Haryana News: भारतीय रेलवे की ग्रीन क्रांति! हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना के परीक्षण का बड़ा अपडेट

भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना निर्णायक चरण में पहुंच गई है। हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर होने वाला परीक्षण इस ग्रीन टेक्नोलॉजी की सफलता और देश की भविष्य की रेल रणनीति तय करने में अहम माना जा रहा है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 5, 2026

Haryana News: भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी और अत्याधुनिक हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना अब एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर आ पहुंची है, जहां इसकी सफलता या असफलता देश के भविष्य की रेल परिवहन रणनीति को पूरी तरह तय करेगी। हरियाणा में शुरू की गई देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन केवल एक नई रेल सेवा भर नहीं है, बल्कि यह भारतीय रेलवे के लिए ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट’ तकनीक का अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा परीक्षण बन चुकी है। केंद्र सरकार ने संसद में यह स्पष्ट कर दिया है कि देश के अन्य रेल मार्गों पर हाइड्रोजन ट्रेनों का व्यावसायिक विस्तार पूरी तरह से इसी पायलट परियोजना के मैदानी प्रदर्शन और परिणामों पर निर्भर करेगा।

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जींद-सोनीपत रेलखंड बना राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र

लोकसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि फिलहाल यह पूरी परियोजना पायलट आधार पर चलाई जा रही है।

तकनीकी मूल्यांकन: इसके परिचालन अनुभव, तकनीकी प्रदर्शन, रखरखाव की सुगमता, लागत और उपलब्ध संसाधनों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद ही भविष्य में अन्य रेलखंडों पर इसके विस्तार का निर्णय लिया जाएगा।

जिम्मेदारी: जींद से सोनीपत के बीच फैला 89 किलोमीटर लंबा रेलमार्ग अब केवल एक आम रेललाइन नहीं रह गया है, बल्कि यह भारतीय रेलवे की हरित तकनीक की सबसे बड़ी प्रयोगशाला बन चुका है।

जलवायु और चुनौतियां: इसी मार्ग पर यह परखा जा रहा है कि हाइड्रोजन ईंधन पर आधारित यह ट्रेन भारतीय जलवायु, लंबी दूरी के परिचालन, नियमित संचालन और रख-रखाव की तमाम चुनौतियों के बीच कितनी खरी उतरती है। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो देश के अन्य गैर-विद्युतीकृत रेलखंडों पर भी ऐसी ट्रेनें चलाने का रास्ता साफ हो जाएगा।

शुरुआती परिचालन ने बढ़ाया रेलवे का भरोसा

शुरुआती दौर के आंकड़ों ने रेलवे प्रशासन का उत्साह और भरोसा दोनों बढ़ाया है।

सफल संचालन: 17 जुलाई को सेवा की शुरुआत होने के बाद से 25 जुलाई तक इस हाइड्रोजन ट्रेन ने 89 किमी के इस सेक्शन पर कुल 1,256 किलोमीटर का सफल व्यावसायिक संचालन पूरा कर लिया है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर: इस पूरी परियोजना के लिए जींद में विशेष रूप से एक हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र स्थापित किया गया है, जबकि ईंधन के भंडारण और उसकी सुरक्षित आपूर्ति प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। अब रेलवे इसकी ईंधन दक्षता और तकनीकी विश्वसनीयता का गहराई से अध्ययन कर रहा है।

तकनीक को साबित करना और वैश्विक पहचान

रेलवे ने फिलहाल इस परियोजना की आर्थिक लागत की तुलना पारंपरिक डीजल ट्रेनों से करने से परहेज किया है। सरकार का मानना है कि प्रोजेक्ट अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। सबसे बड़ी प्राथमिकता यह साबित करना है कि यह तकनीक लंबे समय तक सुरक्षित और व्यावहारिक है या नहीं।

वैश्विक महत्व: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस परियोजना पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह दुनिया की सबसे लंबी ब्रॉडगेज लाइन पर संचालित होने वाली सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजनाओं में से एक है।

भविष्य की दिशा: जींद-सोनीपत रेलखंड पर मिलने वाले अनुभव ही यह तय करेंगे कि आने वाले समय में देश के किन-किन रूटों पर हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। फिलहाल, यह पायलट प्रोजेक्ट भारत के हरित भविष्य की दिशा तय करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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