Haryana News: हरियाणा के प्रमुख राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले जननायक जनता पार्टी (JJP) के वरिष्ठ और सक्रिय युवा नेता दिग्विजय सिंह चौटाला ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बार फिर से कदम बढ़ाते हुए कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी (KUK) में दाखिला लिया है। छात्र राजनीति और प्रदेश की मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय रहने वाले दिग्विजय सिंह चौटाला ने यूनिवर्सिटी में मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA) पाठ्यक्रम के लिए अपना औपचारिक आवेदन फॉर्म जमा कर दिया है। उनके इस कदम की चारों तरफ सराहना हो रही है, क्योंकि राजनीति में व्यस्त रहने के बावजूद वे अपनी उच्च शिक्षा और अकादमिक सफर को लगातार जारी रखे हुए हैं।
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पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं दिग्विजय सिंह चौटाला
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि के लिहाज से इस परिवार का कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के साथ एक पुराना और गहरा नाता रहा है। दिग्विजय चौटाला के पिता और हरियाणा के पूर्व सांसद डॉ. अजय सिंह चौटाला ने भी अपनी उच्च शिक्षा इसी प्रतिष्ठित कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से ही पूरी की थी। डॉ. अजय सिंह चौटाला ने यहीं से अपना शोध कार्य (Research) सफलतापूर्वक पूरा किया था और पीएचडी (PhD) की उपाधि प्राप्त की थी। अब ठीक उसी परंपरा और विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनके बेटे दिग्विजय सिंह चौटाला भी अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए इसी ऐतिहासिक विश्वविद्यालय से अपनी स्नातकोत्तर (Post Graduation) की पढ़ाई पूरी करने जा रहे हैं। पिता-पुत्र के इस शैक्षणिक जुड़ाव को लेकर यूनिवर्सिटी परिसर में भी काफी उत्साह का माहौल है।
राजनीतिक गलियारों और यूनिवर्सिटी परिसर में चर्चा का विषय
दिग्विजय सिंह चौटाला के कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने की खबर सामने आने के बाद से ही विश्वविद्यालय परिसर से लेकर पूरे हरियाणा के राजनीतिक हलकों में इसकी खासी चर्चा हो रही है। दिग्विजय चौटाला जेजेपी के सबसे प्रमुख और लोकप्रिय युवा चेहरों में गिने जाते हैं, जो अक्सर छात्र कल्याण, युवाओं के रोजगार और शिक्षण संस्थानों से जुड़े मुद्दों को बड़ी मुखरता के साथ उठाते रहे हैं। ऐसे में खुद एक सक्रिय राजनेता द्वारा दोबारा से विधिवत रूप से उच्च शिक्षा ग्रहण करने का निर्णय लेना युवाओं के बीच एक सकारात्मक संदेश देता है। यह इस बात का प्रमाण है कि जीवन में राजनीतिक व्यस्तताएं कितनी भी क्यों न हों, लेकिन ज्ञान अर्जन और शिक्षा के प्रति समर्पण हमेशा सर्वोपरि रहना चाहिए। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी प्रशासन और छात्र वर्ग के बीच भी उनके इस निर्णय को लेकर काफी उत्सुकता और सम्मान का भाव देखा जा रहा है।
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