Haryana News: हरियाणा में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए आज (सोमवार) से मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान अधिकारिक तौर पर शुरू हो रहा है। इस महाअभियान के शुरू होने से ठीक पहले, हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ए. श्रीनिवास ने रविवार को एक अहम प्रेस वार्ता बुलाई। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आगामी चुनावी तैयारियों और मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिहीन बनाने के लिए चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए प्रशासनिक कदमों की विस्तृत जानकारी साझा की।
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मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि इस पूरी पुनरीक्षण प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह से मुक्त रखने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य के सभी मान्यता प्राप्त और पंजीकृत राजनीतिक दलों से विशेष आग्रह किया था कि वे अपने-अपने बूथ लेवल एजेंट (BLA-2) नियुक्त करें। ये बूथ लेवल एजेंट सभी मतदान केंद्रों पर जमीनी स्तर पर मौजूद रहेंगे और मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने और संशोधन जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों की सीधी निगरानी व सत्यापन (Verification) करेंगे।
एजेंटों की नियुक्ति में बीजेपी सबसे आगे
चुनाव आयोग द्वारा जारी शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, बूथ लेवल एजेंट (BLA-2) की नियुक्तियों के मामले में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विपक्षी दलों से काफी आगे चल रही है।भाजपा ने राज्य के मतदान केंद्रों पर अपने एजेंट तैनात करने के लिए अब तक सबसे अधिक 15,808 आवेदन चुनाव कार्यालय में जमा कराए हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस सूची में दूसरे स्थान पर है, जिसने अपने कार्यकर्ताओं को बूथ एजेंट बनाने के लिए 12,858 आवेदन प्रस्तुत किए हैं।
क्षेत्रीय और अन्य राष्ट्रीय दलों की बात करें तो उनकी सक्रियता बेहद सीमित नजर आ रही है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने केवल 270 और इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) ने महज 217 आवेदन सौंपे हैं। वहीं, राज्य की दो अन्य प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियां— जननायक जनता पार्टी (JJP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP)— इस रेस में पूरी तरह पिछड़ गई हैं; चुनाव आयोग को अभी तक इनकी तरफ से एक भी बूथ लेवल एजेंट का आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।
प्रदेश में कुल 20,629 पोलिंग बूथ
हरियाणा में वर्तमान में कुल 20,629 मतदान केंद्र (Polling Booths) हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो सूबे की दो सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियां— भाजपा और कांग्रेस— भी अभी तक राज्य के शत-प्रतिशत बूथों पर अपने प्रतिनिधि या एजेंट नियुक्त करने के आंकड़े को नहीं छू सकी हैं।
इस विषय पर जब मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए. श्रीनिवास से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दलों द्वारा सौंपे गए ये आंकड़े पूरी तरह शुरुआती (Initial) हैं। अभियान के आगे बढ़ने के साथ ही आने वाले दिनों में सभी दलों की ओर से और अधिक आवेदन जमा किए जाने की पूरी संभावना है।
उन्होंने अंत में जोर देते हुए कहा कि चुनाव आयोग का अंतिम लक्ष्य राज्य के प्रत्येक मतदान केंद्र पर सभी सक्रिय राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों की अनिवार्य मौजूदगी सुनिश्चित करना है। जब सभी दलों के प्रतिनिधि ग्राउंड पर मौजूद रहकर काम की निगरानी करेंगे, तो मतदाता सूची पुनरीक्षण की यह पूरी प्रक्रिया अत्यधिक विश्वसनीय, त्रुटिहीन और पारदर्शी बनेगी, जिससे भविष्य के चुनावों में किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
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