Haryana News: IAS अधिकारी पर जांच एजेंसी की कार्रवाई, गबन मामले में रिमांड मंजूर

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के करोड़ों रुपये के गबन मामले में हरियाणा के आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने 2 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 23, 2026

Haryana News: हरियाणा में चर्चित ‘आईडीएफसी फर्स्ट बैंक’ (IDFC First Bank) से जुड़े करोड़ों रुपये के गबन मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में संलिप्तता के आरोपों का सामना कर रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को सीबीआई की विशेष अदालत ने दो दिनों के लिए सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है। यह घटनाक्रम राज्य के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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कोर्ट में पेशी और रिमांड का आधार

सीबीआई की टीम ने आज पंचकूला स्थित हरियाणा की विशेष सीबीआई अदालत में आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को कड़ी सुरक्षा के बीच पेश किया। अदालत में सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अपनी दलीलों में स्पष्ट किया कि मामले की गहन जांच और आरोपियों के बीच साठगांठ का पता लगाने के लिए रिमांड अत्यंत आवश्यक है।

सीबीआई की ओर से तर्क दिया गया कि हालिया छापेमारी और जांच के दौरान आईएएस अधिकारी से जो इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (डिजिटल एविडेंस) बरामद किए गए हैं, उनका सत्यापन करना अभी बाकी है। इसके अतिरिक्त, बरामद इलेक्ट्रॉनिक डेटा के आधार पर अन्य आरोपियों के साथ उनका आमना-सामना (कांफ्रंटेशन) कराना जरूरी है, ताकि गबन की इस पूरी कड़ियों को आपस में जोड़ा जा सके।

बचाव पक्ष का तर्क और कानूनी स्थिति

पंकज अग्रवाल की ओर से पैरवी कर रहे बचाव पक्ष के वकील विशाल गर्ग ने अदालत के फैसले के बाद पत्रकारों को बताया कि सीबीआई की दलीलें और साक्ष्य उतने मजबूत नहीं थे कि उन्हें लंबी रिमांड दी जा सके, इसीलिए अदालत ने केवल दो दिनों की रिमांड ही मंजूर की है।

बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि आईएएस अधिकारी ने जांच में पूर्ण सहयोग दिया है। उनके अनुसार, पंकज अग्रवाल पिछले महीने ही आधिकारिक तौर पर इस जांच में शामिल हो गए थे। इसके साथ ही, उन्होंने केस से संबंधित महत्वपूर्ण फाइलें, व्यक्तिगत लैपटॉप और मोबाइल फोन पहले ही जांच एजेंसी को सौंप दिए थे। वकीलों का कहना है कि जब सारा डेटा और उपकरण एजेंसी के पास पहले ही उपलब्ध हैं, तो रिमांड की आवश्यकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मामला क्या है?

यह पूरा मामला करोड़ों रुपये के वित्तीय अनियमितताओं और बैंक गबन से जुड़ा है, जिसमें वित्तीय संस्थानों के साथ कथित मिलीभगत और दस्तावेजों के दुरुपयोग का आरोप है। सीबीआई इस मामले की विस्तृत तहकीकात कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सरकारी तंत्र और बैंक के बीच किस तरह का गठजोड़ था जिसने इस गबन को संभव बनाया।

आने वाले दो दिनों में सीबीआई अधिकारी पंकज अग्रवाल से उन डिजिटल साक्ष्यों के बारे में पूछताछ करेगी जो हाल ही में बरामद हुए हैं। इस रिमांड अवधि के दौरान जांच एजेंसी का मुख्य फोकस उन लोगों की पहचान करना है जो इस गबन के मास्टरमाइंड हो सकते हैं। इस घटना ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और सबकी नजरें अब रिमांड खत्म होने के बाद अदालत में होने वाली अगली पेशी पर टिकी हैं।

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