Haryana News: हरियाणा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अनिल विज ने अंबाला कैंट को फ्री होल्ड करने के मुद्दे पर राजनीति गर्मा दी है। हाल ही में उनके इस्तीफे की मांग करने वालों पर पलटवार करते हुए विज ने दो टूक कहा कि जो लोग अंबाला कैंट के इतिहास और यहां की जमीन से जुड़े मामलों की बुनियादी समझ नहीं रखते, वही लोग ऐसी बचकानी बातें कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंबाला कैंट उनका घर है और यहां की जनता उनका अपना परिवार है। अपने परिवार की रक्षा और सुरक्षा करना वह अच्छी तरह जानते हैं।
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‘फ्री होल्ड नीति मैंने नहीं, हाईकोर्ट के आदेश पर अधिकारियों ने बनाई’
फ्री होल्ड नीति पर मचे घमासान के बीच विज ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कभी भी अंबाला कैंट को फ्री होल्ड कराने की वकालत नहीं की है। उन्होंने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अधिकारियों ने इस नीति का प्रारूप तैयार किया था। जब यह प्रस्ताव मंत्रिमंडल के सामने लाया गया, तो उन्होंने इसके कई प्रावधानों पर गहरी आपत्ति जताई और प्रस्ताव को डेफर (स्थगित) करवा दिया। विज का कहना है कि उनका विरोध ‘फ्री होल्ड’ शब्द से नहीं, बल्कि उन कठोर शर्तों से है जो नीति में शामिल की गई हैं।
नीति की शर्तें और आम जनता पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ
अनिल विज ने प्रस्तावित फ्री होल्ड नीति के कई प्रावधानों को अव्यवहारिक और जनता के हितों के खिलाफ बताया है:
मूल दस्तावेजों की अनिवार्यता: विज ने कहा कि अंबाला कैंट का इतिहास डेढ़ सौ साल से अधिक पुराना है। यहां पीढ़ियों से रह रहे परिवारों के पास मूल दस्तावेज सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे में दस्तावेज न होने पर हजारों लोग अपने अधिकारों से वंचित हो सकते हैं।
भारी भरकम आर्थिक बोझ: नीति के तहत कलेक्टर रेट के आधार पर 25% राशि आवेदन के समय और बाकी एक साल में चुकानी होगी। 1000 गज जमीन पर यह राशि करोड़ों में पहुंच जाएगी, जिससे मध्यम और गरीब वर्ग आर्थिक संकट में फंस जाएगा।
संपत्ति सील होने का खतरा: समय पर भुगतान न होने पर संपत्ति सील करने का प्रावधान आम नागरिकों के लिए बड़ा मानसिक तनाव पैदा करने वाला है।
मुख्यमंत्री से बैठक की मांग और संघर्ष का ऐलान
अनिल विज ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले पर एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाने की मांग की है, जिसमें संबंधित अधिकारियों, प्रभावित नागरिकों और सभी पक्षों को शामिल किया जाए ताकि संतुलित समाधान निकाला जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने आपत्तियों पर विचार नहीं किया, तो अंबाला के नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने के साथ-साथ जनआंदोलन भी खड़ा किया जाएगा।
इस्तीफे की मांग करने वालों को करारा जवाब देते हुए विज ने अंत में साफ कर दिया कि अंबाला की जनता ने उन्हें सातवीं बार विधायक बनाया है और वह अपने लोगों के अधिकारों के लिए पीछे हटने वाले नहीं हैं।
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