Haryana News: प्रवासी मजदूरों को कमरा देने से पहले होगी जांच, हरियाणा के गांव में नया नियम

हरियाणा के बाबरपुर गांव में एक स्थानीय युवक के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद ग्रामीणों ने कड़ा फैसला लेते हुए बिना आधार कार्ड या पहचान दस्तावेज वाले प्रवासी मजदूरों के किराए पर रहने पर रोक लगा दी है

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 25, 2026

Haryana News: हरियाणा के पानीपत जिले के अंतर्गत आने वाले बाबरपुर गांव में एक स्थानीय युवक के साथ हुई मारपीट और विवाद के बाद ग्रामीणों ने सुरक्षा और पहचान को लेकर एक बेहद कड़ा और अहम फैसला लिया है। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त था, जिसके चलते पंचायत और स्थानीय लोगों ने मिलकर यह तय किया है कि अब गांव में बिना वैध पहचान पत्र के किसी भी बाहरी या प्रवासी मजदूर को न तो शरण दी जाएगी और न ही किराए पर कमरा उपलब्ध कराया जाएगा। यह निर्णय गांव की शांति और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

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विवाद की पृष्ठभूमि और घटना की शुरुआत

पूरे मामले की शुरुआत गांव की एक फैक्ट्री में काम करने वाले कुछ प्रवासी मजदूरों और एक स्थानीय युवक के बीच हुए आपसी विवाद से हुई। आरोप लगाया गया है कि मामूली कहासुनी के बाद मजदूरों ने एकजुट होकर लाठी-डंडों से उक्त युवक के साथ मारपीट की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

यह मामला जब तूल पकड़ते हुए स्थानीय पुलिस थाने तक पहुंचा, तो गांव के लोगों में असंतोष फैल गया। घटना के तुरंत बाद उसी रात बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए और इस तरह की हिंसक वारंटियों पर अंकुश लगाने के लिए एक आपातकालीन बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से यह महसूस किया गया कि गांव में रह रहे बाहरी लोगों की सही और पुख्ता पहचान होना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की आपराधिक घटनाओं से बचा जा सके।

पहचान दस्तावेजों की अनिवार्यता और कड़े नियम

ग्रामीणों द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार अब गांव में निम्नलिखित नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा:

दस्तावेजों की जांच: गांव में रहने वाले या नया कमरा किराए पर लेने वाले प्रत्येक प्रवासी मजदूर के पास भारत सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र जैसे आधिकारिक दस्तावेज का होना अनिवार्य कर दिया गया है।

किराए पर रोक: यदि किसी भी व्यक्ति या मजदूर के पास यह पहचान पत्र नहीं पाया जाता है, तो मकान मालिक उसे अपने घर में कमरा किराए पर नहीं देंगे।

गांव छोड़ने के निर्देश: जिन लोगों के पास पहचान से जुड़े वैध दस्तावेज नहीं होंगे, उन्हें तत्काल प्रभाव से गांव छोड़कर जाने के लिए कहा गया है।

समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम

इस कड़े फैसले के सामने आने के बाद क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से यह बात साफ कर दी है कि उनका यह नियम या फैसला किसी भी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं है। उनका एकमात्र उद्देश्य गांव में रहने वाले हर एक नागरिक की पहचान सुनिश्चित करना और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसना है ताकि स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले मेहनतकश लोगों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल बना रहे। वर्तमान में इस मामले को लेकर स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्रवाई और ग्रामीणों के इस सख्त रुख पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

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