Haryana News: हरियाणा के नूंह जिले से पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। नूंह पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. अर्पित जैन ने अनुशासनहीनता और धोखाधड़ी के एक मामले में सख्त कदम उठाते हुए एक सहायक उप-निरीक्षक (ASI) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई तब की गई जब यह खुलासा हुआ कि उक्त पुलिसकर्मी ने विभाग को गुमराह करके लंबी छुट्टी ली थी।
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पूरा मामला
निलंबित ASI अनिल कुमार पर आरोप है कि उन्होंने 8 जून को नूंह पुलिस विभाग को सूचित किया कि उनकी दादी का निधन हो गया है। इस संवेदनशील और निजी कारण का हवाला देकर उन्होंने घर जाने की अनुमति मांगी, जिसे विभाग ने स्वीकार कर लिया। उन्हें निर्देश दिया गया था कि वे अगले दिन ही वापस ड्यूटी पर लौट आएं, लेकिन ASI अनिल कुमार तय समय सीमा के भीतर काम पर उपस्थित नहीं हुए।
थाना प्रभारी ने जब उनकी अनुपस्थिति पर ध्यान दिया, तो उन्होंने ASI से संपर्क करने का हर संभव प्रयास किया। हालांकि, कई दिनों तक उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ रहा और वे किसी भी आधिकारिक संपर्क से दूर रहे। लंबी चुप्पी के बाद, वे लगभग 11 दिन की देरी से 19 जून को ड्यूटी पर लौटे।
विभागीय जांच में हुआ बड़ा खुलासा
ड्यूटी पर लौटने के बाद जब पुलिस विभाग ने उनकी लंबी अनुपस्थिति के कारणों की विभागीय जांच की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार, ASI ने अपनी अनुपस्थिति का कारण ‘बीमारी’ बताया था, जो कि उनके द्वारा पहले दी गई ‘दादी के निधन’ की सूचना से बिल्कुल अलग थी।
जांच अधिकारियों ने जब उनके डिजिटल रिकॉर्ड और मोबाइल की पड़ताल की, तो कुछ तस्वीरें और डिजिटल साक्ष्य मिले जिनसे स्पष्ट हुआ कि वह उस दौरान किसी शोक में नहीं, बल्कि अपने परिवार के साथ बाहर यात्रा (Trip) का आनंद ले रहे थे। इसके अलावा, जांच में यह भी पाया गया कि जिस महिला के निधन का बहाना बनाकर उन्होंने छुट्टी ली थी, वे उनकी वास्तविक दादी नहीं थीं। सोशल मीडिया पर की गई उनकी कुछ पोस्ट ने भी इस झूठ की कलई खोलने में अहम भूमिका निभाई।
लंबित फाइलों का अंबार और विभागीय कार्रवाई
मामला सिर्फ छुट्टी के दुरुपयोग तक ही सीमित नहीं रहा। जांच में यह भी सामने आया कि ASI अनिल कुमार के पास कई महत्वपूर्ण जांच फाइलें और फरियादियों की शिकायतें लंबे समय से लंबित थीं। उनके ड्यूटी से गायब रहने के कारण इन मामलों का निपटारा बुरी तरह प्रभावित हुआ और पीड़ित न्याय के लिए भटकते रहे।
इन गंभीर आरोपों को देखते हुए, नूंह एसपी डॉ. अर्पित जैन ने इसे ‘गंभीर कदाचार’ माना और ASI अनिल कुमार को तत्काल निलंबित कर दिया। साथ ही, उनके खिलाफ एक विस्तृत और नियमित विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं, ताकि उनकी जवाबदेही तय की जा सके। यह घटना पुलिस विभाग में अनुशासन और नैतिकता के पालन को लेकर एक कड़ा संदेश देती है।
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