Haryana News: अटारी-वाघा जॉइंट चेक पोस्ट से एक बेहद भावुक और निराश करने वाली खबर सामने आई है। पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए महीनों से तैयारी कर रहे हरियाणा के 94 सिख श्रद्धालुओं के जत्थे को भारत-पाकिस्तान सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें बॉर्डर से ही वापस लौटा दिया गया। पासपोर्ट पर वैध वीजा होने के बावजूद ऐन वक्त पर सफर से रोके जाने के कारण श्रद्धालुओं में भारी निराशा और आक्रोश का माहौल है।
यह जत्था हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के तत्वावधान में कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक ‘गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी’ से पूरी धार्मिक मर्यादा और अरदास के साथ रवाना हुआ था। इस यात्रा के लिए कुल $104$ श्रद्धालुओं ने आवेदन किया था, जिसमें से गहन जांच-पड़ताल के बाद $94$ लोगों का वीजा जारी किया गया था। लेकिन अमृतसर में रात्रि विश्राम करने के बाद जैसे ही यह जत्था वाघा बॉर्डर पहुंचा, सुरक्षा एजेंसियों ने इन्हें आगे जाने से रोक दिया।
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गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी पर्व और करतारपुर साहिब के दर्शन का था कार्यक्रम
सिख संगत के लिए यह यात्रा धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण थी। इस विशेष जत्थे को पाकिस्तान के लाहौर में 18 जून को आयोजित होने वाले श्री गुरु अर्जुन देव जी महाराज के शहीदी गुरु पर्व के मुख्य समागम में हिस्सा लेना था।
शहीदी पर्व में शामिल होने के साथ-साथ श्रद्धालुओं के इस रूट में सिख इतिहास से जुड़े कई बेहद पवित्र और ऐतिहासिक गुरुधामों के दर्शन शामिल थे, जिनमें मुख्य रूप से:
गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब (नारोवाल)
गुरुद्वारा डेरा साहिब (लाहौर)
गुरुद्वारा पंजा साहिब (हसन अब्दाल)
श्रद्धालुओं का कहना है कि वे महीनों से इस पावन यात्रा की प्रतीक्षा कर रहे थे, लेकिन सीमा पर प्रशासनिक अड़चनों के कारण उनका यह सपना अधूरा रह गया।
केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) की अंतिम क्लीयरेंस का फंसा पेंच
वैध वीजा होने के बावजूद जत्थे को सीमा पार न करने देने के पीछे सख्त प्रशासनिक और तकनीकी (Documentation) कारणों को मुख्य वजह बताया जा रहा है। सूत्रों और HSGMC के पदाधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इसके पीछे केंद्रीय गृह मंत्रालय की अंतिम मंजूरी का पेंच फंसा है।
क्या है नियम? नियमों के मुताबिक, पाकिस्तान जैसे संवेदनशील देश में जाने वाले किसी भी धार्मिक जत्थे को दूतावास से वीजा मिलने के बाद भी केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) से अंतिम सुरक्षा मंजूरी (Security Clearance) और रूट क्लीयरेंस की आवश्यकता होती है।
दस्तावेजों की कमी: जब हरियाणा का यह जत्था वाघा बॉर्डर पर इमिग्रेशन और सुरक्षा जांच के लिए पहुंचा, तो उनके पास गृह मंत्रालय द्वारा जारी की जाने वाली अंतिम क्लीयरेंस या स्वीकृत सूची की आधिकारिक कॉपी उपलब्ध नहीं थी।
एसजीपीसी जत्थे को मिली अनुमति: नियमों और दस्तावेजों की इसी तकनीकी कमी के कारण सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों ने हरियाणा के जत्थे को आगे जाने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के नेतृत्व वाले मुख्य जत्थे के अन्य राज्यों के सदस्यों के पास सभी दस्तावेज दुरुस्त थे, इसलिए उन्हें पाकिस्तान जाने की अनुमति मिल गई।
प्रशासनिक चूक की जांच में जुटी हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी
इतनी लंबी और जटिल वीजा प्रक्रिया से गुजरने के बाद अंतिम समय पर बॉर्डर से लौटाए जाने के कारण कुरुक्षेत्र और हरियाणा की संगत बेहद भावुक है। श्रद्धालुओं का कहना है कि अगर कोई तकनीकी कमी थी, तो उन्हें कुरुक्षेत्र से रवाना होने से पहले ही सूचित किया जाना चाहिए था।
फिलहाल, इस बड़ी लापरवाही और प्रशासनिक चूक को लेकर हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के वरिष्ठ पदाधिकारी और प्रबंधक एक्शन में हैं। कमेटी के पदाधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि क्लीयरेंस मिलने में देरी कहां और किस स्तर पर हुई। इसके साथ ही, श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखते हुए गृह मंत्रालय के उच्च अधिकारियों से दोबारा संपर्क साधने और इस समस्या का तुरंत समाधान निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि यदि संभव हो तो जत्थे को दोबारा भेजा जा सके।
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