Haryana News: हरियाणा सरकार का बड़ा ऐलान! धान की रोपाई पर रोक, सीधी बिजाई पर ₹4500 इनाम

हरियाणा में 'मेरा पानी, मेरी विरासत' योजना अब सभी जिलों में लागू। धान छोड़ कम पानी वाली वैकल्पिक फसलें उगाने पर किसानों को मिलेंगे ₹8000 प्रति एकड़; जानें पंजीकरण की आखिरी तारीख और पूरी प्रक्रिया।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 23, 2026

Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य में गिरते भूजल स्तर को सुधारने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने राज्यभर में धान की पारंपरिक रोपाई (कद्दु करके धान लगाना) पर 15 जून 2026 तक पूरी तरह से रोक लगा दी है। इसके साथ ही, पानी की बचत करने वाली आधुनिक तकनीकों और वैकल्पिक फसलों को अपनाने वाले किसानों के लिए भारी-भरकम वित्तीय सहायता और अनुदान की घोषणा की गई है। सरकार का यह कदम पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में भी बड़ा मददगार साबित होगा।

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‘मेरा पानी, मेरी विरासत’ योजना का दायरा बढ़ा

जल संरक्षण को समर्पित हरियाणा सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मेरा पानी, मेरी विरासत’ योजना को अब राज्य के सभी जिलों में समान रूप से लागू कर दिया गया है। इस योजना के तहत जो किसान धान की खेती छोड़कर पानी की कम खपत वाली अन्य वैकल्पिक फसलों का चयन करेंगे, उन्हें सरकार की तरफ से ₹8,000 प्रति एकड़ की बड़ी अनुदान राशि दी जाएगी।

योजना के तहत प्रोत्साहन राशि पाने के लिए किसान धान के स्थान पर निम्नलिखित फसलें लगा सकते हैं:

अनाज व अन्य व्यावसायिक फसलें: मक्का, कपास, ग्वार, सोयाबीन, चारा फसलें और सूरजमुखी।

दलहन और तिलहन: अरहर, मूंग, मोठ, उड़द, तिल, अरंडी और मूंगफली।

बागवानी व वृक्षारोपण: प्याज, विभिन्न प्रकार की सब्जियां, पापुलर और सफेदा के पेड़।

खेत खाली रखने पर भी मिलेगा लाभ

सरकार ने यह भी साफ किया है कि यदि कोई किसान अपने खेत में धान की फसल नहीं लगाता और जल संरक्षण के उद्देश्य से अपने खेत को खाली भी छोड़ देता है, तो भी वह इस योजना के अंतर्गत ₹8,000 प्रति एकड़ का लाभ पाने का हकदार होगा।

दलहन, तिलहन और कपास की खेती पर ₹2,000 का अतिरिक्त बोनस

राज्य में फसलों के विविधीकरण (Crop Diversification) को और अधिक मजबूत करने के लिए सरकार ने विशेष प्रोत्साहन की व्यवस्था की है। जो किसान धान को छोड़कर विशेष रूप से दलहन (दालें), तिलहन (तेल बीज) और कपास की खेती को अपनाएंगे, उन्हें तय अनुदान के अलावा ₹2,000 प्रति एकड़ का अतिरिक्त बोनस भी दिया जाएगा। इसका सीधा उद्देश्य राज्य में कम पानी वाली नकदी फसलों के रकबे को बढ़ाना है।

धान की सीधी बिजाई (DSR) करने पर मिलेंगे ₹4,500 प्रति एकड़

जो किसान धान की खेती ही करना चाहते हैं, उनके लिए भी सरकार ने पानी बचाने का बेहतरीन विकल्प दिया है। महेंद्रगढ़ जिले को छोड़कर (जहां धान की खेती न के बराबर होती है) राज्य के सभी जिलों में धान की सीधी बिजाई (Direct Seeding of Rice – DSR) योजना को लागू कर दिया गया है।

पारंपरिक रोपाई की तुलना में सीधी बिजाई में पानी की भारी बचत होती है। इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सरकार सीधी बिजाई करने वाले किसानों को ₹4,500 प्रति एकड़ का अनुदान देगी। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी, हालांकि इसके लिए कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा खेत का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाना अनिवार्य होगा।

जरूरी तारीखें और पंजीकरण की प्रक्रिया

इन सभी सरकारी योजनाओं और अनुदान का लाभ उठाने के लिए किसानों के लिए समय रहते पंजीकरण कराना जरूरी है:

रजिस्ट्रेशन की शुरुआत: योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 20 मई से शुरू हो चुकी है।

अंतिम तिथि: धान की सीधी बिजाई और वैकल्पिक फसलों के अनुदान के लिए किसान 15 जून तक अपना पंजीकरण करा सकते हैं।

कहाँ करें आवेदन: योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जो हरियाणा सरकार के आधिकारिक ‘मेरी फसल, मेरा ब्योरा’ (MFMB) पोर्टल पर अपना पंजीकरण दर्ज करवाएंगे।

सरकार की इस पहल से जहां एक तरफ प्रदेश का कीमती पानी बचेगा, वहीं दूसरी तरफ किसानों को अपनी लागत कम करने और सरकार से सीधे आर्थिक लाभ पाने का एक सुनहरा मौका मिलेगा।

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