जो अब अपनी सेवा के अंतिम चरण में यानी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के कगार पर पहुंच चुके हैं।
प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश
मामले की गंभीरता, संवेदनशीलता और अदालती आदेशों के कड़े रुख का संज्ञान लेते हुए मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर ने इस पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि गेस्ट टीचर्स को पक्का करने की संपूर्ण रूपरेखा और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को अविलंब सौंपी जाए।
शिक्षा मंत्री और सीएम के ओएसडी का सकारात्मक रुख
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्य के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने भी अतिथि अध्यापकों के इस गंभीर विषय में गहरी रुचि दिखाई है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में शिक्षा मंत्री ने उनकी सभी मांगों को बेहद सहानुभूतिपूर्वक सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि वे जल्द ही शिक्षक प्रतिनिधियों की सीधी मुलाकात मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ करवाएंगे। इसके अलावा, मुख्यमंत्री के ओएसडी राज नेहरू ने भी प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया है कि सरकार इन शिक्षकों की मांगों पर अत्यंत गंभीरता और सकारात्मकता के साथ विचार कर रही है, जिससे 12 हजार परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
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