Haryana News: हरियाणा के यमुनानगर जिले में स्थित खानूवाला गांव के निवासियों के लिए आखिरकार एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। हर साल मानसून के आते ही बाढ़ की विभीषिका और तबाही का दंश झेलने वाले ग्रामीणों को अब अपनी जिंदगी और आशियाने सुरक्षित रहने की उम्मीद जगी है। बरसों से पानी के रौद्र रूप की मार झेल रहे ग्रामीण अब यह आस लगाए बैठे हैं कि इस साल मानसून उनके घर, खेतों और फसलों को तबाह नहीं कर पाएगा। ग्रामीणों की इस उम्मीद की वजह सिंचाई विभाग द्वारा उठाया गया एक बड़ा कदम है, जिसके तहत सोम नदी के किनारों को पक्का और मजबूत करने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है।
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सोम नदी बनी हुई थी आफत
गौरतलब है कि खानूवाला गांव के ठीक पीछे से गुजरने वाली सोम नदी पिछले दो-तीन सालों से स्थानीय लोगों के लिए काल बनी हुई थी। हर साल मानसून के सीजन में पहाड़ी इलाकों में होने वाली भारी बारिश के कारण यह नदी उफान पर आ जाती थी और देखते ही देखते इसका मटमैला पानी पूरे गांव को अपनी आगोश में ले लेता था। दो साल पहले तो हालात इतने भयावह और बेकाबू हो गए थे कि गांव के भीतर करीब 7 फीट तक पानी भर गया था।
इस प्रलयंकारी बाढ़ के कारण लोगों के पक्के मकान डूब गए थे, कई मवेशी पानी के तेज बहाव में बह गए और खेतों में लहलहाती करोड़ों रुपये की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई थीं। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी थी कि दर्जनों परिवारों को अपनी जान बचाने के लिए अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
हजारों टन पत्थरों से थमेगा नदी का कटाव
इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब सिंचाई विभाग ने बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। विभाग ने सोम नदी के दोनों किनारों को हजारों टन भारी-भरकम पत्थरों (स्टोन स्टडिंग) से पूरी तरह से मजबूत करने का काम शुरू कर दिया है। विभाग की तरफ से भारी मात्रा में पत्थर सीधे फ्लड साइट पर पहुंचा दिए गए हैं, जिन्हें जल्द ही आधुनिक मशीनों की मदद से नदी के दोनों तटबंधों पर लगाया जाएगा।
प्रशासन और इंजीनियरों का दावा है कि पत्थरों की इस मजबूत दीवार से नदी के तेज बहाव के कारण होने वाले मिट्टी के कटाव पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। इसके परिणामस्वरूप, नदी का पानी ओवरफ्लो होने के बावजूद गांव की सीमा के भीतर प्रवेश नहीं कर पाएगा। स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि यदि यह सुरक्षा कार्य समय रहते और पूरी ईमानदारी से पूरा हो जाता है, तो न केवल खानूवाला बल्कि इसके आसपास के दर्जनों अन्य गांवों को भी बाढ़ के खौफ से हमेशा के लिए बड़ी राहत मिल जाएगी।
जिले भर में 40 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट
अब सबसे बड़ा और अहम सवाल यही खड़ा होता है कि क्या सिंचाई विभाग इस भारी-भरकम प्रोजेक्ट को मानसून की पहली बारिश से पहले मुकम्मल कर पाएगा? अगर काम में थोड़ी भी ढिलाई बरती गई और प्रोजेक्ट अधूरा रह गया, तो एक बार फिर मानसून की पहली ही बाढ़ में हजारों ग्रामीणों की उम्मीदें और मेहनत पानी में बह सकती हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, यमुनानगर जिले में सिंचाई विभाग कुल 40 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से करीब 28 अलग-अलग संवेदनशील साइट्स पर बाढ़ सुरक्षा और रोकथाम से जुड़े कार्यों को अंजाम दे रहा है। हालांकि, खानूवाला के निवासियों के लिए यह महज कोई सरकारी आंकड़ा या विकास प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह उनकी जिंदगी, आजीविका और तबाही के बीच की एक आखिरी लड़ाई है। इस बार पूरा गांव सामूहिक रूप से दुआ कर रहा है कि इस मानसून में उन्हें सोम नदी का रौद्र रूप नहीं, बल्कि प्रशासन की तरफ से मुकम्मल राहत देखने को मिले।










