Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता और स्पष्टता लाने के लिए एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब सरकारी कर्मचारियों के ‘गृह नगर’ (होम टाउन) और ‘स्थायी पता’ (परमानेंट एड्रेस) के बीच एक स्पष्ट अंतर निर्धारित कर दिया गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य तबादलों, नियुक्तियों और कार्मिक प्रबंधन में एकरूपता सुनिश्चित करना तथा सर्विस रिकॉर्ड में होने वाले किसी भी प्रकार के भ्रम को समाप्त करना है।
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गृह नगर और स्थायी पते में स्पष्ट अंतर
सरकार ने साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि ‘गृह नगर’ और ‘स्थायी पता’ दो अलग-अलग अवधारणाएं हैं, जिन्हें नीतियों के क्रियान्वयन के दौरान एक-दूसरे का पर्याय नहीं माना जाएगा:
गृह नगर (Home Town): सामान्यतः यह वह मूल स्थान (गांव या शहर) माना जाएगा जहां कर्मचारी सरकारी सेवा में आने से पहले रहता था। इसके अलावा, जहाँ कर्मचारी का परिवार वर्तमान में रह रहा हो, जहाँ उसकी आवासीय संपत्ति हो, या जहाँ सामाजिक दायित्वों के कारण उसे नियमित जाना पड़ता हो, उसे गृह नगर के रूप में चिन्हित किया जाता है। सेवा पुस्तिका में दर्ज होने के बाद कर्मचारी के गृह जिले या गृह नगर में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा।
स्थायी पता (Permanent Address): सेवा में आने के बाद यदि कोई कर्मचारी विवाह, परिवार के स्थानांतरण या नई आवासीय संपत्ति खरीदने के कारण किसी अन्य स्थान पर बस जाता है, तो वह सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से अपना स्थायी पता बदल सकता है। यह छूट सेवा के दौरान और सेवानिवृत्ति के बाद भी लागू रहेगी, लेकिन इससे उसके मूल ‘गृह जिले’ के रिकॉर्ड पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
गृह जिले में तैनाती पर रोक और इसका प्रशासनिक महत्व
सरकार ने अपनी स्थानांतरण नीति को कड़ा करते हुए दोहराया है कि राजपत्रित अधिकारियों (Gazetted Officers) को सामान्यतः उनके गृह जिले में नियुक्त नहीं किया जाएगा। इस नियम के पीछे सरकार की सोच पूरी तरह प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने की है:
हितों के टकराव से बचाव: गृह नगर से बाहर तैनाती होने से स्थानीय हितों, रिश्तेदारों या मित्रों के कारण होने वाले संभावित पक्षपात और अनुचित प्रभाव की गुंजाइश खत्म होती है।
प्रशासनिक ईमानदारी: भूमि, कराधान, कानून-व्यवस्था, और सार्वजनिक धन से जुड़े संवेदनशील विभागों में यह नियम निष्पक्षता, वस्तुनिष्ठता और पेशेवर आचरण को बढ़ावा देगा, जिससे शासन में जनता का विश्वास मजबूत होगा।
कड़ाई से अनुपालन और भावी व्यवस्था
मानव संसाधन विभाग द्वारा जारी इन निर्देशों को राज्य के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों और विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को भेजकर कड़ाई से लागू करने के आदेश दिए गए हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में सक्षम प्राधिकारी द्वारा पहले ही गृह नगर या स्थायी पते में परिवर्तन की मंजूरी दी जा चुकी है, उन्हें दोबारा नहीं खोला जाएगा। यह नया स्पष्टीकरण राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में नियमों की एकरूप व्याख्या सुनिश्चित करेगा और कार्यकुशलता को एक नए स्तर पर ले जाएगा।
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