Haryana News: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, बिजली उपभोक्ताओं को सरचार्ज और लोड नियमों में राहत

हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए अनधिकृत लोड पर सरचार्ज में ढील दी है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 5, 2026

Haryana News: हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने राज्य के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को एक बहुत बड़ी राहत देते हुए बिजली आपूर्ति से जुड़े दो प्रमुख विनियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इन नए संशोधनों के लागू होने से विशेष रूप से औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को अनावश्यक वित्तीय बोझ और जटिल प्रक्रियाओं से बड़ी मुक्ति मिलेगी। अब स्वीकृत कॉन्ट्रैक्ट डिमांड से थोड़ा अधिक बिजली उपयोग करने पर भारी सरचार्ज से राहत दी गई है, साथ ही लोड को घटाने और दोबारा बहाल कराने के नियमों को भी काफी आसान और उपभोक्ता-अनुकूल बना दिया गया है।

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अनधिकृत लोड पर सरचार्ज के नियमों में बड़ी ढील

एचईआरसी द्वारा अधिसूचित ‘बिजली आपूर्ति संहिता विनियम, 2014 (सातवां संशोधन) विनियम, 2026’ के तहत अनधिकृत लोड पर लागू होने वाली पुरानी और सख्त सरचार्ज व्यवस्था को अब बेहद तर्कसंगत बना दिया गया है:

पुरानी व्यवस्था: पहले यदि कोई उपभोक्ता अपने स्वीकृत लोड से मात्र 5 प्रतिशत अधिक बिजली की मांग करता था, तो उसके पूरे बिजली शुल्क पर सीधे तौर पर 25 प्रतिशत का भारी-भरकम सरचार्ज लगा दिया जाता था।

नई संशोधित व्यवस्था: अब नई व्यवस्था के अनुसार, यदि उपभोक्ता स्वीकृत लोड के 110 प्रतिशत तक बिजली का उपयोग करता है, तो उस पर कोई सरचार्ज नहीं लगेगा। यदि बिजली की मांग 110 प्रतिशत से 115 प्रतिशत के बीच रहती है, तो केवल कुल बिजली शुल्क पर 20 प्रतिशत सरचार्ज ही वसूला जाएगा। वहीं, मांग 115 प्रतिशत से अधिक होने पर ही पहले की तरह 25 प्रतिशत सरचार्ज लागू होगा।

आयोग का मानना है कि इस बदलाव से उन उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा, जहां मौसमी बदलावों या अचानक उत्पादन बढ़ने के कारण बिजली की खपत अस्थायी रूप से बढ़ जाती है।

लोड कम कराने और पुनर्बहाली की प्रक्रिया हुई आसान

इसके साथ ही, आयोग ने ‘ड्यूटी टू सप्लाई ऑफ इलेक्ट्रिसिटी विनियम, 2016 (चौथा संशोधन) विनियम, 2026’ के जरिए उपभोक्ताओं के लिए लोड कम करवाने और उसे पुनः बहाल (Restore) कराने के नियमों को भी काफी सरल कर दिया है:

प्रोसेसिंग शुल्क: यदि कोई उपभोक्ता बिना वोल्टेज स्तर में बदलाव किए अपना लोड कम कराता है, तो उसे केवल एक निर्धारित प्रोसेसिंग शुल्क देना होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 20,000 रुपये तय की गई है। वोल्टेज स्तर बदलने पर सेवा कनेक्शन शुल्क केवल संशोधित लोड के आधार पर ही देय होगा।

पुनर्बहाली की सुविधा: संशोधित नियमों के तहत, लोड कम कराने वाला कोई भी उपभोक्ता तीन साल के भीतर बिना कोई नया सेवा कनेक्शन शुल्क दिए अपने मूल स्वीकृत लोड को दोबारा बहाल करा सकता है।

ये शर्तें और प्रतिबंध भी रहेंगे लागू

हालांकि इन नियमों में कई सहूलियतें दी गई हैं, लेकिन इसका दुरुपयोग रोकने के लिए कुछ स्पष्ट शर्तें भी निर्धारित की गई हैं:

लोड घटाने या उसकी पुनर्बहाली के बाद छह महीने का लॉक-इन पीरियड रहेगा। एक उपभोक्ता को 3 साल की अवधि में केवल एक बार लोड कम कराने और एक बार ही पुनर्बहाली की अनुमति मिलेगी। लोड की पुनर्बहाली वितरण निगम द्वारा सिस्टम क्षमता के आकलन के बाद ही की जाएगी और मीटर बदलने का खर्च उपभोक्ता को खुद उठाना होगा। जिन उपभोक्ताओं पर बिजली बिल बकाया है, जिनके मामले कोर्ट में लंबित हैं या जिन पर बिजली चोरी के केस चल रहे हैं, वे इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पाएंगे।

हरियाणा सरकार के राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही ये सभी संशोधन तुरंत प्रभाव से लागू हो चुके हैं। इन फैसलों से राज्य में व्यापारिक सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा मिलेगा और उपभोक्ताओं को अधिक पारदर्शी व संतुलित नियामकीय व्यवस्था का लाभ मिलेगा।

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