Haryana News: हरियाणा के बराड़ा क्षेत्र में बीती रात आए भीषण आंधी-तूफान ने भारी तबाही मचाई। इस दौरान दोसड़का रोड पर स्थित एक रिहायशी मकान पर सफेदे का एक विशालकाय पेड़ गिरने से हड़कंप मच गया। घटना इतनी भयावह थी कि मकान की दीवारें ढह गईं और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ, लेकिन गनीमत रही कि घर के मालिक और उनकी पत्नी ने सतर्कता दिखाते हुए अपनी जान बचा ली।
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बाल-बाल बची दंपति की जान
मकान मालिक कृष्ण कुमार जैन ने घटना को याद करते हुए बताया कि रात करीब 9:15 बजे के आसपास क्षेत्र में अचानक तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। उस समय वे और उनकी पत्नी आंगन में टहल रहे थे। तभी अचानक उन्हें पेड़ के गिरने की आहट सुनाई दी। खतरे को भांपते हुए उन्होंने और उनकी पत्नी ने बिना समय गंवाए घर के अंदर दौड़ लगा दी। यदि वे चंद सेकंड की देरी करते, तो वे पेड़ की चपेट में आ सकते थे। इस सूझबूझ ने एक संभावित बड़ी त्रासदी को टाल दिया।
प्रशासन की अनदेखी बनी मुसीबत
पीड़ित कृष्ण कुमार जैन ने बताया कि यह हादसा पूरी तरह से टाला जा सकता था। सफेदा का यह पेड़ पिछले कई महीनों से एक तरफ झुक चुका था, जिससे इसके गिरने का खतरा लगातार बना हुआ था। इस संबंध में उन्होंने वन विभाग को लिखित में शिकायत भी दी थी, लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण इसे समय रहते नहीं काटा गया। अंततः, तूफान के दौरान यह पेड़ काल बनकर उनकी चारदीवारी को तोड़ते हुए आंगन में आ गिरा।
भारी नुकसान और अवरुद्ध मार्ग
पेड़ के गिरने का असर इतना घातक था कि इसके मोटे तने और टहनियां न केवल घर के मुख्य द्वार तक फैल गईं, बल्कि पड़ोसी की छत तक भी पहुँच गईं। पेड़ की चपेट में आने से पड़ोसी की छत पर लगा एयर कंडीशनर (AC) और अन्य सामान पूरी तरह नष्ट हो गया। इसके अलावा, कृष्ण कुमार जैन के मकान की चारदीवारी, लोहे की ग्रिल और आंगन में लगी टाइलें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। पेड़ के मुख्य द्वार पर गिरने से घर का रास्ता भी पूरी तरह बंद हो गया, जिससे परिवार कुछ समय के लिए घर के भीतर ही फंस गया।
राहत कार्य और प्रशासनिक कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम हरकत में आई। फॉरेस्ट गार्ड फूल सिंह के नेतृत्व में एक दल मौके पर पहुँचा और कटर की मदद से पेड़ को काटकर हटाया गया। वन विभाग के अनुसार, तूफान के चलते बराड़ा के अन्य क्षेत्रों में भी पेड़ गिरने की सूचना मिली थी, जिसमें अकालगढ़ के समीप भी यातायात बाधित हुआ था। वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन सभी रास्तों को साफ कर आवाजाही बहाल की।
यह घटना जहां प्रकृति के रौद्र रूप को दर्शाती है, वहीं स्थानीय प्रशासन के लिए एक सबक भी है कि मानसून या खराब मौसम से पहले खतरनाक पेड़ों की छंटाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि आम नागरिकों की जान-माल की रक्षा की जा सके।
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