Haryana News: हरियाणा सरकार की नई औद्योगिक नीति (New Industrial Policy) इन दिनों न केवल देश में बल्कि सात समंदर पार विदेशों में भी सुर्खियों में है। टेक्सटाइल नगरी पानीपत के उद्योगपतियों के अनुसार, इटली जैसे देशों के बड़े व्यापारियों ने ‘हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ से संपर्क साधकर इस नई नीति की बारीकियों को समझने में रुचि दिखाई है। हालांकि, इस नीति को लेकर स्थानीय कारोबारियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। उनका कहना है कि नई नीति में जहां कई फैसले उद्योगों को बड़ी राहत देने वाले हैं, वहीं कुछ बिंदुओं पर अब भी सुधार की भारी गुंजाइश है।
Haryana News: हरियाणा सरकार का बड़ा ऐलान, योजना लाभ से नहीं होंगे अब कई परिवार बाहर
विदेशों तक पहुंची गूंज
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पानीपत चैप्टर) के प्रधान विनोद धमीजा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का विशेष ध्यान पानीपत के टेक्सटाइल हब पर है। इस ‘मेक इन हरियाणा’ नीति से ‘मेक इन पानीपत’ के अभियान को जबरदस्त मजबूती मिलेगी।
नई नीति के इंतजार में कई व्यापारियों ने अपने कोटेशन रोक रखे थे ताकि इसके लाभों को जोड़कर विदेशी खरीदारों को बेहतर ऑफर्स दिए जा सकें। अब विदेशी खरीदार (Global Buyers) लगातार स्थानीय कारोबारियों से संपर्क कर रहे हैं, ताकि यह जान सकें कि इस नई नीति से उत्पादन लागत में कितनी कमी आएगी और व्यापार को कितना बढ़ावा मिलेगा।
ब्याज माफी और मशीनरी पर सब्सिडी से बड़ी राहत
ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया (पानीपत) के प्रधान बीरभान सिंगला सहित अन्य उद्योगपतियों ने नीति के सकारात्मक फैसलों का पुरजोर स्वागत किया है। उद्योग जगत के लिए इसके सबसे ‘मीठे’ और फायदेमंद बिंदु निम्नलिखित हैं। सरकार द्वारा पुराने CST (सेंट्रल सेल्स टैक्स) और GST मामलों में ब्याज माफी का फैसला कारोबारियों के लिए संजीवनी जैसा है। इससे लंबे समय से चल रहे टैक्स विवादों और रिकवरी के मानसिक तनाव से व्यापारियों को मुक्ति मिलेगी। सिंगला के अनुसार, CST मामलों में ब्याज माफी से व्यापारियों को सीधे 20 से 30 प्रतिशत तक का आर्थिक लाभ होगा।
इम्पोर्टेड (आयातित) मशीनरी पर 5 से 30 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का निर्णय बेहद फायदेमंद साबित होगा। इससे उद्योगपतियों को नई तकनीक और आधुनिक मशीनें स्थापित करने में मदद मिलेगी। एक एकड़ या उससे अधिक भूमि से जुड़ी औद्योगिक समस्याओं का भी इस नीति में काफी हद तक समाधान किया गया है। उद्योगपतियों ने मांग की है कि सरकार इसका नोटिफिकेशन जल्द से जल्द जारी करे ताकि धरातल पर इसका लाभ मिलना शुरू हो सके।
ब्लॉक सिस्टम और सब्सिडी पर नाराजगी
सराहना के साथ-साथ उद्योगपतियों ने नीति के कुछ ‘कड़वे’ अनुभवों को भी साझा किया है। उनका मानना है कि जिस स्तर की राहत की उम्मीद व्यापार जगत कर रहा था, वह पूरी तरह नहीं मिल सकी है। व्यापारियों की मुख्य मांग ब्लॉक सिस्टम को पूरी तरह खत्म करने की थी, लेकिन सरकार ने ब्लॉक्स को श्रेणियों (Categories) में बांट दिया। इससे उद्योगपतियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा। फ्रेट सब्सिडी (माल भाड़ा) और उत्पादन लागत को कम करने के लिए सब्सिडी में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है, जिससे व्यापारियों में थोड़ी मायूसी है।
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