Haryana News: डेंगू मरीजों को राहत! Haryana में टेस्ट और प्लेटलेट्स की फीस फिक्स

हरियाणा सरकार ने डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों पर नियंत्रण के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। अब डेंगू टेस्ट और प्लेटलेट्स की फीस तय कर दी गई है, ताकि निजी अस्पताल मरीजों से मनमानी वसूली न कर सकें।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 13, 2026

Haryana News: हरियाणा सरकार ने प्रदेश में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) जैसी गंभीर बीमारियों पर नियंत्रण के लिए बड़े कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी नई अधिसूचना के तहत अब निजी अस्पतालों, लैब और क्लीनिकों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए डेंगू जांच और प्लेटलेट्स की फीस तय कर दी गई है। सरकार ने साफ कहा है कि निर्धारित शुल्क से अधिक पैसे वसूलने वाले अस्पतालों और लैब्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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डेंगू टेस्ट की फीस हुई निर्धारित

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एलिसा आधारित डेंगू टेस्ट और आईजीएम पद्धति से किए जाने वाले डेंगू परीक्षण के लिए कोई भी निजी लैब या क्लीनिक 600 रुपये से ज्यादा शुल्क नहीं ले सकेगा। सरकार का उद्देश्य मरीजों को राहत देना और इलाज के दौरान होने वाली आर्थिक परेशानी को कम करना है।

इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (SDP) के लिए निजी अस्पताल अधिकतम 11 हजार रुपये तक ही चार्ज कर सकेंगे। इससे अधिक राशि लेने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

24 घंटे में देनी होगी मरीजों की जानकारी

नई गाइडलाइन के तहत अब सरकारी और निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और जांच लैब्स को डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और जेई के मामलों की सूचना 24 घंटे के भीतर संबंधित जिले के सिविल सर्जन को देना अनिवार्य होगा। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समय पर जानकारी मिलने से बीमारी के फैलाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

सरकार ने यह फैसला प्रदेश में लगातार बढ़ रहे वेक्टर जनित रोगों के मामलों को देखते हुए लिया है। विभाग का कहना है कि सभी संस्थानों को राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।

निरीक्षण और जांच के लिए अधिकारियों को मिले अधिकार

सरकार ने स्वास्थ्य अधिकारियों को विशेष अधिकार भी दिए हैं। अब निरीक्षण अधिकारी किसी भी अस्पताल, लैब, क्लीनिक या अन्य परिसर में जाकर जांच कर सकेंगे। इसके अलावा फॉगिंग, एंटी-लार्वा अभियान और बुखार सर्वे जैसे कदम भी उठाए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर अधिकारियों को खून के नमूने लेने का भी अधिकार होगा। सरकार का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य संक्रमण को शुरुआती स्तर पर रोकना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

बिना पुष्टि किसी मरीज को नहीं घोषित कर सकेंगे डेंगू पॉजिटिव

स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी निजी लैब में एलिसा जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो मरीज का सैंपल सरकारी डेंगू टेस्टिंग लैब या सरकारी अस्पताल भेजना अनिवार्य होगा। बिना पुष्टि किए किसी भी मरीज को डेंगू पॉजिटिव घोषित नहीं किया जा सकेगा। सरकार ने इसे गंभीर लापरवाही माना है और ऐसे मामलों में कार्रवाई का प्रावधान रखा है।

नियम तोड़ने पर लगेगा भारी जुर्माना

सरकार ने चार प्रकार की लापरवाही को दंडनीय श्रेणी में रखा है। इनमें स्वास्थ्य विभाग को पुष्टि किए गए मामलों की जानकारी न देना, बिना कन्फर्म टेस्ट के मरीज को पॉजिटिव बताना, गलत जानकारी दर्ज करना और सरकारी प्रोटोकॉल का पालन न करना शामिल है।

नियमों का उल्लंघन करने पर पहली बार 1000 रुपये, दूसरी बार 5000 रुपये और तीसरी बार या उसके बाद 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। लगातार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ महामारी रोग अधिनियम 1897 की धारा-3 के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

सरकार का उद्देश्य मरीजों को राहत देना

हरियाणा सरकार का कहना है कि इन नए नियमों से मरीजों को सस्ती और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। साथ ही डेंगू और अन्य संक्रमण फैलाने वाली बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।

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