Haryana News: हरियाणा के करनाल जिले की स्थानीय राजनीति में लंबे समय से चल रहा सियासी घमासान आखिरकार गुरुवार को एक बड़े बदलाव पर आकर खत्म हुआ। जिला परिषद की राजनीति में पिछले कई हफ्तों से जारी भारी गतिरोध और खींचतान के बीच आखिरकार भाजपा समर्थित जिला परिषद अध्यक्ष प्रवेश कुमारी की कुर्सी छिन ही गई। उनके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भारी बहुमत के साथ पारित हो गया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अपने पद से हाथ धोना पड़ा है। उपायुक्त (डीसी) डॉ. आनंद शर्मा की अध्यक्षता और कड़ी प्रशासनिक निगरानी में जिला परिषद कार्यालय के सभागार में यह विशेष बैठक आयोजित की गई, जहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत मतदान कराया गया।
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मतदान के आंकड़े और पूरी प्रशासनिक कार्रवाई
प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुई इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी प्रकार के व्यवшаर से बचा जा सके।
मतदान से जुड़े मुख्य आंकड़े और घटनाक्रम इस प्रकार रहे:
पार्षदों की उपस्थिति: जिला परिषद के कुल 25 सदस्यों में से गुरुवार को हुई इस अहम बैठक में 19 पार्षद उपस्थित हुए, जिन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान: उपस्थित 19 सदस्यों में से 17 पार्षदों ने खुलकर अध्यक्ष प्रवेश कुमारी के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में अपना वोट डाला और वर्तमान नेतृत्व से अपना पूरा विश्वास वापस ले लिया।
नतीजे की घोषणा: बहुमत साबित न होने और 17 पार्षदों के खिलाफ जाने के बाद अध्यक्ष प्रवेश कुमारी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आधिकारिक रूप से पारित घोषित कर दिया गया। इसके साथ ही जिला परिषद की मौजूदा सियासत में बड़ा भूचाल आ गया है।
आगे की प्रक्रिया: प्रशासन के मुताबिक, नियमों के अनुसार अब जिला परिषद के नए अध्यक्ष के चुनाव की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके लिए बहुत जल्द नई तिथि की घोषणा होने की पूरी संभावना है।
पिछले दो महीनों से चल रही थी सियासी उथल-पुथल
यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम रातों-रात नहीं हुआ, बल्कि पिछले दो महीनों से लगातार सुलग रही नाराजगी और अंदरूनी कलह का परिणाम है। पिछले कुछ समय से जिला परिषद के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा था, जो अब जाकर अपने चरम पर पहुंच गया।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो
मोर्चाबंदी की शुरुआत: बीते 2 मार्च को ही भाजपा समर्थित वाइस चेयरपर्सन और कई अन्य प्रभावशाली सदस्यों ने अध्यक्ष प्रवेश कुमारी के खिलाफ खुलकर बगावत का झंडा बुलंद कर दिया था।
ज्ञापन और मांग: उस दौरान लगभग 16 असंतुष्ट सदस्यों ने एकजुट होकर तत्कालीन उपायुक्त उत्तम सिंह को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन में उन्होंने साफ तौर पर अविश्वास प्रस्ताव लाने और जिला परिषद को नया नेतृत्व सौंपने की मांग की थी।
प्रशासनिक तारीखें और बदलाव: प्रशासन ने इस मामले में पहले 17 अप्रैल की तारीख बैठक के लिए निर्धारित की थी, लेकिन किन्हीं कारणों से उस समय यह बैठक टल गई थी और फैसला नहीं हो सका था। इसके बाद, नए उपायुक्त के रूप में डॉ. आनंद शर्मा ने कार्यभार संभाला और उनके नेतृत्व में आखिरकार गुरुवार को यह बहुप्रतीक्षित बैठक सफलतापूर्वक आयोजित की जा सकी, जिसमें पार्षदों ने वोटिंग के जरिए बड़ा फैसला सुना दिया।
इस बड़े सियासी उलटफेर के बाद अब करनाल की स्थानीय राजनीति में नए अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए जोड़-तोड़ और मुलाकातों का दौर फिर से तेज होने के आसार हैं।
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